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मासूमों की जान बचाने के लिए ऑक्सीजन जुटाने का हर प्रयास कर रहे थे डॉ. कफील

meet dr kafil who effort for oxygen cylinders

नई दिल्ली। जिन बच्चों को योगी सरकार और उसके अस्पताल प्रशासन ने मरने को छोड़ दिया था, डॉ. कफील बच्चों को बचाने के लिए जूझ रहे थे। डॉ. कफील खान न केवल लगातार बच्चों को बचाने में जुटे थे बल्कि जब ऑक्सीजन सिलेंडर के लिए खुद कई सप्लायरों को फोन कर रहे थे।

मुख्य बातें-

  1. गोरखपुर के अस्पताल में मासूमों की मौत से गम का माहौल
  2. 18 वयस्कों की भी मौत
  3. प्रधानमंत्री का भी आ गया ट्वीट
  4. पीएमओ के ट्वीट से कहा गया- पीएम हालात पर नजर बनाए हुए हैं

एक सप्लायर राजी हुआ तो उन्होंने अपना एटीएम कर्मचारी को देकर पैसे निकालने भेजा। फैजाबाद से आए सिलेंडरों के ट्रक चालक को भी डीजल और अन्य खर्चे उन्होंने अपनी जेब से चुकाए। एक तरफ मरने को छोड़ देने वाली योगी सरकार, दूसरी तरफ बचाने वाले डॉ. कफील इस मामले में संवेदनशीलता बरतने को लेकर सुर्खियों में छाए हुए हैं।

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अखबार की यह क्लिप तेजी से वायरल हो रही है।

रात के दो बज रहे थे। इंसेफेलाइटिस वार्ड के कर्मचारियों ने प्रभारी व बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. कफील अहमद को सूचना दी कि अगले एक घंटे बाद ऑक्सीजन खत्म हो जाएगी। इस सूचना के बाद से ही डॉ. कफील की नींद उड़ गई। वह अपनी कार से मित्र डॉक्टर के अस्पताल गए और वहां से ऑक्सीजन का तीन जंबो सिलेंडर लेकर तीन बजे सीधे अस्पताल पहुंचे।

https://youtu.be/1H5-F-I7ak0

तीन सिलेंडरों से बाल रोग विभाग में सिर्फ 15 मिनट ऑक्सीजन की सप्लाई हो सकी। सुबह साढ़े सात बजे ऑक्सीजन खत्म होने पर एक बार फिर हालात बेकाबू होने लगे। मरीज तड़प रहे थे। तीमारदार व्याकुल होने लगे। वार्ड में तैनात डॉक्टर और कर्मचारी परेशान होने लगे। उधर, ऑक्सीजन की खेप आने में करीब दो घंटे की देर थी। ऐसे में डॉ. कफील हर मुद्दे पर जूझते रहे।

https://youtu.be/qsz5i7Ytz4c

डॉक्टर कफील समझ चुके थे कि ऑक्सीजन सिलेंडर के बिना मेरा कोई प्रयास सफल नही होगा। उन्होने शहर के आधा दर्जन ऑक्सीजन सप्लायरों को फिर फोन लगाया तब एक सप्लायर ने नकद भुगतान मिलने पर सिलेंडर रिफिल करने को तैयार हो गया। तब डॉ कफील ने तुरंत एक कर्मचारी को अपना एटीएम कार्ड देकर रूपये निकालने भेजा और ऑक्सीजन की व्यावस्था की। तभी फैजाबाद से आए सिलेंडरों के ट्रक चालक को भी डीजल और दूसरे खर्चो की रकम अपनी जेब से देकर भेजा।

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