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वंचित समूहों के बच्चों और बच्चियों के कत्लगाह हैं उच्च शिक्षा संस्थान

anitha

नई दिल्ली। दलित शोधार्थी छात्र रोहित वेमुला की मौत के बाद मेडिकल कॉलेजों की पढ़ाई में एडमिशन को लेकर केंद्र सरकार की नीतियों  का विरोध कर रही दलित छात्रा ने शुक्रवार को सुसाइड कर लिया है। दरअसल छात्रा अनीता एडमिशन के लिए जरुरी NEET (National eligibility entrance test) परीक्षा का विरोध कर रही थी। सोशल नेटवर्किंग साइट्स फेसबुक, ट्विटर आदि पर इस मामले में नई बहस शुरु हो गई है। चेन्नई की सड़कों पर छात्र अनीता की मौत के बाद प्रदर्शन कर रहे हैं। इसको लेकर सोशल नेटवर्किंग साइट ट्विटर पर #AnithaSuicide ट्रेंड कर रहा है।

वहीं वरिष्ठ पत्रकार, बहुजन विचारक और लेखक दिलीप मंडल ने सोशल नेटवर्किंग साइट फेसबुक पर कई पोस्ट लिखकर सरकार, अदालत और मीडिया की चुप्पी की मंशा पर सवाल उठाए हैं। एक फेसबुक में उन्होने लिखा,  कुछ महीने पहले मैंने कहा था कि उच्च शिक्षा संस्थान वंचित समूहों के बच्चों और बच्चियों के कत्लगाह हैं।
तमिलनाडु बोर्ड में हायर सेकेंड्री में 1200 में 1176 लाने वाली दलित लड़की #Anitha ने आज आत्महत्या कर ली है क्योंकि सरकार और कोर्ट असंवेदनशील हो चुकी है। मेडिकल की ऑल इंडिया परीक्षा NEET को अनीता ने ही सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।

मंडल ने आगे लिखा, तमिलनाडु या किसी भी स्टेट के मेडिकल कॉलेज में किसका एडमिशन हो रहा है, यह दिल्ली से क्यों तय हो रहा है? क्या यही है फेडरल स्ट्रक्चर, जिसका संविधान में वादा है। सब्जी बेचने वाले की होनहार बेटी ने डॉक्टर बनने का सपना देखा था। उसे कुचल दिया गया। इंजीनियरिंग, लॉ और मेडिकल समेत कई और स्ट्रीम की अखिल भारतीय परीक्षाएं बुरी तरह से CBSE बोर्ड के पक्ष में झुकी हुई हैें। राज्य बोर्ड के स्कूलों को या तो बंद कर दिया जाए या फिर हर स्कूल में पहली क्लास से इंग्लिश मीडियम और CBSE बोर्ड लागू कर दिया जाए।

दूसरी पोस्ट में उन्होने लिखा, ”रोहित वेमुला की सांस्थानिक हत्या के बाद की शिक्षा संस्थानों में जुल्म की सबसे बड़ी दास्तान है अनीता की सांस्थानिक हत्या।
अनीता का शव आज फांसी से झूलता पाया गया। एक सब्जी विक्रेता की बेटी अनीता 12वीं के एक्जाम में जिला टॉपर थी। 1200 में 1176 नंबर आए थे। तमिलनाडु में कोचिंग के असर से बच्चों को बचाने के लिए 12वीं के नंबर के आधार पर मेडिकल में दाखिला होता आया है। लेकिन केंद्र सरकार ने जब से राष्ट्रीय स्तर पर NEET को लागू किया है, तब से हालात बदल गए हैं। ऑल इंडिया एक्जाम होने के कारण NEET का सिलेबस CBSE पर आधारित है, जो राज्य बोर्ड से मेल नहीं खाता।
अनीता इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट तक आई। लेकिन सुप्रीम कोर्ट के पंडों ने उसके खिलाफ फैसला सुना दिया। अनीता के सपने बिखर गए।  मेडिकल और इंजीनियरिंग के दाखिले में अगर नेशनल एक्जाम करना है, तो देश भर में पहली क्लास से हर किसी के लिए इंग्लिश मीडियम लागू करो और एक ही बोर्ड रखो। वरना नेशनल एक्जाम बंद करो।”

एक अन्य फेसबुक पोस्ट में उन्होने लिखा, ”NEET ऑल इंडिया एंट्रेंस की राज्य बोर्ड विरोधी नीतियों की वजह से तमिलनाडु में अनीता की सांस्थानिक हत्या का बवंडर बहुत बड़ा होने वाला है। कई शहरों में आंदोलन शुरू हो गया है। हिंदी के चैनल और अखबार गाँजा पीकर पड़े हैं। हमेशा की तरह। उनकी समझ में ही नहीं आता कि देश में हो क्या रहा है। 48 घंटे बाद आज रात तक जगेंगे।”

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