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दलित IAS ने अमित शाह को भोजन पर किया था आमंत्रित, हुईं बर्खास्त

भोपाल। पिछले चार साल ने निलंबित चल रही दलित आईएएस अफसर शशि कर्णावत को मध्य प्रदेश की शिवराज सरकार ने बर्खास्त कर दिया गया है। मध्य प्रदेश कैडर की इस अफसर को बर्खास्त करने का प्रस्ताव केंद्र सरकार के पास भेजा गया था। प्रस्ताव पर संघ लोक सेवा आयोग ने मुहर लगा दी, जिसके बाद सरकार ने कर्णावत को बर्खास्त कर दिया।

माना जा रहा है कि पिछले दिनो अमित शाह के मध्य प्रदेश दौरे पर खलल डालने की वजह से मोदी सरकार ने कर्णावत को बर्खास्त किया है। बर्खास्त किए जाने के बाद कर्णावत ने कहा दलित होने की वजह से उनकी नौकरी छीनी गई है। उन्होंने भाजपा सरकार को चुनौती दी कि वह चुनाव के मैदान में इसका बदला चुकाएंगी।

इसके पहले उन्होंने कहा था कि भाजपा बाबासाहेब के नाम पर जीतती है लेकिन दलितों पर सबसे ज्यादा अत्याचार मध्य प्रदेश में होते हैं। उन्होंने खुद को धमकी मिलने की भी बात कही थी। उन्होंने कहा था कि अगर मैं व्यापम की औलाद होती तो कब की मरवा दी जाती। इसके पहले शशी कर्णावत जल समाधि की चेतावनी देकर शिवराज सरकार के लिए मुश्किलें खड़ी कर चुकी हैं।

शशि कर्णावत भारतीय प्रशासनिक सेवा की 1999 बैच की अधिकारी थीं। राज्य सरकार कर्णावत की निलंबन अवधि को पिछले चार सालों से कई बार बढा चुकी है। कर्णावत पिछले दिनों तब सुर्खियों में आई थीं, जब भोपाल के तीन दिन के प्रवास पर आए भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह को घर पर भोजन करने के लिए चिट्ठी लिखी थी।

आपको बता दें कि मध्य प्रदेश की भाजपा सरकार ने साल 2013 में शशि कर्णावत पर कथित करप्शन का आरोप लगाकर सस्पेंड कर दिया था। उसके बाद से ही शशि कर्णावत लगातार सरकार के खिलाफ आवाज उठाती रही हैं। एक बार वह राज्य सरकार के खिलाफ धरने पर भी बैठ चुकी हैं। पिछले साल अरविंद केजरीवाल की भोपाल रैली के पहले भी उन्होंने कहा था कि वो अपनी सर्विस पूरी होने के बाद राजनीति कर सकती हैं। उन्होंने उस वक्त अरविंद केजरीवाल की खुलकर तारीफ की थी।

यह था मामला
कर्णावत के विरूद्ध वर्ष 1999-2000 में प्रिटिंग कार्य में राज्य सरकार को लगभग 33 लाख रूपये की हानि पहुंचाने और अवैध लाभ अर्जित करने के संबंध में ईओडब्ल्यू ने अपराध पंजीबद्ध किया था। सितंबर 2013 में विशेष न्यायालय मंडला ने शशि कर्णावत को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धारा 13(1) घ और धारा 13(2) के अंतर्गत 5 वर्ष का सश्रम कारावास एवं 40 लाख रूपये जुर्माना, धारा 420 एवं 34 आईपीसी के अंतर्गत 5 वर्ष का सश्रम कारावास एवं 5 लाख रूपये जुर्माना और धारा 120 ‘बी’ आईपीसी के अंतर्गत 5 वर्ष का सश्रम कारावास और 5 लाख रूपये जुर्माने की सजा सुनाई गई।

सजा के बाद अक्टूबर 2013 में शशि कर्णावत के निलंबन आदेश जारी किए गए थे। अपराधिक प्रकरण में सजा मिलने के बाद अखिल भारतीय सेवा के तहत बर्खास्तगी के संबंध में कर्णावत को अक्टूबर 2014 में कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। सरकार का कहना है कि पर्याप्त अवसर के बावजूद शशि कर्णावत ने नोटिस का उत्तर प्रस्तुत नहीं किया। इसलिये नियमानुसार शशि कर्णावत को सेवा से बर्खास्त करने का प्रस्ताव भारत सरकार को भेजा गया था।

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