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बाबा साहब के परिनिर्वाण दिवस पर मायावती ने सत्ताधारी दलित, ओबीसी नेताओं को कह दी बड़ी बात

mayawati at baba saheb parinirvan divas

लखनऊ। बी.एस.पी. की राष्ट्रीय अध्यक्ष, उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री व पूर्व सांसद मायावती मायावती ने पार्टी के कुछ वरिष्ठ लोगों के साथ आज सुबह 12 माल एवेन्यू स्थित बी.एस.पी. के प्रदेश कार्यालय में बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर की भव्य प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित करके उन्हें अपने श्रद्धा-सुमन अर्पित किये और उस क्षण को याद किया कि ‘‘पूना-पैक्ट‘‘ के लिये आमरण अनशन आदि के माध्यम से बाबा साहेब डा. अम्बेडकर को हर प्रकार से अगर मजबूर नहीं किया गया होता तो आज लोकसभा, विधान सभा, मेयर व अन्य आरक्षित सीटों पर विरोधी पार्टियों में बंधुआ मजदूर बने नेताओं के जीतने के बजाय दलित व ओ.बी.सी. समाज के असली हितैषी व बाबा साहेब डा. अम्बेडकर के सच्चे अनुयायी प्रत्याशी ही चुनाव जीतते अन्य और कोई नहीं जिससे समाज का अब तक अवश्य ही काफी कुछ भला हो गया होता।

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वास्तव में देश के सर्वसमाज के करोड़ों ग़रीबों, मज़दूरों, शोषितों-पीड़ितों, उपेक्षितों व दलितों एवं अन्य पिछड़ों आदि के जीवन में समानता, न्याय व अन्य आवश्यक सुधार के सम्बन्ध में बाबा साहेब डा. अम्बेडकर के इतने एहसान हैं कि उनके क़र्ज़ को कभी भी नहीं चुकाया जा सकता है। बाबा साहेब डा. अम्बेडकर इन सभी लोगों के ‘‘एक व्यक्ति एक वोट व हर वोट का एकसमान मूल्य’’ के अधिकार‘‘ को संविधान में ‘‘मौलिक अधिकार‘‘ के रुप में देकर इनका जीवन और भी ज्यादा धन्य करना चाहते थे, लेकिन ऐसा नहीं होने दिया गया। और स्पष्ट है कि अगर वोट का अधिकार मौलिक अधिकार बन जाता तो शायद ‘‘वोट हमारा, राज तुम्हारा‘‘ की नौबत देश में शायद कभी नहीं आती और ना ही ई.वी.एम. व सरकारी मशीनरी के दुरूपयोग आदि के माध्यम से चुनावी धांधली करने के अत्यन्त गम्भीर मामलो के प्रति इतनी उदासीनता व लापरवाही लोगों को सहनी पड़ती जैसाकि आज विरोधी पार्टियों की सरकार में देखने को मिल रही है।

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सुश्री मायावती ने कहा कि इतने महान व्यक्तित्व को भी विरोधी पार्टियों की सरकारों द्वारा कभी समुचित आदर-सम्मान नहीं दिया गया बल्कि उनकी घोर उपेक्षा ही करते रहे तथा उनके अनुयाइयों को जुल्म-ज्यादती व हिंसा का शिकार बनाया है। परन्तु बी.एस.पी. के रुप में उनके कारवाँ को आगे बढ़ाने व समाज को जागृत करने के फलस्वरुप विरोधी पार्टियां अब उनके वोट की खातिर अनेकों प्रकार की नाटकबाजी करने के लिये मजबूर हो रही हैं।

इन सबके बावजूद यह सर्वविदित ही है कि जिस प्रकार संविधान सभा में अन्य 30 दलित सदस्यों के होने के बावजूद केवल बाबा साहेब डा. अम्बेडकर ही दलितों, पिछड़ों व शोषितों-उपेक्षितों के असली मसीहा व सर्वमान्य नेता के रुप में जाने जाते थे, ठीक उसी प्रकार बी.एस.पी. की भी ख़ासकर उपेक्षित व शोषित समाज की असली हितैषी व बाबा साहेब की सच्ची अनुयायी पार्टी होने का गौरव प्राप्त है, जिसका नेतृत्व परमपूज्य बाबा साहेब डा. अम्बेडकर की तरह ही कभी भी ना टूटने वाला व ना झूकने वाला और ना ही बिकने वाला है। यही कारण है कि विरोधी पार्टियों के लाख साम, दाम, दण्ड, भेद आदि हथकण्डों व अन्य अनेकों प्रकार की चुनौतियों का सामना करते हुये बी.एस.पी. मूवमेन्ट का कारवाँ इतना मजबूत बना हुआ है कि सत्ताधारी शक्तियाँ इससे घबराती व डरती हैं क्योंकि उन्हें असली खतरा बी.एस.पी. से ही लगता है।

