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एक्टिविस्‍ट आनंद तेलतुंबड़े के लिए बड़ी राहत, कोर्ट ने गिरफ्तारी पर लगाई रोक: भीमा-कोरेगांव हिंसा

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(Image Credits: Indianexpress)

आनंद तेलतुंबड़े पर कोर्ट ने गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है। आनंद तेलतुंबड़े पर भीमा-कोरेगांव हिंसा और माओवादिओं से सम्बन्ध के आरोप हैं। भीमा-कोरेगांव हिंसा मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट द्वारा आनंद तेलतुंबड़े को बड़ी राहत दी गई हैं। हाई कोर्ट ने 26 अक्टूबर तक एक्टिविस्ट आनंद तेलतुंबड़े की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है। पुणे पुलिस ने उनके माओवादिओं से संबंध होने के शक में उनपर केस दर्ज कर किया था।

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महाराष्ट्र की पुणे पुलिस ने तेलतुंबड़े के माओवादिओं से तार जुड़े होने की शंका में आरोप लगाते हुए केस दर्ज किया था। मिलिंद तेलतुम्बड़े जो आनंद तेलतुम्बड़े के भाई है। वह भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के वरिष्ठ सदस्य हैं। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी एक प्रतिबंधित संगठन हैं।  बता दे कि आनंद तेलतुंबड़े दलित विचारधारा रखते हैं।

यह घटना तब की है जब भीमा कोरेगांव युद्ध की वर्षगांठ के उपरांत हुई हिंसा में पुणे पुलिस द्वारा कई बुद्धिजीवियों को इससे सम्बन्ध होने के कारण इसी साल के शुरुआत में 1 जनवरी को हिरासत में ले लिया गया था। पुणे पुलिस ने इस मामलें में पुरे देश के अलग अलग शहरों में छापा मारा था। और कई सामाजिक कार्यकर्त्ता जैसे, गौतम नवलखा, सुधा भारद्वाज, वरवर राव और वर्नान गोंसाल्विस को गिरफ्तार कर लिया था।

इस मामलें में सुप्रीम कोर्ट ने सभी आरोपियों को अपने अंतिम फैसले तक घरों में नजरबंद रखने का आदेश दिया था। इस मामले में आरोपियों में से एक आरोपी गौतम नवलखा ने अपने ऊपर दर्ज मामलें को ख़ारिज करने के लिए बॉम्बे हाई कोर्ट में अपील की थी। इस महीने गौतम नवलखा ने बॉंबे हाई कोर्ट में याचिका दायर करके पुणे पुलिस द्वारा उनपर दर्ज किये गए एफआईआर को खारिज करने का अनुरोध किया था।

पुणे पुलिस ने दावा करते हुए कहा कि, इस मामलें में आरोपियों से जब्त किये गए दस्तावेजों से पता चलता है की इनके संबंध माओवादी नेताओं से हैं। 28 अगस्त को एफआईआर दर्ज करने के बात इनको गिरफ्तार कर लिया गया था। भीमा-कोरेगांव में हिंसा पिछले वर्ष 31 दिसम्बर को हुई थी। दरअसल 31 दिसम्बर को ‘एल्गार परिषद’ आयोजित हुआ था, जिसमें पुणे में भीमा-कोरेगांव गांव में हिंसा भड़की थी।


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