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सीएम योगी के कर्जमाफी वाले धोखे से आहत किसान ने पिया कीटनाशक

मुजफ्फरनगर। देश में शायद ही कोई ऐसा राज्य होगा जहां के मुख्यमंत्री यह दावा कर सके हैं कि उनके यहां के किसान खुशहाल है। महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड… लगभग देश के हर राज्य में किसान कर्ज, फसल के अनुचित मूल्यों से त्रस्त हैं। कहीं वो आंदोलन कर रहे हैं तो कहीं आत्महत्या…


मुख्य बातेंः-

  1. देशभर में किसान कर रहे हैं आत्महत्या
  2. योगी सरकार ने अभी तक नहीं किया किसानों का कर्ज माफ
  3. लाखों रूपए के कर्ज के दबाव में किसान ने की आत्महत्या
  4. कर्ज वसूली के लिए तहसीलदार ने की थी किसान की बेइज्जती
  5. किसान ने आत्महत्या की कोशिश से पहले लिखा था मार्मिक पत्र

अगर बात करें बीजेपी शासित उत्तर प्रदेश की तो यहां किसान योगी सरकार में ठगा हुआ महसूस कर रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की कैबिनेट ने अपनी पहली मीटिंग में ही किसानों के कर्जमाफी की बात कही थी। इस मीटिंग के बाद ही कर्ज माफी का प्रस्ताव पास कर दिया गया। सरकार ने यूपी के किसानों का 36 हजार करोड़ से ज्यादा का कर्ज माफ करने का फैसला लिया और किसानों के एक लाख तक के कृषि ऋण माफ करने का ऐलान किया गया। मगर सरकार बनने के लगभग चार महीने बीत जाने के बाद भी किसानों का ऋण माफ नहीं हो सका। किसान कर्ज के दबाव में लगातार आत्महत्या कर रहे हैं।


पढ़ेंः योगी सरकार के धोखे से हताश किसान ने की आत्महत्या

ताजा मामला मंसूरपूरी थाना क्षेत्र के सोहंजनी गांव का है। यहां एक किसान ने लाखों रुपए के सरकारी कर्ज के दबाव में कीटनाशक पीकर आत्महत्या करने की कोशिश की है। किसान का नाम धनप्रकाश त्यागी बताया जा रहा है। फिलहाल किसान को बेगराजपुर स्थित मुजफ्फरनगर मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया है जहां उसकी हालत गंभीर बनी हुई है। बैंकों के लाखों रुपए का लोन चुकाने में 75 वर्षीय धनप्रकाश असमर्थ थे।


https://youtu.be/9bx8suDgU2U

बताया जा रहा है कि कुछ दिन पहले तहसीलदार ने वसूली का दबाव बनाकर किसान की बहुत ही बेईज्जत किया था। किसान गरीब और स्वाभिमानी दोनों ही था शायद यही कारण था कि वो इस बेईज्जत को बर्दास्त नहीं कर पाए और देर रात आत्महत्या के इरादे से कीटनाशक पी लिया। किसान ने सुसाइड नोट भी लिखा जिसे पढ़कर आपकी रूह कांप जाएगी।

पढ़ः बीजेपी क्यों करती है किसानों से नफरत, ये रहा सबूत…


समाचार वेबसाइट पत्रिका डॉट कॉम में प्रकाशित एक खबर के मुताबिक, किसान ने पत्र में लिखा था, “मैं कर्ज कैसे जमा करता। एसडीएम और तहसीलदार ने मेरी बेइज्जती करने लगे। यह मुझसे बर्दास्त नहीं हो सका। इसके बाद मेरा आत्महत्या के सिवा कोई चारा नहीं रहा था। फिर मैंने शाहपुर से लेकर जहर खा लिया। मेरी किसान यूनियन की चादर कफन पर डालनी होगी।”

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