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शिव’राज’: सरकारी स्कूल में दलित छात्राओं से साफ करवाया जाता है टॉयलेट, फेंककर दी जाती हैं रोटियां

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छतरपुर। सत्तर साल पहले देश ने अंग्रेजों से आजादी तो हासिल कर ली है लेकिन जातिवाद की मानसिक गुलामी से पीछा नहीं छुड़ा पा रहे हैं। शैक्षणिक संस्थाओं में दलित छात्र- छात्राओं के साथ दूसरे दर्जे का व्यवहार होना अब तक समाप्त नहीं हो पाया है। ऐसा ही एक शर्मनाक मामला मध्यप्रदेश के छतरपुर से सामने आया है। यहां जिले के सरकारी स्कूल में दलित छात्राओं से झाड़ू लगवाई जाती है, शौचालय साफ करवाया जाता है।

समाचार वेबसाइट ईनाडू ने एक रिपोर्ट में दावा किया है कि छात्राओं के साथ जानवरों जैसा व्यवहार किया जाता है। यह मामला जिले के कदारी गांव के प्राथमिक व माध्यमिक विद्यालय का है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यहां अनुसूचित जाति की छात्राओं से केवल झाडू ही नहीं लगवाई जाती बल्कि शौचालय भी साफ करवाया जाता है। यही नहीं मिड डे मील के दौरान रोटियां फेंककर देने जैसे अमानवीय व्यवहार किया जाता है।

जिला शिक्षा अधिकारी ने कहा कि यह बेहद गंभीर मामला है, मैं तुरंत जांच के आदेश देकर नोटिस जारी करता हूं। हालांकि इस मामले में बीजेपी के प्रदेश महामंत्री दिलीप अहिरवार से बात की गयी, तो उन्होंने मामले को तो गंभीर बताया, लेकिन स्कूल में बच्चियों के साथ ऐसे व्यवहार के सवाल पर बात टाल गए।

बहुजन समाज पार्टी के उपाध्यक्ष अब्दुल समीर ने बताया कि पार्टी के लोग जल्द ही स्कूल जाकर बच्चियों से मिलेंगे और जिला प्रशासन दोषियों पर कार्रवाई नहीं करता, तो पार्टी आंदोलन करेगी। अब इस बात को लेकर सभी पार्टियां व अधिकारी कार्रवाई की बात कर रहे हैं, लेकिन आधुनिक भारत में आज भी इस प्रकार की घटनाएं सोचने पर मजबूर कर देती हैं कि भले ही हमने आधुनिकता की ओर अपने कदम बढ़ा लिये हों, पर मानसिक सोच आज भी वही है।

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