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दलित जज कर्णन की मानसिक हालत की जांच क्यों कराना चाहते हैं सवर्ण जज?

नयी दिल्ली। भारत में न्यायपालिका में दलितों की स्थिति चिंताजनक रही है। करिया मुंडा की अध्यक्षता में बनाई गई संसदीय समिति ने भी माना था कि न्यायपालिका में सवर्णों का वर्चस्व है। अब एक और मामला इस रिपोर्ट की पुष्टि करता नजर आ रहा है। भारत के मुख्य न्यायाधीश समेत सुप्रीम कोर्ट के जजों की विदेश यात्रा पर रोक लगाने वाले कलकत्ता हाईकोर्ट के जज जस्टिस सीएस कर्णन के अब दिमागी संतुलन की जांच की जायेगी। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को जस्टिस कर्णन के दिमागी संतुलन की जांच करने के लिए मेडिकल बोर्ड के गठन कर जांच करने का आदेश दिया है।

इस मामले में आदेश जारी करते हुए शीर्ष अदालत ने कहा है कि मेडिकल बोर्ड पांच मई तक जस्टिस कर्णन के दिमागी संतुलन की जांच कर आठ मई या उससे पहले रिपोर्ट अदालत को सौंपे। इस मामले की अगली सुनवाई 18 मई को की जायेगी। 

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आपको बता दें कि कलकत्ता हाइकोर्ट के जज जस्टिस सीएस कर्णन ने एक आदेश जारी कर चीफ जस्टिस समेत सात जजों की विदेश यात्रा पर प्रतिबंध लगा दिया था। जस्टिस कर्णन ने एयर कंट्रोल अथॉरिटी को आदेश दिया है कि जब तक उनके खिलाफ चल रहे मामले का निबटारा नहीं हो जाता, तब तक सातों जज देश से बाहर नहीं जा सकते। यह आदेश जस्टिस कर्णन ने अपने घर रोजडेल टावर्स, न्यू टाउन पर शिफ्ट की गयी अदालत में पास किया है।
इससे पहले 13 अप्रैल को भी जस्टिस कर्णन ने सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस समेत सात जजों को 28 अप्रैल को अपनी अदालत में पेश होने का समन भेजा था। यह समन जस्टिस कर्णन ने अनुसूचित जाति/जनजाति (प्रताड़ना से संरक्षण) अधिनियम का उल्लंघन करने के आरोप में जारी किया था। दरअसल सुप्रीम कोर्ट के सात जजों ने स्वत: संज्ञान लेते हुए फरवरी में जस्टिस कर्णन के खिलाफ अदालत की अवमानना का आदेश जारी किया था।

 

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अवमानना का आदेश जनवरी में कर्णन द्वारा 20 न्यायाधीशों को भ्रष्ट बताते हुए उनके खिलाफ जांच की मांग के बाद जारी किया गया था। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस कर्णन के खिलाफ जमानती वारंट भी जारी किया था। इस मामले की सुनवाई कर रही बेंच के सदस्यों में चीफ जस्टिस जेएस खेहर के अलावा जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस जे चेलमेश्वर, जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस मदन बी लोकुर, जस्टिस पिनाकी चंद्र घोष और जस्टिस कुरियन जोसेफ शामिल हैं।

 

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न्यायालय की अवमानना मामले में जस्टिस कर्णन का नाम उस समय सामने आया था जब उन्होंने पीएम मोदी को पत्र लिखकर भ्रष्ट जजों पर कार्रवाई करने को कहा था। जिसमें सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट 20 जजों के नाम भी उसमें शामिल था। जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने स्व संज्ञान लिया।

 

(संपादन- भवेंद्र प्रकाश)

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