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केंद्र सरकार ने रोहित वेमुला, जेएनयू और कश्मीर मुद्दे पर बनी फिल्मों की स्क्रीनिंग पर लगाई रोक

तिरुवनंतपुरम। केंद्रीय सूचना प्रसारण मंत्रालय ने रोहित वेमुला, जेएनयू और कश्मीर पर आधारित फिल्मों की स्क्रीनिंग पर रोक लगा दी है। जानकारी के मुताबिक केरल में आयोजित होने वाले इंटरनेशनल डॉक्यूमेंट्री एंड फिल्म फेस्टिवल में इन फिल्मों की स्क्रीनिंग की जानी थी लेकिन केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने सेंसर छूट से इनकार कर दिया।

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16 जून से शुरु होने वाला यह फेस्टिवल केरल राज्य चलचित्र अकादमी के द्वारा आयोजित किया जा रहा है जो कि राज्य सरकार के सांस्कृतिक मामलों के विभाग के अंतर्गत आता है।

फिल्म समारोहों में जांच की जाने वाली फिल्मों को सेंसर बोर्ड से प्रमाण पत्र की आवश्यकता नहीं है, लेकिन उनके पास मंत्रालय से सेंसर छूट का प्रमाण पत्र होना चाहिए। बिना सेंसर छूट के कोई भी डॉक्यूमेंट्री या फीचर फिल्म फेस्टिवल में दिखाई जा सकती हैं।

केंद्र सरकार ने जिन इंटरनेशनल डॉक्यूमेंट्री और शॉर्ट फिल्म की स्क्रीनिंग से इनकार किया है उनमें द अनबियरेबल बीइंग ऑफ लाइटनेस (रोहित वेमुला पर आधारित) , इन द शेड ऑफ फॉलेन छिनार (कश्मीर में अशांति पर) मार्च मार्च मार्च (जेएनयू में छात्र आंदोलन पर आधारित) शामिल थीं।

https://www.youtube.com/watch?v=RVYVcAKwTfs

अकादमी के अध्यक्ष कमल ने कहा कि उन्होने सेंसर छूट के लिए सभी 200 से अधिक फिल्मों को मंत्रालय को भेजा है। उन्होने कहा, इन तीनों को छोड़कर सभी फिल्मों में छूट मिली है। मंत्रालय ने इन फिल्मों के लिए सेंसर छूट को नकारने का कोई कारण नहीं बताया है, जो सामाजिक रुप से प्रासंगिक विषयों पर आधारित है। मुझे लगता है कि इन फिल्मों को स्क्रीनिंग की अनुमति से वंचित थीं क्योंकि वे देश में अहिष्णुता से निपटते हैं। हमने एक अपील की है और मंत्रालय से कहा है कि सेंसर छूट की याचिका पर फिर से विचार करें। लेकिन हमें कोई जवाब नहीं मिला है।

कमल ने कहा, इन घटनाओं से पता चलता है कि देश में एक सांस्कृतिक आपातकाल देश में प्रचलित है। उन्होने कहा, हम एक अघोषित आपातकाल की ओर जा रहे हैं। यह समय है जब शासक तय कर रहे हैं कि हमें क्या खाना चाहिए, हमें क्या पहनना चाहिए और हमें किस बारे में बात करनी चाहिए।

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बता दें कि पिछले साल केरल में अंतर्राष्ट्रीय फिल्म फेस्टिवल के दौरान कमल ने संघ परिवार के गुस्से का सामना करना पड़ा था जब पुलिस ने उन लोगों को उठाया जो राष्ट्रगान के दौरान खड़े होने में सक्षम नहीं थे।

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