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डॉ. बनने का सपना टूटने पर जान देने वाली दलित छात्रा के परिजनों ने लौटाया 7 लाख का चेक

Family Of Anitha ends Back 7 Lakh Cheque

चेन्नई। मेडिकल के लिए नीट अनिवार्य किए जाने के विरोध में लड़ाई लड़ रही दलित छात्रा अनीता को इंसाफ के लिए देशभर में प्रदर्शन शुरू हो रहे हैं। चेन्नई में विपक्षी पार्टियों के करीब 1500 कार्यकर्ताओं ने अलग-अलग जगहों पर विरोध प्रदर्शन किया।

मोदी सरकार की नई नीति NEET अनिवार्य करने के विरोध में अनीता कोर्ट में लड़ाई लड़ रही थी। NEET में फेल हो जाने की वजह से अनीता को मेडिकल में एडमिशन नहीं मिला तो उसने फांसी लगाकर जान दे दी थी। अनीता की आत्महत्या के लिए सामाजिक संगठन और विपक्ष राज्य की AIADMK और केंद्र की भाजपा सरकार को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं।

वहीं अनीता की मौत के बाद अरियालुर के जिला कलेक्टर ने अनीता के परिजनों को सात लाख का चेक सौंपा जिसे परिजनों ने लेने से इंकार कर दिया। अनीता के भाई ने कहा कि उसकी बहन NEET एग्जाम की तैयारी के लिए गरीब व ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले छात्रों को तैयारी के लिए आर्थिक सहयोग दिए जाने या नीट में छूट देने के लिए कानूनी लड़ाई लड़ रही थी। उसने कोर्ट में कहा था कि ग्रामीण परिवारों से आने वाले छात्र शहरों में रहकर कोचिंग नहीं कर पाते इसलिए उन्हें आर्थिक मदद मुहैया कराई जाए।

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अनीता ने पिछले महीने केवल नीट के अंकों के आधार पर स्नातक चिकित्सा पाठ्यक्रमों में प्रवेश की मांग करने वाली एक याचिका के विरोध में उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था। जिसमें उसे राहत नहीं मिली।

तमिलनाडु को राष्ट्रीय प्रवेश-योग्यता परीक्षा (नीट) के दायरे से छूट नहीं दिये जाने के बारे में जानकर अनिता कथित तौर पर परेशान थी। एक दिहाड़ी मजदूर की बेटी का सपना डॉक्टर बनने का था, जोकि नीट के कारण पूरा नहीं हो पा रहा था। 12वीं में अच्छे मार्क्स पाने के बावजूद वह नीट पास नहीं कर पाई थी। अनीता को इंसाफ के लिए चेन्नई से दिल्ली तक में प्रदर्शनों का दौर जारी है। लोग एक बार फिर रोहित वेमुला को याद कर रहे हैं।

 

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