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संविधान की प्रतियां जलाए जाने के विरोध में कई जगह FIR, दिल्ली में बड़े प्रदर्शन की तैयारी

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नई दिल्ली. 9 अगस्त को दिल्ली के जंतर मंतर पर यूथ फॉर इक्वालिटी के सदस्यों द्वारा संविधान की प्रति जलाए जाने का विरोध देशभर से सामने आ रहा है. संविधान बचाने के लिए दलित संगठनों के लोग संसद मार्ग थाने में आरोपियों के खिलाफ एफआईआर कराने के लिए एकत्रित हो रहे हैं.

यूथ फॉर इक्वालिटी के सदस्यों ने 9 अगस्त को संविधा की प्रतियां जलाते हुए बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर के विरोध में नारेबाजी की थी. यूथ फॉर इक्वालिटी के सदस्यों के इस कृत्य के बाद से देशभर के दलितों में रोष का माहौल है. इस मामले पर कई जगह एफआईआर कराई गई है. इसी कड़ी में संसद मार्ग थाने में भी एफआईआर कराई जाएगी.

संविधान की प्रति जलाए जाने पर तीन साल की सजा का प्रावधान है. लेकिन अभी तक आरोपियों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है. संसद में एससी/एसटी बिल पारित होने के बाद इस घटना को अंजाम दिया गया है. उस दौरान पुलिस भी मौजूद थी लेकिन आरक्षण विरोधी खेमा नारेबाजी करते हुए संविधान की प्रतियां जला रहा था.

बता दें कि 20 मार्च को सुप्रीम कोर्ट की एक बेंच ने एक मामले पर फैसले के दौरान एससी/एसटी एक्ट में गिरफ्तारी संबंधी प्रावधानों को कमजोर कर दिया था. इसके विरोध में दलित संगठनों ने 2 अप्रैल को भारत बंद बुलाया. इससे दलित भले ही नाराज थे लेकिन कथित सवर्णों का एक खेमा खुश था. आगामी लोकसभा चुनावों को देखते हुए बीजेपी के दलित सांसदों ने भी सरकार पर दवाब बनाया और नौ अगस्त को भारत बंद बुलाया था.

इनकी मांग थी कि मोदी सरकार बिल लाकर इसपर मजबूती वाला कानून बनाए. दवाब में आई मोदी सरकार ने संसद में बिल पारित करा दिया. इसके बाद से ही आरक्षण विरोधी व दलित विरोधी ताकतें गुस्से में हैं. इसके विरोध में ही यूथ फॉर इक्वालिटी के सदस्यों द्वारा इस कृत्य को अंजाम दिया गया है.

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