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अमित शाह ने ‘खांटी संघी’ वैंकेया नायडू को घोषित किया उपराष्ट्रपति पद का उम्मीदवार

bjp announced venkaiah naidu as vice presidential candidate

नई दिल्ली। राष्ट्रपति पद की वोटिंग खत्म होते ही भाजपा ने उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार का नाम घोषित कर दिया है। एनडीए की तरफ से केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण और शहरी विकास मंत्री एम वेंकैया नायडू को उपराष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाया गया है। भाजपा संसदीय बोर्ड की बैठक में यह निर्णय लिया गया।


मुख्य बातें-

  1. अमित शाह ने प्रेस कांफ्रेंस कर किया वैंकेया नायडू के नाम का ऐलान
  2. छात्र जीवन से संघ से जुड़े रहे हैं वैंकेया नायडू
  3. किसानों का ऋण माफी को बता चुके हैं फैशन

उपराष्ट्रपति पद के लिए नायडू का मुकाबला विपक्ष के उम्मीदवार गोपालकृष्ण गांधी से होगा। अब जल्द ही एनडीए के अन्य दलों द्वारा नायडू के नाम पर मुहर लगने की उम्मीद है। नायडू मंगलवार को उपराष्ट्रपति पद के लिए नामांकन भरेंगे।


पढ़ें- मांसखोर हैं वैंकेया नायडू, ऐसे नेताओं का क्या करेगी बीजेपी?

एम वेंकैया नायडू जन्म का 1 जुलाई 1949 को आंध्र प्रदेश के नेल्लोर जिले में हुआ। वह 2002 से 2004 तक भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष रह चुके हैं। वर्तमान में नायडू केंद्र में सूचना एवं प्रसारण मंत्री हैं। नायडू पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री रह चुके हैं।


मौजूदा उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी का कार्यकाल अगले महीने समाप्त हो रहा है। अंसारी लगातार दो बार देश के उपराष्ट्रपति बने। नायडू का मुकाबला 18 विपक्षी पार्टियों के उपराष्ट्रपति पद के संयुक्त उम्मीदवार गोपालकृष्ण गांधी से मुकाबला होगा।

https://www.youtube.com/watch?v=_4fmVu844dQ

उपराष्ट्रपति पद के लिए नायडू इस पद के लिए भाजपा के वोटबैंक के हिसाब से उपयुक्त उम्मीदवार हैं। जहां एक तरफ रामनाथ कोविंद के सहारे भाजपा ने दलितों को साधने की कोशिश की है वहीं दूसरी तरफ नायडू के सहारे सवर्ण और खासतौर पर दक्षिण भारत के चुनावों में जीत हासिल करने का फॉर्मूला निकाला है। वह आंध्र प्रदेश के रहने वाले हैं। जाहिर है कि दक्षिण भारत में भाजपा उतनी मजबूत नहीं है जितनी उत्तर भारत में है। कर्नाटक ही एकमात्र ऐसा राज्य है जहां भाजपा मजबूत स्थिति में है।

वैंकेया नायडू छात्र थे तभी से संघ से जुड़े रहे हैं और आरएसएस के मानकों पर फिट बैठते हैं। उपराष्ट्रति के पास ही राज्यसभा के संचालन की भी जिम्मेदारी होती है। ऐसे में भाजपा की रणनीति के लिहाज से उनका नाम मुफीद बैठ रहा था।


संपादन- भवेंद्र प्रकाश

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