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‘शटडाऊन जेएनयू’ चिल्लाने वालों को छात्रों ने चुनाव में ‘शटडाऊन’ कर दिया

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“शटडाऊन जेएनयू” का हैसटैग चलाने वालों को जेएनयू के छात्रों ने छात्रसंघ चुनाव में “शटडाऊन” कर दिया। आश्चर्य की बात यह है कि कल शाम में यह अफवाहबाज संघी जेएनयू के अध्यक्ष पद पर “एबीवीपी” के जीत पर एक दूसरे को बधाई दे रहे थे जिनमें कैलाश विजयवर्गी जैसा एक भाजपा का राष्ट्रीय महासचिव भी था।

दरअसल अफवाहबाज और झूठ की साँस लेने वालों का यही चरित्र है , झूठ ही इनकी आत्मा है झूठ ही इनका शरीर है झूठ ही इनका चरित्र है झूठ ही इनकी वाणी हैं।

जेएनयू के सभी विजयी पदाधिकारियों को बधाई और शुभकामनाएँ।

देश के गैर संघी और गैरभाजपाई नेताओं को जेएनयू से सीख लेनी चाहिए कि उन्होंने अपने कैम्पस को भगवा ज़हर से बचाने के लिए अपने तीन संगठनों के बीच आपसी गठबंधन बनाया और पद की लालच त्याग कर केवल जेएनयू हित में अपने वोटों का बिखराव होने नहीं दिया और जीत दर्ज करके भगवा कट्टरपंथियों को जोरदार थप्पड़ रसीद कर दिया।

यदि वह ऐसा नहीं करते तो वोटों के बिखराव के कारण इस चुनाव में भी हर जगह की तरह संघ का सपोला “एबीवीपी” जीत जाता। देश को बचाने और बर्बाद होने से रोकने के लिए संघ-भाजपा विरोधी पार्टियों और नेताओं को इन छात्रों से सीख लेनी चाहिए और इसी नीति के तहत 2019 की तैयारी कर देनी चाहिए जिसमें मात्र 17-18 महीने ही बचे हैं। मिलकर चुनाव में इन ज़हरीले सत्तासीन नागों का फन कुचल देना चाहिए जिन्होंने मात्र 42 महीने में देश की अर्थव्यवस्था , सुख शांति , आपसी सद्भाव और रेल को डिरेल कर दिया है।

भाजपा कहीं भी जीतती नहीं है बल्कि भाजपा विरोधी अपने से दोगुने वोटों के बिखराव के कारण लाभ पाती है और वही बिखराव जहाँ नहीं हुआ वहाँ बिल में घुस जाती है।

जेएनयू की तरह सभी विरोधी पार्टियों को पद और लाभ भूलकर देशहित में इस नाग को कुचलना ही होगा नहीं तच यह देश को डस-डस कर बर्बाद कर देगा।

(ये लेखक के निजी विचार हैं। मोहम्मद जाहिद पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता हैं।)

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