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मोदी सरकार ने कहा- लोगों के पास कोई अधिकार नहीं, वह तय नहीं करेंगे कैसे पड़े वोट

नई दिल्ली। देश में ईवीएम मशीन की विश्वसनीयता को लेकर सवाल उठे हैं। सुप्रीम कोर्ट ईवीएम और वीवीपीएटी को लेकर कई याचिकाओं की सुनवाई कर रहा है। इसी मुद्दे को लेकर केंद्र सरकार ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में एक हलफनामा दायर किया है। इस हलफनामे में मोदी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि मतदाताओं को यह तय करने का अधिकार नहीं कि वोट कैसे पड़ना चाहिए।

खास बातें-

  1. मोदी सरकार ने वीवीपीएटी को लेकर बदले तेवर
  2. कहा- मतदाता तय नहीं कर सकते कैसे पड़े वोट
  3. मोदी सरकार ने वीवीपीएटी की याचिकाओं का विरोध किया

केंद्र सरकार ने चुनावों में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन के साथ-साथ वीवीपीएटी मशीन के इस्तेमाल को जरूरी बताने की याचिकाओं का विरोध किया। कानून मंत्रालय द्वारा सुप्रीम कोर्ट में दायर हलफनामे में कहा गया कि वीवीपीएटी महज ईवीएम की बैकअप सुविधा है। मंत्रालय ने कहा कि ईवीएम विश्वसनीय है और इसके साथ छेड़छाड़ संभव नहीं है। न तो सुप्रीम कोर्ट और न ही किसी अन्य ने ईवीएम में गड़बड़ी को लेकर कोई आदेश पारित किया है।

पढ़ें- VVPAT मशीन मिलेगा, तो ही गुजरात चुनाव में होगा इस्तेमाल- चुनाव आयोग

मोदी सरकार ने कहा कि ऐसे में उन याचिकाओं को खारिज कर दिया जाना चाहिए जिनमें वीवीपीएटी के इस्तेमाल जरूरी करने की गुहार की गई है। मंत्रालय ने कहा है कि वोट देने का अधिकार के तहत यह नहीं आता कि मतदाताओं को यह चुनने का अधिकार हो कि वोट किस प्रकार पड़ना चाहिए। यह काम चुनाव आयोग पर छोड़ दिया जाना चाहिए।

http://www.youtube.com/watch?v=a4P816qw-Yg

इसके पहले चुनाव आयोग ने भी सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि गुजरात चुनाव में तभी वीवीपीएटी मशीन का इस्तेमाल किया जा सकेगा जब सितंबर तक मशीनें मिल जाएंगी। बता दें कि देशभर में ईवीएम मशीनों पर उठते हैकिंग से संबंधित सवालियां निशान लगते रहे हैं। इसी के चलते चुनाव आयोग ने अगले चुनावों में वीवीपीएटी मशीनों के इस्तेमाल के बारे में सोचा है। इसके पहले कई राजनीतिक दल ईवीएम मशीनों से छेड़छाड़ के मामले उठा चुके हैं। कुछ ने तो इसे हैक करने का चैलेंज भी किया था।

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