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गवर्नमेंट की गलत पॉलिसी की वजह शहीद हुआ बेटा- कैप्टन आयुष यादव के पिता

नई दिल्ली। उत्तरी कश्मीर के कुपवाड़ा जिले में आतंकियों ने गुरुवार की सुबह चार बजे एक सैन्य शिविर पर हमला बोल दिया, जिसमें एक कैप्टन समेत तीन सैन्यकर्मी शहीद हो गए और पांच सैनिक घायल हो गए। जैश-ए-मोहम्मद के दो संदिग्ध आतंकी जवाबी कार्रवाई में मारे गए।

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कुछ वर्ष पहले ही कमीशंड हुए कैप्टन आयुष यादव भी इस हमले में शहीद हो गए। वे कानपुर के जाजमऊ इलाके के रहने वाले थे। आतंकी हमले में शहीद हुए कैप्टन आयुष की उम्र महज 26 साल थी। कैप्टन आयुष के साथ एक जूनियर कमांडिंग ऑफिसर (जेसीओ) और एक जवान भी शहीद हुए हैं। बता दें कैप्टन आयुष इस वर्ष किसी आतंकी हमले में शहीद होने वाले इंडियन आर्मी के दूसरे ऑफिसर हैं।

<blockquote class=”twitter-tweet” data-lang=”en”><p lang=”hi” dir=”ltr”>जब रिमोट के द्वारा चिप से पेट्रोल की चोरी बिना किसी इंटरनेट कनेक्शन के हो सकती है तो ईवीएम से भी। टेक्नोलॉजी का गलत इस्तेमाल रोकना होगा।</p>&mdash; Akhilesh Yadav (@yadavakhilesh) <a href=”https://twitter.com/yadavakhilesh/status/858186476760297472″>April 29, 2017</a></blockquote>
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बेटे की मौत की खबर मिलते ही कैपटन आयुष यादव की मां सरला यादव बेसुध हो गई। एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, चित्रकूट में एसआई पद पर तैनात आयुष यादव के पिता अरुण यादव का कहना है कि उनका बेटा गवर्नमेंट की खराब पॉलिसी की वजह से शहीद हुआ है। अगर वह सीमा पर लड़कर शहीद होता तो मुझे जरा भी दुख नहीं होता। जम्मू-कश्मीर में हालात ऐसे बने हुए हैं जिस पर सरकार ध्यान ही नहीं दे रही है।

 

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उन्होंने कहा कोई भी सरकार हो इन्होंने अपना रवैया ऐसा बनाया हुआ है कि जब सत्ता इनके हाथों में होती है तो दूसरी बोली बोलते हैं और जब विपक्ष में बैठे होते हैं तो दूसरी बोली बोलते हैं। ये कहते हुए उन्होने सीधे केंद्र सरकार पर निशाना साधा है।

 

परिजनों का कहना है कि आयुष को अपने चाचा और ताऊ से सेना में जाने की प्रेरणा मिली थी। उसके चाचा और ताऊ सेना से रिटायर्ट अफसर हैं। इसके अलावा मेरे भांजा-भाजी भी सेना में है। पितां ने आखिर में रोते हुए सरकार से सवाल किया कि “आखिर कब तक ऐसे ही सैनिक मरवाते रहोगे? मैंने तो अपना बेटा खो दिया।”

 

संपादन- भवेंद्र प्रकाश

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