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ब्राह्मणी वैज्ञानिक ने किया है संविधान का उल्लंघन, जानिए किन धाराओं में जा सकती है नौकरी

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नई दिल्ली। निर्मला यादव को नीच जाति का बताने के लिए भारतीय मौसम विज्ञान विभाग की जातिवादी ब्राह्मण साइंटिस्ट डॉ. मेधा खोले की सरकारी नौकरी जानी चाहिए.

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संविधान के अनुच्छेद 310 के तहत याचिका….

14 सितंबर, 2017
प्रति,
श्री हर्षवर्धन,
केंद्रीय विज्ञान और टेक्नोलॉजी मंत्री
नई दिल्ली.
विषय- डॉक्टर मेधा विनायक खोले को भारतीय मौसम विज्ञान विभाग, पुणे क्षेत्र के उपमहानिदेशक पद से हटाने के संबंध में क्योंकि…
1. उन्होंने भारतीय संविधान का उल्लंघन किया है और उनका व्यवहार सेंट्रल सिविल सर्विस रूल्स, इंडियन पीनल कोड, 1860 और प्रोटेक्शन ऑफ सिविल राइट्स एक्ट 1955 के हिसाब से दंडनीय है.

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2. उनका व्यवहार संयुक्त राष्ट्र के 1945 के चार्टर, मानवाधिकारों की वैश्विक घोषणा, 1948, नागरिक और राजनीतिक अधिकारों से संबंधित 1966 के अंतरराष्ट्रीय करार, हर तरह के नस्लीय भेदभाव के उन्मूलन से संबधित 1965 के अंतरराष्ट्रीय समझौते, आर्थिक, सामाजिक और सांसस्कृतिक अधिकारों से संबंधित 1966 के अंतरराष्ट्रीय करार और महिलाओं के खिलाफ भेदभाव के उन्मूलन की 1979 की घोषणा के खिलाफ है. भारत इन तमाम समझौतों और करारों का हस्ताक्षरकर्ता है.
आदरणीय महोदय,

इस मामले में तथ्य इस प्रकार हैं : –
1. डॉक्टर मेधा विनायक खोले, जो पुणे के भारतीय मौसमविज्ञान विभाग की उपमहानिदेशक हैं, ने हाल ही में अपनी रसोईया/घरेलू सहायक श्रीमति निर्मला यादव के खिलाफ एक एफआईआर दर्ज कराई जिसमें आरोप लगाया गया है कि श्रीमति यादव ने उनके घर पर काम करते हुए अपने को झूठे तरीके से ब्राह्मण (संविधान के अनुच्छेद 15 के तहत ऐसी पहचान का जिक्र करना असंवैधानिक है) के तौर पर पेश किया. आरोप है कि डॉ. खोले ने श्रीमति यादव के साथ बदसलूकी भी की. यह खबर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मीडिया और कई टीवी चैनलों पर व्यापक रूप से चली.

2. डॉ. खोले ने श्रीमति निर्मला यादव पर आरोप लगाया हुए कहा कि मई, 2016 में वे और उनकी बहन एक ऐसी ब्राह्मण विवाहिता सधवा महिला को खोज रहे जो उनके घर में धार्मिक कार्यों और सोवाला नाम की रस्म के लिए खाना पकाए. डॉ खोले ने आरोप लगाया कि निर्मला ने अपना सरनेम कुलकर्णी बताया, खुद को ब्राह्मण और सधवा बताया और इस वजह से उन्होंने निर्मला को घर में खाना बनाने का काम दे दिया. खोले का कहना है कि जब उन्हें पता चला कि निर्मला ब्राह्मण नहीं है, तो उनकी “धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंची.” ऐसा करके डॉ. खोले ने भारतीय संविधान की धारा 14 का उल्लंघन किया है. यह धारा समानता के अधिकार के बारे में है. उन्होंने संविधान की धारा 15 का भी उल्लंघन किया है, जिसमें धर्म, नस्ल, जाति, लिंग और जन्मस्थान या इनमें से किसी के भी आधार पर भेदभाव का निषेध किया गया है. इनके अलावा उन्होंने संविधान की धारा 17 का भी उल्लंघन किया है, जिसमें छुआछूत के तमाम रूपों का उन्मूलन किया गया है और कहा गया है कि छुआछूत का किसी भी रूप में पालन करना मना है. छुआछूत के पालन की वजह से होने वाला किसी भी किस्म का भेदभाव भारतीय संविधान के मुताबिक दंडनीय अपराध है.

