ट्रेंडिंग  
ट्रेंडिंग  
ब्लॉग

‘अब तेरे करतब की चर्चा गैर की महफिल में है’

akhilesh-yadav

अखिलेश यादव इस देश के एक ऐसे नायाब मुख्यमंत्री के रुप में अपनी अमिट छाप छोड़ते जा रहे हैं जो जितना पुराना हो रहा है उसका रंग उतना ही चटख होता जा रहा है। महज 22 महीने में 302 किलोमीटर लम्बा दुनिया का नायाब “लखनऊ-आगरा एक्सप्रेस वे” कई मायने में ऐतिहासिक और अद्वितीय हो गया है।भारतीय इतिहास में यह एक्सप्रेस वे “नोएडा-आगरा यमुना एक्सप्रेस वे” (मायावती द्वारा निर्मित) के बाद देश का पहला ऐसा एक्सप्रेस वे हो गया है जिस पर सर्वाधिक तीब्र गति वाले फाइटर विमान लैंड कराए जा सकते हैं।

दुनिया के देशों ने युद्ध के दौरान हवाई अड्डों को दुश्मन द्वारा तहस-नहस कर डालने की स्थिति में रोड-रन-वे बनाने की शुरुवात की लेकिन तथाकथित योग्यता/मेरिट धारी हुक्मरानों ने दुनिया के इस कांसेप्ट पर कोई काम नही किया कि भारत मे भी रोड-रन-वे बने।यह काम अभिजात्य वर्गो की नजर में तथाकथित रूप में नकारा आरक्षित वर्ग के मुख्यमंत्री सुश्री मायावती  व  अखिलेश यादव ने करके मूर्त रूप दिया।मायावती  ने जब यमुना एक्सप्रेस वे बनाया तो उसमें रोड-रन-वे बनाया जिस पर सर्वप्रथम जगुआर विमान उतारा गया।

सुश्री मायावती जी के बाद इंजीनियर मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने तो इस मामले में विश्व कीर्तिमान ही बना डाला। अखिलेश यादव ने रिकार्ड 22 महीने में 302 किलोमीटर लम्बा लखनऊ-आगरा एक्सप्रेस वे बना डाला। इतनी द्रुत गति से,इतनी मजबूत सड़क पूरे देश मे अब तक कोई नही बनी है। अखिलेश यादव द्वारा बनाये गए इस एक्सप्रेस वे का रन वे कितना मजबूत है कि वर्तमान योगी के सरकार के एक मंत्री इसकी गुणवत्ता जांचते हुते ज्यो ही गैता चलाये त्यों ही गिरकर चोटिल हो गए और 24 अक्टूबर 2017 को इस एक्सप्रेस वे ने एक इतिहास ही रच डाला जिस पर सबसे पहले भारी-भरकम हरक्यूलिस विमान उतरा और फिर एक के बाद एक 26 फाइटर विमान जगुआर, सुखोई और मेराज टच डाउन कर उपस्थित जन समूह को रोमांचित करते रहे। घण्टो चले इस ऐतिहासिक घटना ने अखिलेश यादव जी के इस नायाब कीर्ति का कीर्तिमान स्थापित कर दिया।

अखिलेश यादव के इस एक्सप्रेस वे की खूबियों को देखते हुये ऐसे ही 22 रोड-रन-वे बनाने का लक्ष्य रखा गया है। अखिलेश के इस सुकृत्य को देखकर कलाम साहब का वह कथन याद आता है कि “महान सपने देखने वालों के महान सपने हमेशा पूरे होते हैं” तथा “सपने वो नही होते जो रात को सोने पर आते हैं, सपने वो होते हैं जो सोने नही देते।”

हम तो 21 नवम्बर 2016 को इस एक्सप्रेस वे के उद्घाटन व विमानों की लैंडिंग की घटना को एक अजूबा करतब मानते हुये रोमांचित थे ही पर 24 अक्टूबर 2017 को अखिलेश यादव के इस सुकृत्य पर उड़ान भर रहे भारतीय मंसूबो को देखकर रोमांच के आखिरी सोपान पर पँहुच यह कहने को विवश हैं।

(ये लेखक के निजी विचार हैं। वरिष्ठ पत्रकार चंद्रभूषण सिंह यादव त्रैमासिक पत्रिका यादव शक्ति के प्रधान संपादक हैं।)

Latest अपडेट के लिए National Dastak पेज को Like और Follow करे

To Top

© copyright reserved National Dastak. All right reserved