ट्रेंडिंग  
ट्रेंडिंग  
ब्लॉग

गोरखपुर में मासूमों की मौत का जिम्मेदार कौन?

gorakhpur

यूपी का पूर्वांचल वैसे भी श्रीहीन है। यहां गरीबी, बीमारी, विपुल आबादी, छोटे-छोटे जोत के अलावा कुछ भी नही है फिर भी यह इलाका और इस इलाके के लोग बड़े सकून से रहते हैं। कठिनाइयां, दुश्वारियां झेलना, कभी गंडक, कभी राप्ती/गोर्रा/घाघरा आदि की बाढ़ तो कभी हैजा/ताऊन/मलेरिया/चेचक से त्रस्त तो अब इंसेफेलाइटिस/मस्तिष्क ज्वर से पस्त यह इलाका सँघर्ष करने से पीछे नही रहा है। इस इलाके ने स्वतंत्रता आंदोलन में चौरीचौरा कांड कर सात समुंदर पार से आये अंग्रेजो तक को हिला दिया था। सरकारे बदलने और बनाने में भी पूर्वांचल का अपना एक इतिहास है जिसकी एक इबारत अभी-अभी कुछ ही माह पूर्व अखिलेश यादव जी की सरकार के पदच्युत होने और आदित्यनाथ जी की सरकार के सत्त्तासीन होने की लिखी गयी जिसमे गोरखपुर मण्डल ने सिर्फ एक सपा, एक बसपा और एक कांग्रेस को सीट देकर सम्पूर्ण भाजपा खाते में डालकर योगी जी के मुख्यमंत्री बनने का मार्ग प्रशस्त किया लेकिन अब मुख्यमंत्री श्री आदित्यनाथ जी के सिरहाने मौत का यह खेल, इतने बच्चों की जानबूझ कर की गई हत्या, अजीब दास्ताँ बयां कर रहा है। ये मौतें योगी जी को चैलेंज हैं।

मुझे याद है कि देश की सन्सद से लेकर गोरखपुर की सड़कों तक पर योगी जी इंसेफेलाइटिस पर अत्यधिक चिंता जताते थे। वे विपक्षी सरकारों पर दोषारोपण करते थे कि ये सरकारे नालयक हैं जो समुचित इंतजाम नही कर पा रही हैं लेकिन अब क्या कहा जाय योगी जी, जब सारे इंतजाम का जिम्मा आपके कंधों पर और वह हो गया जो अब तक सत्त्तासीन रहे आपके कथनानुसार नालयक लोगो की सरकार में नही हुवा था।

गोरखपुर मेडिकल कालेज में विगत दो दिनों में आक्सीजन के अभाव में 40 बच्चे मर गए, यह पूरी मानवता को शर्मशार करने वाली दुर्घटना है। हम बच्चों को चंद सांसे न दे पांये इससे अधिक सोचनीय और शर्मनाक क्या हो सकता है? इस देश मे एक नेता हुए लालबहादुर शास्त्री जी जिन्होंने रेल दुर्घटना होने पर खुद को जिम्मेदार माना और त्यागपत्र दे डाला, प्रधानमंत्री बनने पर ताशकंद समझौते पर हस्ताक्षर करने के बाद इस अंदेशे में कि कहीं देश के विरुद्ध तो कोई समझौता नही हो गया, हर्ट अटैक से मौत को प्राप्त हो गए और आज उनके नाती स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह जी इन बच्चों की मौत का जिम्मेदार अगस्त महीने को बना रहे हैं? यह अद्भुत है।

योगी जी के मुख्यमंत्री बनने से पूर्वांचल को बड़ी उम्मीदें थीं, रहनी भी चाहिए क्योकि कितना भी भोथरा हथियार रहता है,खींचता अपनी ही तरफ है। हमलोग देख भी रहे हैं कि जो भी मुख्यमंत्री हुवा है उसने अपने इलाके का जरा ज्यादा ध्यान दिया है। पूर्वांचल के विकास में मुख्यमंत्री रहे वीरबहादुर सिंह जी और केंद्रीय मंत्री रहे कल्पनाथ राय जी का योगदान सराहनीय रहा है, अब योगी जी से उम्मीदें थीं लेकिन योगी जी के संसदीय क्षेत्र/जिले/नगर में, उनकी नाक के नीचे आक्सीजन मतलब हवा के अभाव में बच्चों का मरना, पूर्वांचल की जनता के उम्मीदों,सपनो का टूटना है।योगी जी !अब आप ही निर्णय करें कि यदि आप विपक्ष में होते तो ऐसी हृदय विदारक घटना पर क्या बयान देते? योगी जी! आप हमारे हैं/हमारे पूर्वांचल के हैं इसलिए हम आपकी अंतरात्मा पर ही छोड़ते हैं कि क्या सजा है इस जघन्य अपराध का और दोषी कौन लोग है/जिम्मेदार कौन लोग हैं इन मासूमो की मौत का या यूं कहें कि हत्या का?

(ये लेखक के निजी विचार हैं। चंद्रभूषण सिंह यादव त्रैमासिक पत्रिका ‘यादव शक्ति’ के प्रधान संपादक हैं।)

Latest अपडेट के लिए National Dastak पेज को Like और Follow करे

To Top

© copyright reserved National Dastak. All right reserved