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UP: पद्मावत की बहस में FB पर ‘जय भीम’ कमेंट करने से भड़के जातिवादी गुंडे, दलित परिवार को पीटा

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शामली. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भले ही लाख दावा करें कि उनके राज में किसी के साथ भेदभाव और उत्पीड़न नहीं होगा, लेकिन उनका दावा झूठा साबित होता नज़र आ रहा है. क्योंकि प्रदेश में हर रोज कहीं न कहीं से उत्पीड़न की घटनाएं देखने और सुनने को मिल ही जाती हैं. उत्पीड़न का ताजा मामला शामली जिले में सामने आया है. यहां भवन थाना क्षेत्र के हरड़ फतेहपुर गांव में राजपूत समाज के कुछ दबंगों ने फिल्म ‘पद्मावत’ को लेकर फेसबुक पर जय भीम कमेंट करने से नाराज होकर एक दलित परिवार पर कहर बरपाया है, जिसमें परिवार के 3 लोग घायल हुए हैं.

शामली जिले में थाना भवन क्षेत्र के हरड़ फतेहपुर गांव में दलित परिवार के युवक आकाश कुमार को सोशल मीडिया पर कमेंट करना भारी पड़ गया है. जानकारी के मुताबिक फिल्म ‘पद्मावत’ के रिलीज होने और ना होने को लेकर फेसबुक पर बहस चल रही थी, तभी आकाश कुमार ने अपने फेसबुक पेज पर ‘जय भीम’ लिख दिया था, जो राजपूत समाज के कुछ लोगों को नागवार गुजरा और उन्होंने एकजुट होकर आकाश कुमार के घर पर हमला बोल दिया. इस दौरान दबंगों ने आकाश कुमार और उसके परिजनों को लाठी-डंडों से बुरी तरह मारा-पीटा.

दबंगों की पिटाई से आकाश, उसकी मां और एक अन्य परिजन गंभीर रूप से घायल हुए हैं, जिन्हें स्थानीय लोगों ने थाना भवन स्थित सीएचसी में भर्ती करा दिया है. मामले की सूचना मिलने पर पुलिस ने जांच शुरू कर दी है, लेकिन पीड़ित परिवार ने पुलिस पर आरोपी दबंगों के खिलाफ कार्रवाई न करने का आरोप लगाया है. पीड़ित परिवार का कहना है कि शिकायत करने के बावजूद पुलिस आरोपियों को अभी तक गिरफ़्तार नहीं कर सकी है. पीड़ित परिवार का ये भी कहना है कि आरोपी दबंगों की तरफ से जान से मारने की भी धमकी मिल रही है.

बता दें कि संजय लीला भंसाली की फिल्म पद्मावत के विरोध में तोड़फोड़ कर उभरी करणी सेना को अप्रत्यक्ष रूप से बीजेपी सरकारों के मौन समर्थन ने ताकतवर बनाने का काम किया है. पिछले तीन चार दिन में ही इस संगठन ने देशभर में कई जगह पर लोगों की पिटाई और सिनेमाघरों में तोड़फोड़ कर डाली है. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद बीजेपी शासित राज्यों में सरकारें करणी सेना के कारनामों पर आंखें बंद किए बैठी नजर आ रही हैं. वहीं सुप्रीम कोर्ट के आदेश को तोड़ने का कोई और तरीका खोजने में लगी हैं. इसका तरीका गुजरात में तो निकाल लिया गया है. यहां राज्य के सिनेमाघरों के संगठन ने फिल्म न दिखाए जाने का ऐलान कर दिया है. इससे सरकार की भी मनमुराद पूरी होती नजर आ रही है.

साभार- सबरंग

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