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3. इस तरह डॉ. खोले, जो खुद एक वैज्ञानिक हैं, का अपनी रसोइए के खिलाफ उनकी जाति और वैवाहिक स्थिति के आधार पर एफआईआर कराना दर्शाता है कि वे भारतीय संविधान का सम्मान नहीं करती हैं और वैज्ञानिक होने के बावजूद वे भेदभाव की दकियानूसी जातिगत अवधारणा और उससे संबंधित व्यवहार और पाबंदियों पर यकीन करती हैं.

4. इतना ही नहीं, जब मीडिया ने निर्मला यादव से संपर्क किया तो उन्होंने बताया कि डॉ. खोले के घर पर नौकरी के लिए उन्होंने संपर्क नहीं किया था. बल्कि खुद डॉ. खोले ने उनकी जाति और वैवाहित स्थिति की जानकारी लिए बिना धार्मिक कर्मकांडों में भोजन बनाने के लिए उन्हें रखा. निर्मला यादव का आरोप है कि डॉ. खोले ने उन्हें उनके काम का वेतन भी नहीं दिया. निर्मला यादव ने अपने जवाबी एफआईआर में कहा कि डॉ खोले ने झूठे आरोप लगाए हैं.

5. इस बीच डॉ. मेधा खोले के व्यवहार की लोगों और मीडिया में व्यापक प्रतिक्रिया हुई और इस जातिवादी वैज्ञानिक की राष्ट्रीय स्तर पर निंदा की गई.

6. यह गौरतलब है कि डॉ. खोले एक सरकारी कर्मचारी हैं और इस नाते सेंट्रल सिविल सर्विस कंडक्ट रूल 1964 से बंधी हैं. इस रूल की धारा 2 (बी) में कहा गया है कि – जिस किसी सरकारी कर्मचारी को सरकार ने किसी कंपनी, संस्था या निगम में काम करने के लिए लगाया है, उसे इन नियमों के अंतर्गत सरकारी कर्मचारी माना जाएगा, और इस स्थिति में इस बात से फर्क नहीं पड़ेगा कि उनका वेतन भारत की संचित निघि से आता है या उस संस्था से.
7. डॉ. खोले मे सेंट्रल सिविल सर्विस कंडक्ट रूल 1964 का भी उल्लंघन किया है, जिसमें लिखा गया है कि….

1. हर सरकारी कर्मचारी हर समय
• ईमानदारी से काम करेगा(i),
• ऐसा कुछ नहीं करेगा, जो सरकारी कर्मचारी होने के उपयुक्त न हो (iii),
• संविधान की सर्वोच्चता और लोकतांत्रिक मूल्यों को कामय रखेगा (iv),
• भारत की संप्रभुता और अखंडता की रक्षा करेगा और राज्य, नागरिक व्यवस्था और नैतिकता को कायम रखेगा (v),
• उच्च नैतिक मानदंडों और शुचिता का पालन करेगा (vi),
• लोगों और खासकर कमजोर वर्गों का ख्याल रखेगा (x),
• लोगों के साथ अच्छा व्यवहार करेगा और शालीनता बनाए रखेगा (xi),
• सिविल सर्वेंट के तौर पर अपने पद का दुरुपयोग नहीं करेगा (xv).

8. इसके अलावा डॉ. खोले ने प्रोटेक्शन ऑफ सिविल राइट्स एक्ट 1955 की धारा 7 (1)(a) और (b) का भी उल्लंघन किया है. इस एक्ट की धारा 7 में छुआछूत के लिए दंड का प्रावधान करते हुए लिखा गया है कि जो भी-

a) भारतीय संविधान की धारा 17 के तहत छुआछूत के उन्मूलन से प्राप्त अधिकारों का इस्तेमाल करने से किसी को रोकता है; य़ा
b) ऐसे अधिकार का प्रयोग करने वाले को अपमानित, परेशान या बाधित करता है या करने की कोशिश करता है या ऐसे अधिकार का इस्तेमाल करने वाले का अपमान करता है, चोट पहुंचाता है कि उसका बहिष्कार करता है,
c) बोलकर या, लिखकर या संकेतों के जरिए या किसी भी और तरीके से दूसरे व्यक्तियों को छुआछूत के किसी भी रूप का पालन करने के लिए उकसाता है, (वह दंड का भागी होगा).

