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राष्ट्रपति चुनाव: मीरा कुमार को दलित उम्मीदवार के तौर पर उतारेगा विपक्ष!

नई दिल्ली। बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने आज एक प्रेस कांफ्रेंस कर एनडीए की तरफ से बिहार के वर्तमान राज्यपाल रामनाथ कोविंद को राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार घोषित किया है। राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के नाम पर फैसला के लिए दिल्ली स्थित बीजेपी संसदीय बोर्ड की अहम बैठक में करीब एक घंटे तक मंथन चलता रहा। इसके बाद रामनाथ कोविंद को राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाया गया।

लेकिन अब सूत्रों के हवाले से खबर आ रही है कि यूपीए खेमा भी इससे निपटने के लिए इससे बड़ा ‘दलित महिला’ कार्ड निकालने की कोशिश कर रहा है। खबरें है कि भाजपा के राष्ट्रपति पद के लिए दलित नेता को सामने लाने के बाद कांग्रेस समेत विपक्ष भी राष्ट्रपति चुनाव के लिए एनडीए के उम्मीदवार का समर्थन न करते हुए अपना अलग उम्मीदवार घोषित कर सकती है।

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पूर्व लोकसभा स्पीकर मीरा कुमार का नाम कांग्रेस की ओर से राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के रूप में सामने आ रहा है। सीताराम येचुरी ने भी इस तरह के संकेत दिए हैं। खबरें आ रही हैं कि कांग्रेस पूरे विपक्ष के साथ मिलकर एनडीए के उम्मीदवार का समर्थन नहीं करने जा रही। वे भाजपा के दलित कार्ड को दलित कार्ड के जरिए ही जवाब देना चाहती है। इसलिए मीरा कुमार को राष्ट्रपति पद के लिए अपना उम्मीदवार घोषित कर सकती है।

हालांकि अभी इस पर किसी तरह की मुहर लगाने से पहले कांग्रेस एक बैठक कर आम सहमति बनाना चाएगी, लेकिन बताया जा रहा है कि मीरा कुमार के नाम पर कई दल अपनी सहमति जता रहे हैं। बहरहाल कांग्रेस एक बैठक करके मीरा कुमार के नाम की घोषणा करने का ऐलान जल्द कर सकती है क्योंकि नामांकन के अंतिम दिन में कुछ ही समय शेष रह गया है।

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अगर ऐसा होता है तो मुकाबला दिलचस्प हो सकता है। एजुकेशन के लिहाज से देखें तो रामनाथ कोविंद और मीरा कुमार दोनों ही काबिल व्यक्ति हैं। लोकसभा अध्यक्ष के रूप में मीरा कुमार की सफल पारी को देश की जनता देख चुकी है। मीरा कुमार अगली पीढ़ी की दलित हैं। असल में वे पूर्व उप प्रधानमंत्री जगजीवन राम की पुत्री हैं और उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के मिरांडा हाउस जैसे प्रतिष्ठ‍ित कॉलेज से पढ़ाई की है। वे 1970 में भारतीय विदेश सेवा के लिए चुनी गई थीं और कई देशों में राजनयिक के रूप में सेवा दे चुकी हैं।

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दूसरी तरफ, कोविंद एक कानपुर देहात जिले के एक गांव में साधारण परिवार में पैदा हुए। उन्होंने कानपुर के एक कॉलेज से पढ़ाई की और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ने के बाद राजनीति में प्रवेश किया। उनका प्रशासनिक अनुभव बिहार के राज्यपाल के रूप में है। दोनों ने वकालत की पढ़ाई की है। कोविंद का चयन भी प्रशासनिक सेवा के लिए हो चुका था, लेकिन उन्होंने नौकरी करने की जगह वकालत करना पसंद किया। मीरा कुमार 72 साल की हैं, जबकि रामनाथ कोविंद 71 साल के हैं।

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