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एक दलित कलाकार जिसकी प्रतिभा को बापू ने पहचाना, जानिए पूरी कहानी

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महात्मा गाँधी के जयंती के मौके पर आज जब पूरी दुनिया उनको नमन और श्रद्धांजलि दे रही है, वही उनके और एक दलित समाज से ताल्लुक रखने वाले एक ऐसे चित्रकार की याद भी दिला गया जिसकी प्रतिभा को महात्मा गाँधी ने पहचाना। बात 12 मार्च 1930 डंडी मार्च की है जब महात्मा गाँधी जी के नेतृत्व में होने वाली इस यात्रा में दुनिया भर के पत्रकार इस ऐतिहासिक पल का गवाह बनने सत्याग्रह आश्रम साबरमती पहुंचे थे।

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वही छगनलाल जाधव जो की उस समय 27 वर्ष के थे वो भी इस ऐतिहासिक यात्रा में शामिल होने पहुचे और उन्होंने इस पूरी यात्रा की रेखाचित्रों के ज़रिए दर्ज किया था। वही अब छगनलाल जाधव द्वारा बनाए गए पुरे ऐतिहासिक यात्रा का रेखाचित्र अब एक पुस्तक के रूप में बाज़ार में आ चूका है जिसका नाम ‘unseen drawings of dandi march’ है।

छगनलाल के शिष्य रहे कलाकार अमित अंबालाल याद करते हुए बताते हैं, ”मैंने इन रेखाचित्रों के संग्रह को उनकी डायरी में देखा था. अगर उनकी डायरी मिल जाए तो इससे जुड़ी कई नई सूचनाएं मिल सकती हैं.”
छगनलाल अरुणोदय टुकड़ी का हिस्सा थे. अरुणोदय यात्राओं का आयोजन करता था. वो जब इस ऐतिहासिक पल के गवाह बने तो पूरी यात्रा को रेखाचित्रों में समेट लिया.”


गांधीजी ने अंत्यज रात्रिशाला की स्थापना की थी जिसमे से एक शिष्य छगनलाल भी थे उन्हें उस समय यह पता ना था की प्रतिभशाली छगनलाल उनकी ऐतिहासिक डंडी यात्रा को इस तरह रेखाचित्रों में क़ैद कर लेगा। महात्मा गांधी उनकी प्रतिभा को परख लिया था। गाँधीजी उन्हें अपने साथ आश्रम ले आये थे दलित को आश्रम लाने के कारण उन्हें काफी विरोध का सामना करना पड़ा था

12 साल के छगन जाधव एक दलित स्टूडेंट थे और वो अहमदाबाद में वदाज से चार से पांच किलोमीटर पैदल चलकर कोचराब आते थे, इसी परीक्षितलाल मजूमदार एक शिक्षक थे उनको भी गांधीजी का आशीर्वाद मिला था। छगन जाधव गांधीजी की मार्गदर्शन में पले -बढे और आगे चलकर छगनलाल बने।

छगनलाल जी को जीवन में कई मुश्किलों का भी सामना करना पड़ा उन्होंने कई नौकरिया करी ओर छोड़ी बाद में उन्होंने रात्रिशाला जॉइन की और यहीं पढ़ाई की बाद में वो इसी स्कूल में शिक्षक बन गए वही उन्हें गुजरात विद्यापीठ में उन्हें छात्रवृत्ति भी मिली। फिर छगनलाल को गांधीजी ने कला गुरु रविशंकर रावल से भी मिलवाया था, 31 जुलाई को आख़िरी बार गांधीजी आश्रम गए और प्रार्थना सभा में शामिल हुए।

जब प्राथना सभा के बाद बापू आश्रम छोड़ने लगे तो वह भावुक हो गए, उन सभी पलो को छगनलाल ने रेखाचित्र के द्वारा कैद कर लिया एक रेखाचित्र पर तो गांधीजी ने खुद हस्ताक्षर किये थे छगनलाल का 84 साल की उम्र में 12 अप्रैल, 1978 को निधन हो गया था. छगनलाल भले इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उन्होंने बापू को अपनी कला में ज़िंदा रखा है।

News Source: BBC Hindi

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