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हत्यारी भीड़ के खिलाफ जंतर-मंतर पर उपवास पर बैठे हैं डीयू के प्रोफेसर डॉ. प्रेम सिंह

नई दिल्ली। जिस तरह देश में उन्मादी और मानसिक रूप से विक्षिप्त हो चुकी भीड़ आये दिन निर्दोष लोगों को मार रही है। उसी के विरोध में दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डॉ प्रेम सिंह 25 जून से जंतर मंतर पर 7 दिन के भूख हड़ताल पर बैठे हैं। डॉ प्रेम सिंह का समर्थन करने के लिए दूर-दूर से रोज सैकड़ों की तादात में लोग पहुंच रहे हैं। जस्टिस सच्चर, वरिष्ठ पत्रकार अरविन्द मोहन, प्रो अपूर्वानंद, जामिया मिल्लिया इस्लामिया, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, दिल्ली विश्वविद्यालय, ओखला से बहुत सारे लोगों ने आकर डॉ प्रेम सिंह का समर्थन किया है।

उपवास पर जाने से पहले 24 जून को डॉ. प्रेम कुमार ने अपने फेसबुक पेज पर इसकी जानकारी दी थी-
आदरणीय साथियों
भीड़ द्वारा अपने ही देश में अपने ही नागरिकों की हो रहीं हत्याओं के विरोध में मैं कल (25 जून 2017) सुबह 11 बजे से जंतर-मंतर पर एक सप्ताह का उपवास करूंगा। जो साथी उचित समझें वे साथ में एक दिन का उपवास कर सकते हैं। पहले दिन बंदना पांडे (महासचिव, सोशलिस्ट युवजन सभा) मेरे साथ उपवास पर बैठेंगी।
देश की ग्राम पंचायतों, नगर पालिकाओं, मजदूर, किसान व छात्र संगठनों, सामाजिक-धार्मिक संस्थाओं एवं स्वतंत्र नागरिकों से अनुरोध है कि वे भीड़-हत्याओं की गंभीर समस्या पर संजीदगी से विचार करें और उसे रोकें।
आपका साथी
प्रेम सिंह

उन्होंने उपवास वाले दिन आह्वान किया था-
पूरे देश में साथी एक दिन का उपवास करें तो उसका सामाजिक प्रभाव बन सकता है – भीड़-हत्या करने वाली मानसिकता में बदलाव आ सकता है, पुलिस बलों को मुस्तैदी से अपने कर्तव्य-निर्वाह की प्रेरणा मिल सकती है, और सरकार पर भी दबाव बन सकता है।
आइये, गांधी और सीमांत गांधी को याद करते हुए यह जानने-समझने की कोशिश करें कि भारत का इतना बड़ा समाज और विशालकाय सरकारी तंत्र होने के बावजूद हम भीड़ में तब्दील क्यों होते जा रहे हैं?


इसे लेकर आकाशदीप ने लिखा-
प्रतिरोध शुरू हो चुका है…. आप आ रहें हैं ना उपवास स्थल पर। क्योंकि कल भीड़ में आप भी पीटे जा सकते है, आपकी भी हत्या हो सकती है…. सरकार ने आखिर इस तरह की मानसिकता फैलाने में सफलता हासिल की है….. बाकी क्षेत्रों में तो छोड़ दिजिये। अपील है डॉ. प्रेम सिंह Prem Singh के साथ इस मुहिम में आइए और पूछिए योग कराने वालों से की अख़लाक को क्यों मारा गया, नजीब कहाँ है?? या ट्रेन में ईद की खरीदारी कर के लौट रहे मुस्लिम युवकों पर हमला क्यों होता हैं…. उनकी हत्या क्यों की जाती है।

आपको बता दें कि देश में मोदी सरकार बनने के बाद हत्यारी होती जा रही भीड़ के कई कारनामे सामने आ चुके हैं। भीड़ का गुस्सा इस कदर बढ़ रहा है कि वह हत्या करने से नहीं चूक रही। इसमें जो सबसे खास बात सामने आ रही है वह यह है कि अफवाहों के चलते एक ही खास समुदाय के लोगों को निशाना बनाया जा रहा है। पहले तो कभी-कभी ही ऐसी घटनाएं सुनाई देती थीं लेकिन पिछले दो-तीन दिनों में ऐसी कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं। भीड़ इकट्ठे आती है और उसी खास समुदाय के लोगों को बीफ-बीफ चिल्लाकर पीटने लगती है, और वह उन्हें तबतक पीटती है जबतक यह कंफर्म नहीं हो जाता कि पिटने वाले की जान निकल गई है।

मोहसिन, अख़लाक, नोमान, मिन्हाज़ अंसारी, पहलू खान, नईम न जाने कितने नाम हैं। आंकड़े गिनना मुश्किल हैं। अब इसमें एक और नाम जुड़ गया है। वह नाम है हरियाणा के जुनैद का। बल्लभगढ़ स्टेशन से असावती स्टेशन के पास भीड़ ने एक साथ चार युवकों पर हमला कर दिया। इसमें जुनैद भी था। जुनैद को चार और उसके साथी हाशिम को पांच जगह पर चाकू मारे गए। हॉस्पिटल पहुंचने से पहले ही जुनैद ने दम तोड़ दिया। जुनैद रोज़े से था। जबकि घायल हाशिम का एम्स के ट्रोमा सेंटर में इलाज चल रहा है। तीसरे घायल साकिर की हालत भी गंभीर बताई जा रही है।

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