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पिछले सात महीने में देश से 30 लाख लोगों की छिन गई नौकरी- सरकारी सर्वे

नई दिल्ली। साल 2014 के आमचुनाव से पहले पीएम मोदी चुनावी रैलियों में युवाओं को हर साल दो करोड़ रोजगार देने की बात करते थे। सरकारी आकड़ों पर भरोसा करें तो देश में हर साल करीब 10 लाख तक की श्रमशक्ति को रोजगार की जरूरत होती है। लेकिन पीएम मोदी के शासनकाल में 10 लाख रोजगार मिलना तो दूर की बात बीते सात महीने में 30 लाख लोगों की नौकरी छीन ली गई।

खास बातें-

  1. सात महीने में 30 लाख लोगों की छिन गई नौकरी
  2. सिर्फ नोटबंदी से 15 लाख लोग हुए बेरोजगार
  3. नौकरी ढूंढ़ने वाले युवाओं की संख्या में भी कमी
  4. युवाओं को नौकरी मिलने का नहीं रहा भरोसा

सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकॉनोमी (सीएमआईई) के मुताबिक, जनवरी 2017 में देश में कुल 40 करोड़ 84 लाख लोगों के पास रोजगार था, जिनकी संख्या जुलाई 2017 में घटकर 40 करोड़ 54 लाख ही रह गई। यानी पिछले सात महीने के अंदर करीब 30 लाख लोगों के रोजगार छीन लिए गए।

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यही कारण है कि पिछले कुछ महीनों में नौकरी ढूढ़ने वाले बेरोजगारों की संख्या में कमी पाई गई है। जहां जनवरी 2017 में नौकरी ढूंढ़ने वाले बेरोजगारों की संख्या 2.59 करोड़ थी जो जुलाई में घटकर 1.37 करोड़ रह गई। यानी बेरोजगारों में अब नौकरी को लेकर ज्यादा आकर्षण नहीं रहा क्योंकि शायद उन्हें अब नौकरी मिलने का भरोसा नहीं रहा। यही वजह है कि बेरोजगार युवक फिलहाल नौकरियां नहीं ढूंढ रहे हैं।

http://www.youtube.com/watch?v=nudL0RbPcY4

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सीएमआर्इर्इ की रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि नोटबंदी के बाद भारत में लगभग 15 लाख लोगों को नौकरियां गंवानी पड़ी हैं। इस हिसाब से अगर एक कमाऊ व्यक्ति पर घर के चार लोग आश्रित हैं, तो पीएम नरेंद्र मोदी के एक फैसले से 60 लाख से ज्यादा लोगों के मुंह से रोटी का निवाला छीन लिया गया।

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