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मंदिरों के लिए कब तक शहीद होते रहेंगे वंचित समाज के लोग?

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हमारे जनपद देवरिया में देवरिया-रुद्रपुर रोड पर स्थित सरौरा चौराहे पर मन्दिर के जमीन की हिफाजत हेतु तीन पिछड़े वर्ग के लोग अपनी शहादत दे दिए हैं जबकि 8 लोग घायल हैं।इन सभी मृतकों व घायलों में कोई अभिजात्य वर्ग का नही है।जितने लोगो को गोली लगी है या मरे हैं वे राजभर,चौहान, कुशवाहा, यादव, सैथवार आदि जातियों के हैं जो पिछड़े वर्ग में आते हैं।

मामला कुछ यूं था कि एक पूर्व प्रधान हरिशंकर पांडेय हैं जिनका पेट्रोल पंप सरौरा में लगना था, वे पेट्रोल पम्प हेतु बाउंड्री करवा रहे थे। गांव वालों का कहना था कि उनकी बाउंड्री मन्दिर या ग्राम पंचायत की जमीन जो अब मन्दिर काज में आ गई है में बन रही है।हरिशंकर पांडेय की बाउंड्री का कुछ हिस्सा गांव वाले उजाड़ दिए जिसके बाद प्रशासन ने पैमाइश कर हरिशंकर पांडेय के पक्ष को सही ठहरा दिया। 14 अक्टूबर 2017 को हरिशंकर पांडेय अपने लाव-लश्कर के साथ पेट्रोल पंप की जमीन पर पंहुचकर पुनः निर्माण करवाने लगे जिसका ग्रामीणों ने प्रतिरोध किया और गोली चल गई जिसमें तीन लोग मर गए और आधे दर्जन से ज्यादा लोग घायल हो गए।

इस घटना के बाद देवरिया में लोग तरह-तरह की चर्चाओं में मशगूल है लेकिन सवाल यह है कि वह मन्दिर जिसमे चंदा देने,उसकी हिफाजत करने, निर्माण करवाने आदि तक तो हमारा अधिकार है केकिन उससे प्राप्त फल हर दशा में पुरोहित को ही मिलने का सुरक्षित अधिकार है।पूजा करवाने,आरती करने, भोग लगाने,दान-दक्षिणा लेने का सारा अधिकार एक खास वर्ग को आरक्षित है। अब सवाल उठता है कि उस मंदिर के लिए हमी शहादत क्यो दें ?

वर्तमान में सरकार मन्दिर समर्थकों की है, ब्राह्मण को ही मन्दिर का पुरोहित होना है और ब्राह्मण ही उस जमीन को कथित तौर पर कब्जिया रहा है और गोली कुशवाहा, राजभर, चौहान, यादव आदि खा रहा है, आखिर क्यों?

मन्दिर के लिए लड़ने वाले या शहादत देने वाले पिछ्डों!तुम्हारी औलादे मन्दिर की सेवा करने से गुलाम रहेंगी,दास रहेंगी और जब मन्दिर छोड़कर ज्ञानार्जन करोगे तो तुम्हारी औलादे कलक्टर-कप्तान बनेगी, आखिर इसे क्यो नही सोचते हो?

मुझे याद है करीब 7-8 साल पहले मेरे गांव से 4 किलोमीटर उत्तर देवरिया-कुशीनगर मार्ग पर पटनवा पुल चौराहे पर मन्दिर का पुजारी जल कर मर गया।कुछ पिछड़ी जाति के तथाकथित भक्तों ने एक मिशनरी दलित साथी को जमीन कब्जियाने की नीयत से उस पुजारी को जलाकर मार डालने का आरोप लगा आंदोलन खड़ा कर दिया जिसमें पुलिस को उग्र भीड़ पर फायरिंग करना पड़ा और एक पाल (भेड़िहार)नौजवान मारा गया तथा एक पाल व एक यादव नौजवान को गोली लग गयी।इस मामले में दर्जन भर लोग पुलिस से मारपीट,रायफल छीनने, बस फूंकने आदि केसों में मुजरिम है जिसमे एक मुसलमान,एक हजाम, एक सैथवार सहित 7-8 यादव मुकदमे में नामजद हैं जबकि प्राप्त जानकारी के मुताबिक पुजारी आत्महत्या किया था।

एक और वाकया काफी दिलचस्प है कि राम जी का मंदिर बनवाने के लिए अयोध्या में बाबरी मस्जिद के गुम्बद पर हथौड़ा लिए एक व्यक्ति को मुलायम सिंह यादव जी के निर्देश पर पुलिस ने मार गिराया था। विवादित बाबरी मस्जिद पर चढ़े व्यक्ति की मौत के बाद जब उसका हाल-पता ज्ञात किया गया तो पता चला कि वह यादव था जिसे संघ के लोगों ने नौकरी देने के नाम पर गुम्बद पर चढ़ा दिया था।

अब सवाल उठता है कि आखिर हम पिछड़े/वंचित लोग किसी के चढ़ाने या बहकाने पर अथवा भगवान की सेवा कर मोक्ष हेतु इतने उतावले क्यो हो जा रहे है कि हम जान तक दे दे रहे हैं। हम अपने अपमान, अपने शिक्षा,अपने सम्पत्ति एवं अपने अधिकार के लिए लड़ने को सामने नही आते हैं लेकिन भगवान के नाम पर जान तक दे दे रहे हैं।कब सुधरोगे पिछड़े/वंचित लोग?

(ये लेखक के निजी विचार हैं। चंद्रभूषण सिंह यादव त्रैमासिक पत्रिका यादव शक्ति के प्रधान संपादक हैं।)

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