ट्रेंडिंग  
ट्रेंडिंग  
अर्थजगत

योगी जी, किसान उगाना भी जानता है और काटना भी

वाराणसी। बीजेपी शासित राज्य यूपी में किसान योगी सरकार द्वारा ठगा हुआ महसूस कर रहा है। योगी सरकार और उनकी कैबिनेट ने अपनी पहली मीटिंग में ही किसानों के कर्जमाफी की बात कही थी। इस मीटिंग के बाद ही कर्ज माफी का प्रस्ताव पास कर दिया गया। सरकार ने यूपी के किसानों का 36 हजार करोड़ से ज्यादा का कर्ज माफ करने का फैसला लिया और किसानों के एक लाख तक के कृषि ऋण माफ करने का ऐलान किया गया।

मगर सरकार बनने के तीन महीने बीत जाने के बाद भी किसानों का ऋण माफ नहीं हो सका। पूर्वी उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले के करमा ब्लाक में जो कभी टमाटर के लिए न सिर्फ हिन्दुस्तान बल्कि समूचे एशिया में प्रसिद्द था खेती लगातार पिछड़ते जा रही है।

पढ़ेः आत्महत्या करो या गोली खाओ, क्या यही है बीजेपी की ‘किसान नीति’!

फिलहाल किसानों पर कई तरह के संकट मंडरा रहे हैं। किसानों पर पहले से ही बैंकों का बहुत कर्ज है जिसकी वजह से उन्हें नया कर्ज नहीं मिल पा रहा। नतीजा यह है कि पिछले साल की खराब फसल के बाद इस साल भी किसानों की हालत बद से बदतर होती जा रही है। किसानों को उम्मीद है कि सरकार द्वारा किया गया कर्जमाफी का वादा जल्द ही हकीकत की शक्ल लेगा और किसानों के हालात बदलेंगे। कमोवेश करमा जैसे हाल पूर्वांचल के अन्य जिलों में भी है जहाँ किसान टमाटर की खेती करते है।

नोटबंदी की मार अब तक झेल रहें है किसान
टमाटर के किसानों का यह हाल केवल कर्जदारी की वजह से ही नहीं है बल्कि इसके पीछे बाजार में टमाटर का कम दाम और फसल उत्पादन में बढ़ती जा रही लागत भी जिम्मेदार है। पत्रिका के रिपोर्ट के मुताबित, राजबहादुर नाम के एक किसान का कहना है कि हमने पिछले साल अपनी जमीन 15 हजार रूपए में रेहन पर रखकर फसल उगाई लेकिन जो दाम मिले उससे न तो लागत निकली न ही मेरे घर का खर्च चल पा रहा है।

https://youtu.be/8CKFV0BZNb8

राजबहादुर कहते हैं ‘एक बार फसल बिगड़ जाए तो फिर से कर्ज लेना पड़ता है अब तो रेहन रखने को भी कुछ न बचा’। गौरतलब है कि विगतवर्ष नोटबंदी से यूपी के किसानों को भारी घाटा उठाना पड़ा, न तो टमाटर का निर्यात हुआ न ही किसानों को दाम मिले। हालत इतनी खराब हो गयी कि सोनभद्र में ही किसानों को एक रूपए में चार किलो टमाटर बेचने पड़े हैं।

कभी एशिया में था जलवा अब लाचारी
पूर्वी उत्तर प्रदेश में करमा के टमाटर समूचे उत्तर पूर्व के अलावा बांग्लादेश, नेपाल, पाकिस्तान, बांग्लादेश तक निर्यात किये जाते रहे हैं लेकिन अब हालात बदल रहे हैं पिछले साल किसानों ने बीज, खाद के लिए ऋण लेकर टमाटर की खेती किए थे लेकिन बरसात विलम्ब से होने के कारण इसकी खेती पिछड़ गई और किसानों की लागत तक नहीं मिल पायी। प्रदेश में भाजपा सरकार द्वारा फसली ऋण माफ किये जाने के बाद किसानों को लगा कि वो नए सिरे से ऋण लेकर टमाटर की खेती कर सकेंगे लेकिन ऋण माफी का मामला अब भी अधर में लटके होने से किसान परेशान हैं।

यूपी के किसानों की मानें तो दरअसल अभी कर्ज माफी के ऐलान के अलावा कुछ नहीं हुआ। जिसके चलते किसान निराश हैं और खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। किसान बैंकों के चक्कर लगा रहे हैं लेकिन उन्हें कोई राहत नहीं मिल पा रही है। किसानों की मानें तो बैंकों का कहना है कि अभी तक ऊपर से कोई आदेश नहीं आया है। सरकार के इस रवैैये से नाराज किसान आंदोलन की राह पकड़ सकते हैं।

Latest अपडेट के लिए National Dastak पेज को Like और Follow करे

To Top

© copyright reserved National Dastak. All right reserved