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महिला क्रिकेट टीम विश्वकप हार गई तो भेदभाव पर क्या जवाब देगा BCCI?

नई दिल्ली। आज भारत और इंग्लैंड की महिला क्रिकेट टीम के बीच वर्ल्डकप  का फाइनल खेला जा रहा है। लॉर्ड्स के मैदान पर खेले जा रहे इस मैंच में इंग्लैंड ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी का फैसला लिया। झूलन गोस्वामी की शानदार गेंदबाजी और स्पिनरों के अच्छे योगदान से भारत ने आईसीसी महिला वर्ल्ड कप फाइनल में आज यहां मेजबान इंग्लैंड को सात विकेट पर 228 रन ही बनाने दिये।

मुख्य बातेंः 

  1. विश्वकप फाइनल में इंडिया को 229 रन का लक्ष्य
  2. दूसरी बार विश्वकप फाइनल में पहुंचा है भारत
  3. महिला खिलाड़ियों का क्यों किया जा रहा है अपमान
  4. इंग्लैंड क्रिकेट बोर्ड से इस तुलना में पीछे है भारतीय क्रिकेट बोर्ड 
  5. क्या BCCI में होता है लिंगभेद?

भारत की तरफ से झूलन गोस्वामी ने तीन, पूनम यादव ने दो और राजेश्वरी गायकवाड़ ने एक विकेट लिए। इंग्लैंड की टीम ने बिना कोई विकेट गंवाए 47 रन बना लिए थे, तभी गायकवाड़ ने इंग्लिश ओपनर विनफील्ड (24) को बोल्ड कर भारत को पहली सफलता दिला दी। इसके बाद टैमी ब्यूमॉन्ट ने पूनम यादव की गेंद पर झूलन गोस्वामी को कैच थमा दिया और भारत को मिला दूसरा विकेट। खबर लिखे जाने तक भारत की टीम एक विकेट खोकर 43 रन पर खेल रही है।

फिलहाल मैच जारी है लेकिन BCCI को लेकर जहन में बार बार यह सावल उठता है कि महिला खिलाड़ियों के साथ भयानक भेदभाव क्यों किया जाता है? जिस देश में कानूनन पुरुषों और महिलाओं को बराबरी का हक मिला हो उस देश का एक खेल संस्थान पुरुषों और महिलाओं के बीच में एक बहुत बड़ा अंतर क्यों रखता है?

पढ़ेंः महिला खिलाड़ियों के साथ BCCI करता है भयानक भेदभाव, ये रहा काला चिट्ठा

BCCI भारतीय पुरूष टीम के “A” के खिलाड़ियों को सालाना 2 करोड़ रुपये देता है वहीं ग्रेड “B” के खिलाड़ियों को 1 करोड़ और ग्रेड “C” के खिलाड़ियों को 50 लाख रुपये देता है। जबकि महिला क्रिकेट टीम की ग्रेड “A” की खिलाड़ियों को 15 लाख रुपये दिया जाता है। मतलब पुरूष खिलाड़ियों की तुलना में एक करोड़ पच्चासी लाख यानि लगभग 13 गुना कम पैसे मिलते हैं। वहीं ग्रेड “B” की महिला खिलाड़ियों को महज 10 लाख रुपये मिलते हैं। जो पुरुष खिलाड़ियों के एक मैच फीस से भी कम है। ऐसे में अगर आज देश की ये जूझारू बेटियां विश्वकप जीत कर लाती हैं और भेदभाव की बात उठी तो BCCI के पास जवाब होगा न तर्क।

पढ़ेंः वर्ल्ड चैंपियन बनने के लिए टीम इंडिया को मिला 229 रन का टारगेट

बता दें कि भारतीय महिला टीम ने अपने अभी तक सफर में एक बार भी वर्ल्डकप नहीं जीत सकी है। 2005 एकलौता ऐसा साल था जब भारतीय महिला टीम फाइनल तक का पहुंची थी। उस वक्त टीम को ऑस्ट्रेलिया के हाथों हार का सामना करना पड़ा था।

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