उत्तर प्रदेश के हालात के सम्बन्ध में उन्होंने कहा कि केन्द्र व उत्तर प्रदेश में एक ही पार्टी बीजेपी की बहुमत वाली सरकार होने के बावजूद राज्य के लगभग 22 करोड़ लोगों का कोई ख़ास भला नहीं हो रहा है बल्कि उनका काफी ज्यादा बुरा ही हो रहा है क्योंकि दोनों ही बीजेपी सरकारें जनहित व जनकल्याण के साथ-साथ अपराध-नियन्त्रण एवं कानून- व्यवस्था के मामले में काफी लापरवाह साबित हो रही हैं। जनता को वरगलाने के लिये बीजेपी नेताओं व मंत्रियों की केवल इनकी बातें ही काफी बड़ी-बड़ी हैं जिससे लोगों का ना तो पेट भर पा रहा है और ना ही उनके जीवन में वैसी सुख-शान्ति आ पा रही है जिसका काफी डंका पीट-पीट कर चुनाव में वायदा किया गया था। वास्तव में यहाँ उत्तर प्रदेश में अपराध व अपराधी दोनों ही सर चढ़कर बोल रहे हैं, जिसकी पुष्टि केन्द्र सरकार के अधिकारिक आँकड़े भी कर रहे हैं।

वैसे अब तो प्रदेश की आमजनता भी बीजेपी के प्रति अपना आक्रोश खुलकर व्यक्त करने लगी है जिसका ही परिणाम है कि यू.पी. के शहरी निकाय चुनाव में बीजेपी के मंत्री व मुख्यमंत्री अपने-अपने इलाके में भी चुनाव हार गये। केवल मेयर के चुनाव में ई.वी.एम. वोटिंग मशीन की धांधली से बीजेपी की लाज बच गयी फिर भी बीजेपी के शीर्ष नेतागण अपनी जीत के तिल को ताड़ बनाकर पेश करने से हमेशा की तरह बाज नहीं आ रहे हैं। इस प्रकार वे लोग जनता को एक प्रकार से मुँह चिढ़ाने का ही काम कर रहे हैं, जो कि सरासर ग़लत है। मायावती गुजरात में राजकोट से चुनावी कार्यक्रम के बाद कलरात ही वापस लखनऊ लौटी हैं। गुजरात विधान सभा आमचुनाव के समबंध में उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की नैया इस बार उनके अपने गृह राज्य गुजरात में ही काफी मझधार में फंसी हुई लगती है। अगर वहाँ भी ईवीएम में गड़बड़ी करके चुनावी धांधली नहीं की गयी तो निश्चित तौर पर बीजेपी को वहाँ करारी हार का सामना करना पड़ सकता है क्योंकि वहाँ सर्वसमाज के लोगों में बीजेपी सरकार की अहंकार व निरंकुशता से काफी नाराजगी है। खासकर किसान वर्ग काफी ज्यादा परेशान है जबकि पटेल समाज आरक्षण की माँग को लेकर काफी गंभीर है ताकि समाज में व्याप्त गरीबी व बेरोजगारी दूर हो सके।

उल्लेखनीय है कि मायावती के नेतृत्व में अब तक उत्तर प्रदेश में चार बार बनी उनकी सरकार में बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर की स्मृति को चिरस्थायी बनाने के लिए तथा उनके आदर-सम्मान में जनहित की अनेकों महत्वपूर्ण योजनाएं और कार्यक्रम भी संचालित किये गये। साथ ही, बाबा साहेब के सम्मान में आगरा विश्वविद्यालय का नामकरण बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर किया गया। इसी विश्वविद्यालय में बाबा साहेब डा. अम्बेडकर के नाम पर अम्बेडकर पीठ की भी स्थापना की गयी। डा. अम्बेडकर के नाम पर अनुसूचित जाति/जनजाति कोचिंग सेन्टर की स्थापना जनपद अलीगढ़ और आगरा में की गयी।

