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योगी आदित्यनाथ के भड़काऊ भाषण मामले की मीडिया रिपोर्टिंग पर हाईकोर्ट की रोक

no media reporting of yogi s case

लखनऊ। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने साल 2008 में गोरखपुर में योगी आदित्यनाथ द्वारा दिए भड़काऊ भाषण मामले में मीडिया को रिपोर्टिंग करने से रोक दिया है। हाईकोर्ट का कहना है कि गलत रिपोर्टिंग से प्रदेश की छवि खराब हो सकती है।

इस संबंध में 7 नवंबर को हाईकोर्ट के दो जजों जस्टिस कृष्ण मुरारी और जस्टिस अखिलेश चंद्र के बेंच ने इस पर फैसला सुनाया था। बेंच ने कहा था कि वह इस मामले की सुनवाई की मीडिया रिपोर्टिंग पर रोक लगाने के लिए मजबूर है, जब तक कि इस मामले में फैसला नहीं आ जाता।

बता दें कोर्ट ने यह निर्देश राज्य सरकार की अपील के बाद दिया है, जिसमें राज्य सरकार ने कहा था कि मीडिया ने इस खबर को गलत तरह से रिपोर्ट किया और अकसर गलत बयान को रिपोर्ट किया गया।

https://www.youtube.com/watch?v=6_e4Vr6vqdk

दरअसल जस्टिस कृष्ण मुरारी और जस्टिस अखिलेश चंद्र ने अपने फैसले में कहा कि एडिशनल एडवोकेट जनरल मनीष गोयल के मुताबिक, कोर्ट में होने वाली सुनवाई की मीडिया में गलत रिपोर्टिंग हो रही है, जिसके चलते राज्य सरकार को काफी शर्मिंदगी का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि मीडिया में इस बारे में गलत रिपोर्टिंग की गई और गलत तरह से बयानों को छापा गया।

https://www.youtube.com/watch?v=3bPe9R1offY&t=3s

हालांकि इसके बाद कोर्ट ने कहा कि इससे पहले भी हमारे संज्ञान में यह बात आई थी, हमने उस वक्त जुबानी तौर पर यह कहा था कि इस मामले की गलत रिपोर्टिंग नहीं की जाए और गुमराह करने वाले बयान नहीं छापे जाए। लेकिन तमाम मीडिया रिपोर्ट्स जिसे मनीष गोयल ने हमारे सामने रखा है को देखने के बाद हम यह निर्देश देने के लिए मजबूर हैं कि इस मामले की कोई भी रिपोर्टिंग नहीं होगी, जब तक कि इसका फैसला नहीं आ जाए।

https://www.youtube.com/watch?v=QE32ksrGQqQ

गौरतलब है कि जनवरी, 2007 में गोरखपुर में दो समुदायों के बीच दंगा भड़क उठा था, जिसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई थी और कई लोग घायल हुए थे। पुलिस के मुताबिक यह विवाद मुहर्रम पर ताजिए के जुलूस के रास्ते को लेकर शुरू हुआ था।

इस मामले में तत्कालीन बीजेपी सांसद योगी आदित्यनाथ, स्थानीय विधायक राधा मोहन दास अग्रवाल और उस समय शहर की मेयर रही अंजू चौधरी पर आरोप है कि इन लोगों ने पुलिस के मना करने के बावजूद रेलवे स्टेशन के पास भड़काऊ भाषण दिया था जिसके बाद यह दंगा भड़क उठा था। दंगे के बाद योगी आदित्यनाथ के ऊपर कई धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज हुआ था और उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया था।

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