9. डॉ खोले ने भारतीय दंड संहिता के हिसाब से निम्न अपराध किए हैं-
• धारा 166 – जो कोई लोक सेवक होते हुए विधि के किसी ऐसे निदेश की जो उस ढंग के बारे में हो जिस ढंग से लोक सेवक के नाते उसे आचरण करना है, जानते हुए अवज्ञा इस आशय से या यह सम्भाव्य जानते हुए करेगा कि ऐसी अवज्ञा से वह किसी व्यक्ति को क्षति पहुंचाएगा, उसे कारावास से, जिसकी अवधि एक वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दंडित किया जाएगा.
• धारा 499 – जो कोई या तो बोले गए या पढ़े जाने के लिए आशयित शब्दों द्वारा या संकेतों द्वारा, या दृष्य रूपणों द्वारा किसी व्यक्ति के बारे में कोई लांछन इस आशय से लगाता या प्रकाशित करता है कि ऐसे लांछन से ऐसे व्यक्ति की ख्याति की हानि की जाए या यह जानते हुए या विश्वास करने का कारण रखते हुए लगाता या प्रकाशित करता है ऐसे लांछन से ऐसे व्यक्ति की ख्याति की हानि होगी, ऐसे में अपवाद की दशाओं के सिवाय, कहा जाता है कि वह उस व्यक्ति की मानहानि करता है.

• धारा 500 – जो भी मानहानि करता है उसे दो साल तक की कारावास या जुर्माना या दोनों की सजा होगी.
• धारा 503 – जो कोई किसी अन्य व्यक्ति के शरीर, ख्याति या सम्पत्ति को या किसी ऐसे व्यक्ति के शरीर या ख्याति को, जिससे कि वह व्यक्ति हितबद्ध हो कोई क्षति करने की धमकी उस अन्य व्यक्ति को इस आशय से देता है कि उसे संत्रास किया जाए, या उससे ऐसी धमकी के निष्पादन का परिवर्जन करने के साधन स्वरूप कोई ऐसा कार्य कराया जाए, जिसे करने के लिए वह वैध रूप से आबद्ध न हो, या किसी ऐसे कार्य को करने का लोप कराया जाए, जिसे करने के लिए वह वैध रूप से हकदार हो, वह आपराधिक अभित्रास (criminal intim¬idation) करता है.

• धारा 504 – जो कोई किसी व्यक्ति को साशय अपमानित करेगा और तद्द्वारा उस व्यक्ति को इस आशय से, या यह सम्भाव्य जानते हुए, प्रकोपित करेगा कि ऐसे प्रकोपन से वह लोक शान्ति भंग या कोई अन्य अपराध कारित करेगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा.

• धारा 509 – जो कोई किसी स्त्री की लज्जा का अनादर करने के आशय से कोई शब्द कहेगा, कोई ध्वनि या अंग विक्षेप करेगा, या कोई वस्तु प्रदर्शित करेगा, इस आशय से कि ऐसी स्त्री द्वारा ऐसा शब्द या ध्वनि सुनी जाए, या ऐसा अंगविक्षेप या वस्तु देखी जाए, अथवा ऐसी स्त्री की एकान्तता का अतिक्रमण करेगा, वह सादा कारावास से, जिसकी अवधि एक वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा.

10. इसलिए, मेरा निवेदन है कि डॉ खोले ने भारत के संविधान, सिविल सर्विस कंडक्ट रूल और भारतीय दंड संहिता के कई धाराओं के खिलाफ आचरण और अपराध किया है.

11. डॉ. मेधा विनायक खोले ने संयुक्त राष्ट्र के 1945 के चार्टर, मानवाधिकारों की वैश्विक घोषणा, 1948, नागरिक और राजनीतिक अधिकारों से संबंधित 1966 के करार, हर तरह के नस्लीय भेदभाव के उन्मूलन से संबधित 1965 के अंतरराष्ट्रीय समझौते, आर्थिक, सामाजिक और सांसस्कृतिक अधिकारों से संबंधित 1966 के अंतरराष्ट्रीय करार और महिलाओं के खिलाफ भेदभाव के उन्मूलन की 1979 की घोषणा के विरुद्ध आचरण किया है ( भारत इन तमाम समझौतों और करारों का हस्ताक्षरकर्ता है). इसलिए, संविधान की धारा 310 के तहत वह लोकसेवक बने रहने का हक खो चुकी हैं. इसलिए वह केंद्र या राज्य सरकार की सेवाओं या पदों पर नहीं रह सकतीं. इसलिए यह आवश्यक है कि उन्हें भारती मौसम विज्ञान केंद्र पुणे की उप-महानिदेशक पद से तत्काल हटाया जाए ताकि संविधान की पालना हो सके और संयुक्त राष्ट्र के करारों का आदर हो सके.

मुझे उम्मीद है कि आप संविधान की मर्यादा के मुताबिक कार्रवाई करेंगे.

सादर,
पायल गायकवाड
वर्तमान में दिल्ली में
प्रति:
1. महामहिम राष्ट्रपति
2. माननीय प्रधानमंत्री

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