फै़ज़ाबाद मण्डल के अन्तर्गत अम्बेडकरनगर के नाम से नये ज़िले का गठन किया गया। वाराणसी में बाबा साहेब के नाम पर स्टेडियम का नामकरण तथा रामपुर में संग्रहालय व पुस्तकालय की स्थापना की गयी। इसके अलावा, जनपद बांदा में बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर मेडिकल कालेज, नोएडा तथा गे्रटर नोएडा में डा. भीमराव अम्बेडकर मल्टी सुपर स्पेशियल्टी अस्पताल स्थापित कराये गये।  इसके अलावा कानपुर में डॉ. अम्बेडकर इन्स्टीट्यूट ऑफ टेक्नॉलॉजी फॉर हैण्डीकैप्ड तथा जनपद आज़मगढ़ में डा. अम्बेडकर भवन का निर्माण कराया गया। जनपद मैनपुरी तथा क़न्नौज में डा. भीमराव अम्बेडकर राजकीय महाविद्यालय की स्थापना की गयी।

इसी प्रकार, लखनऊ में डा. भीमराव अम्बेडकर अन्तर्राष्ट्रीय खेल स्टेडियम तथा ग्रेटर नोएडा में 500 सीटों वाले डा. अम्बेडकर अनुसूचित जाति/जनजाति छात्रावास का निर्माण कराया गया। आगरा एवं गौतम बुद्ध नगर में डा. अम्बेडकर पार्क स्थापित किया गया। लखनऊ में डा. अम्बेडकर पर्यावरण म्यूज़ियम तथा डॉ. अम्बेडकर पर्यावरण परिसर का निर्माण कराया गया। बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय, लखनऊ में अम्बेडकर पीठ की स्थापना तथा प्रशासनिक भवन संकुल का निर्माण कराया गया है।

बाबा साहेब डा. अम्बेडकर की स्मृति को चिरस्थायी बनाने के उद्देश्य से ही बी.एस.पी. सरकार द्वारा लखनऊ में गोमती नदी के तट पर विश्व-स्तरीय ‘‘डा. भीमराव अम्बेडकर सामाजिक परिवर्तन स्थल‘‘ स्थापित किया गया है, जिसके अन्र्तगत डा. भीमराव अम्बेडकर विहार, डा. भीमराव अम्बेडकर सामाजिक परिवर्तन गैलरी, डा. भीमराव अम्बेडकर स्मारक दृश्य स्थल, डा. भीमराव अम्बेडकर सामाजिक परिवर्तन प्रतिबिम्ब स्थल तथा सामाजिक परिवर्तन संग्रहालय स्थापित है। इसके अलावा, डा. भीमराव अम्बेडकर गोमती पार्क का निर्माण और इस पार्क में डा. अम्बेडकर की प्रतिमा भी स्थापित की गयी।

साथ ही, लखनऊ में डा. भीमराव अम्बेडकर गोमती विहार खण्ड-1, खण्ड-2, खण्ड-3 एवं डॉ. भीमराव अम्बेडकर गोमती विहार खण्ड-4, डा. भीमराव अम्बेडकर सामाजिक परिवर्तन स्थल हेतु नवीनीकृत गोमती ब्रिज, डा. भीमराव अम्बेडकर सामाजिक परिवर्तन स्थल हेतु ओवर ब्रिज का निर्माण भी कराया गया। डॉ. भीमराव अम्बेडकर गोमती विहार खण्ड-1 में बाबा साहेब की चहुंमुखी प्रतिमा की स्थापना की गयी है।

बी.एस.पी. सरकार द्वारा बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर लघु उद्यमी प्रादेशिक पुरस्कार योजना, डा. अम्बेडकर निःशुल्क बोरिंग योजना तथा डा. अम्बेडकर कृषि ऊर्जा सुधार योजना भी संचालित की गयी। इसके अलावा, लखनऊ में देश के सबसे बड़े सभागारों में एक डा. भीमराव अम्बेडकर सभागार का निर्माण तथा सभागार परिसर में बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर की प्रतिमा स्थापित की गयी है। दिल्ली के नज़दीक नोएडा में भी भव्य ‘‘राष्ट्रीय दलित प्रेरणा स्थल‘‘ स्थापित करके इसमें बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर के साथ-साथ, देश में तिरस्कृत रखे गये दलित एवं अन्य पिछड़े वर्गों में जन्मे अनेकों और महान सन्तों, गुरुओं व महापुरुषों को भी पूरा-पूरा आदर-सम्मान दिया गया। परन्तु बाबा साहेब डा. अम्बेडकर जैसी महान विभूति द्वारा समाज व देश निर्माण के जबरदस्त ऐतिहासिक कार्यों को देखते हुये ये सब कुछ कार्य मामूली भेट ही मानी जायेगी। जिसे भी विरोधी लोग आसानी से पचा नहीं पा रहे हैं।

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