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जातिवाद ने लोकतंत्र के राष्ट्रपति जैसे सबसे बड़े संवैधानिक पद को भी धकिया दिया

नई दिल्ली. राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के साथ बदसलूकी का हैरान करने वाला मामला सामने आया है. राष्ट्रपति भवन राष्‍ट्रपति भवन ने 18 मार्च को राष्‍ट्रपति रामनाथ कोविंद और उनकी पत्‍नी सविता कोविंद की पुरी यात्रा के दौरान जगन्‍नाथ मंदिर के कुछ सेवकों के अनुचित व्‍यवहार पर कड़ी आपत्ति जताई है. यह पूरा मामला तब सामने आया जब श्री जगन्‍नाथ मंदिर प्रशासन ने दोषी सेवकों के खिलाफ कारण बताओ नोटिस जारी किया गया.

यह मामला साधारण नहीं है. लाखों वर्षों से पनपती आई जातिवादी जड़ों का है. वेद-पुराण सभी पौराणिक ग्रंथों में जातिवाद का महिमामंडन किया गया है. वही परंपरा लोकतंत्र में भी जारी है. राष्ट्रपति के साथ मंदिर में दुर्व्यवहार का यह दूसरा मामला है. मंदिरों में राष्ट्रपति जैसा संवैधानिक पद भी जातिवाद का शिकार हुआ है.

इससे पहले राष्ट्रपति कोविंद राजस्थान के पुष्कर मंदिर में बदसलूकी का शिकार हुए थे. खबरें आई थीं कि वहां पुजारियों ने उन्हें दलित होने की वजह से मंदिर में प्रवेश की अनुमति नहीं दी जिसके चलते उन्हें सीढ़ियों पर पूजा करनी पड़ी. हालांकि, बाद में सफाई में कहा गया था कि राष्ट्रपति की पत्नी घुटनों में परेशानी की वजह से सीढ़ियां नहीं चढ़ पातीं इसलिए उन्होंने बाहर ही पूजा निपटाई.

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 18 मार्च को राष्‍ट्रपति कोविंद और उनकी पत्‍नी मंदिर दर्शन के लिए आए थे. राष्‍ट्रपति के कड़े सुरक्षा घेरे को तोड़ते हुए कुछ सेवक वीवीआईपी कपल के पास पहुंच गए. इन सेवकों ने कथित रूप से उन्‍हें धक्‍का दिया और कोहनी भी मारा था. इससे राष्‍ट्रपति और उनकी पत्‍नी को काफी परेशानी हुई थी.

उधर, मंदिर के मुख्‍य प्रशासक और आईएएस अधिकारी प्रदिप्‍ता कुमार महापात्रा ने इस मामले को ज्‍यादा तूल नहीं देने की कोशिश की और घटना का पूरा विवरण देने से मना कर दिया. उन्‍होंने अखबार टाइम्‍स ऑफ इंडिया से कहा, ‘हमें राष्‍ट्रपति के कार्यालय से पत्र मिला है. हमने इस मामले पर मंदिर प्रबंधन समिति से विचार-विमर्श किया है. हम इस मामले की जांच कर रहे हैं.’

महापात्रा ने इस बात का खंडन किया कि राष्‍ट्रपति और उनकी पत्‍नी के साथ दुर्व्यवहार हुआ. जबकि मंदिर सूत्रों के मुताबिक कुछ सेवकों ने कथित रूप से राष्‍ट्रपति कोविंद का रास्‍ता ब्‍लॉक कर दिया था। उस समय राष्‍ट्रपति गर्भगृह के अंदर पूजा करने जा रहे थे। मंदिर प्रशासन ने दोषी सेवकों के खिलाफ कारण बताओ नोटिस जारी किया है।

इस बीच कुछ अन्‍य मंदिर अधिकारियों का कहना है कि राष्‍ट्रपति के प्रोटोकॉल में मामूली चूक हुई थी। उन्‍होंने कहा कि कुछ सेवक राष्‍ट्रपति से बात करना चाहते थे, इस वजह से वह उनके पास पहुंच गए। राष्‍ट्रपति के साथ सुरक्षा चूक की यह घटना ऐसे समय पर हुई है जब तीन महीने पहले ही जगन्‍नाथ मंदिर के सेवकों द्वारा दर्शनार्थियों के साथ दुर्व्यवहार पर कड़ी आपत्ति जताई थी।

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