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चुनाव आयोग बिना दांतों वाला शेर है- वरुण गांधी

नई दिल्ली। दो दिन पहले चुनाव आयोग ने इस साल होने वाले विधानसभा चुनावों में हिमाचल प्रदेश के विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान कर दिया लेकिन गुजरात के विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान नहीं किया। जिसे लेकर चुनाव आयोग पर भाजपा सरकार के दबाव में काम करने का आरोप लग रहा है। अब इस मुद्दे पर खुद भाजपा के सांसद वरुण गांधी ने इशारों- इशारों में चुनाव आयोग पर हमला बोला है।

वरुण गांधी ने चुनाव आयोग को दंतहीन बाघ करार देते हुए कहा कि निर्धारित समय के भीतर चुनाव खर्च का ब्यौरा नहीं सौंपने पर आयोग ने अब तक किसी भी राजनीतिक पार्टी को अमान्य घोषित नहीं किया। वरुण ने यह भी कहा कि राजनीतिक पार्टियां चुनाव प्रचार पर काफी रुपए खर्च करती हैं जिसकी वजह से साधारण पृष्ठभूमि के लोगों को चुनाव लड़ने का अवसर नहीं मिल पाता।

नलसार यूनिर्विसटी ऑफ लॉ में ‘भारत में राजनीतिक सुधार’ विषय पर एक व्याख्यान को संबोधित करते हुए वरुण गांधी ने कहा कि सबसे बड़ी समस्याओं में से एक है चुनाव आयोग की समस्या, जो वाकई एक दंतहीन बाघ है। संविधान का अनुच्छेद 324 कहता है कि चुनाव आयोग चुनावों का नियंत्रण एवं पर्यवेक्षण करता है। लेकिन क्या वाकई ऐसा होता है? उन्होंने कहा कि चुनाव खत्म हो जाने के बाद उसके पास मुकदमे दायर करने का अधिकार नहीं है। ऐसा करने के लिए उसे उच्चतम न्यायालय जाना पड़ता है।

उन्होंने कहा कि समय पर चुनावी खर्च दाखिल नहीं करने को लेकर आयोग ने कभी किसी राजनीतिक पार्टी को अमान्य घोषित नहीं किया। यूं तो सारी पार्टियां देर से रिटर्न दाखिल करती हैं, लेकिन समय पर रिटर्न दाखिल नहीं करने को लेकर सिर्फ एक राजनीतिक पार्टी (एनपीपी), जो दिवंगत पी ए संगमा की थी, को अमान्य घोषित किया गया और आयोग ने उसकी ओर से खर्च रिपोर्ट दाखिल करने के बाद उसी दिन अपने फैसले को वापस ले लिया।

आगे उन्होंने कहा कि 2014 के लोकसभा चुनाव के लिए आयोग को आवंटित बजट 594 करोड़ रुपए था, जबकि देश में 81.4 करोड़ वोटर हैं । इसके उलट, स्वीडन में यह बजट दोगुना है जबकि वहां वोटरों की संख्या महज 70 लाख है। उन्होंने कहा कि गरीबों और मध्यम वर्ग के लोगों के लिए संसद और विधानसभाओं के चुनाव लड़ना लगभग असंभव हो गया है।

इससे पहले कांग्रेस ने भाजपा पर आरोप लगाया कि वह चुनाव आयोग पर बेशर्म दबाव के तौर-तरीके इस्तेमाल कर रही है ताकि वह अंतिम समय में लोक-लुभावन वादे कर गुजरात में वोटरों को आकर्षित कर सके।

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