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गरीब बच्चों के ‘पारले-जी’ बिस्कुट पर ‘मोदी जी’ ने लगाया 18 फीसदी टैक्स

नई दिल्ली। मोदी सरकार जीएसटी से गरीबों का फायदा दिलाने का दम भर रही है। लेकिन जीएसटी काउंसिल के ही फैसले ने इस दावे बखिया उधेड़ दी है। शनिवार को काउंसिल की बैठक के बाद सभी तरह के बिस्कुटों पर 18 फीसदी का टैक्स लगा दिया गया। इनमें देश के करोड़ों गरीब बच्चों का पेट भरने वाला पारले जी के दो रुपये के ग्लूकोज बिस्कुट का पैक भी शामिल है।


इस देश में करोड़ों माताएं सुबह-सुबह अपने बच्चों को सबसे सस्ता दो रुपये का पारले जी का ग्लूकोज बिस्कुट देती हैं, जो उनकी भूख तो शांत करता ही है, आयरन, ग्लूकोज और विटामिन की भी कमी पूरी करता है। इस पर 18 फीसदी का टैक्स, भारत को सशक्त बनाने के लिए नई पीढ़ी को मजबूत करने का दम भरने वाली मोदी सरकार की कथनी और करनी का फर्क जाहिर कर देता है।

जेटली साहब, आपने यह नहीं देखा कि सस्ते बिस्कुटों का इस्तेमाल कौन करता है। इस देश में बिस्कुट ही एक ऐसा प्रोडक्ट है, जिसे गरीब भी अफोर्ड कर सकता है। पूरे देश में आपको दो से पांच रुपये में बिस्कुट का 50 ग्राम का पैक आराम से मिल सकता है। महंगे बिस्कुट अमीर इस्तेमाल करते हैं। उन पर टैक्स दायरा बढ़ाने के बजाय आपने दो रुपये वाले बिस्कुट पर तलवार चलाई है।


जेटली जी , ब्रेड को तो आपने टैक्स के दायरे से बाहर कर दिया। जबकि दो रुपये में ब्रेड का कोई पैकेट नहीं आता है। लेकिन दो रुपये के बिस्कुट पैक पर महंगे बिस्कुट के बराबर टैक्स लाद दिया। खुद को गरीबों की पैरोकार होने का मोदी सरकार का दावा कितना सही है, यह इसी से समझ में आता है।

जेटली जी , इस देश में बिकने वाला पारले जी के आठ बिस्कुटों वाला दो रुपये का पैक उन लोगों के लिए नियामत है जो अपने बच्चों को सुबह-सुबह सेरेलेक, फल, महंगे टॉनिक और जैम, जेली, मक्खन के साथ ब्रेड नहीं दे सकते। दो रुपये का बिस्कुट ही उन बच्चों को लिए आयरन, शुगर और कैल्शियम की पूर्ति करता है। इस देश के नौनिहालों को पोषण देने का जो काम आपकी सरकार सैकड़ों करोड़ रुपये खर्च करके नहीं दे पा रही है उसे दो रुपये का बिस्कुट का पैक कर रहा है। अब आपने उस पर भी भारी टैक्स की गाज गिरा दी है और पोषण हासिल करने के बच्चों का सबसे सस्ता जरिया छीन लिया है।


जेटली, लगता है आपने जीएसटी को अपनी सरकार की प्रतिष्ठा का प्रश्न बना लिया है। लेकिन इसके लिए जरूरी होमवर्क करने की जरूरत नहीं समझी है। काश, थोड़ा होमवर्क किया होता तो ऐसा गरीब विरोधी कदम नहीं उठाते।

 


साभार- सबरंग इंडिया

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