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मेट्रो का किराया नहीं बढ़ाने के लिए 3000 करोड़ रुपए 5 साल तक मांग रही है मोदी सरकार

 

नई दिल्ली। कुछ दिन पहले दिल्ली मेट्रो का किराया बढ़ाया जाने पर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने केंद्र को चिट्ठी लिखी और कहा कि मेट्रो का बढ़ाया गया किराया जनता की जेब पर भारी पड़ेगा। उन्होंने कहा कि दिल्ली मेट्रो का ये फैसला जनविरोधी है। लेकिन अरविंद केजरीवाल की एक नहीं मानी गई। इस बीच मोदी सरकार के एक मंत्री ने मेट्रो का किराया न बढ़ाने के लिए अरविंद केजरीवाल से एक अजीबो- गरीब शर्त रखी है।

मोदी सरकार में शहरी विकास मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने अपने बयान में कहा है कि अगर दिल्ली के मुख्यमंत्री मेट्रो का किराया बढाए जाने के पक्ष में नहीं हैं तो उन्हें अगले पांच वर्षों के लिए केंद्र को 3 हजार करोड़ रुपये देना होगा।

पुरी ने दो बार किराया बढ़ोतरी में कम से कम एक साल का अंतर होने और सालाना 7 प्रतिशत किराया बढ़ोतरी की अधिकतम सीमा की केजरीवाल की दलील को भी गलत बताया। उन्होंने कहा कि इस साल मार्च में की गई किराये में बढ़ोतरी साढ़े सात साल के बाद की गई थी। यह बढ़ोतरी दो हिस्सों में लागू की गई। पहला हिस्सा मार्च में लागू किया गया और दूसरा हिस्सा 10 अक्टूबर से लागू किया जाना प्रस्तावित है, इसलिए इसे एक ही साल में दो बार की गयी बढ़ोतरी नहीं कहा जा सकता है।

हरदीप सिंह पुरी ने मेट्रो रेल के किराये में प्रस्तावित इजाफे को कानून सम्मत बताया। उन्होंने कहा है कि अगर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल किराया बढ़ोतरी को रोकना चाहते हैं तो दिल्ली सरकार को मेट्रो परिचालन में हर साल होने वाले 3000 करोड़ रुपये की भरपाई करनी होगी। पुरी ने केजरीवाल को लिखे पत्र में कहा है कि दिल्ली मेट्रो अधिनियम प्रस्तावित किराया बढ़ोतरी को रोकने की इजाजत नहीं देता है।

पुरी ने कहा कि मेट्रो रेल अधिनियम 2002 के तहत गठित समिति की सिफारिशें मेट्रो प्रबंधन पर बाध्यकारी होती हैं। इतना ही नहीं इस कानून के तहत केंद्र या राज्य सरकार और डीएमआरसी के निदेशक मंडल के पास भी समिति की सिफारिशों में बदलाव करने का कानूनी अधिकार नहीं है।

आपको बता दें कि मौजूदा किराया निर्धारण समिति द्वारा किराए में प्रस्तावित बढ़ोतरी को 10 अक्टूबर से लागू करने के डीएमआरसी के फैसले का दिल्ली सरकार लगातार विरोध कर रही है। इस बाबत केजरीवाल ने पुरी को हाल ही में पत्र लिख कर छह महीने में दो बार किराया बढ़ोतरी को जनता के साथ अन्यायपूर्ण और गैरकानूनी बताते हुए इसे रोकने की मांग की थी।

 

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