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आम्रपाली ग्रुप की करतूतों ने रियल एस्टेट मार्केट के विश्वास को तहस नहस कर दिया।

Amarpali groups

एक जमाना था जब चारो तरफ महेंद्र धोनी वाले आम्रपाली के पोस्टरों से पूरा एनसीआर पटा हुआ था। कोई ऐसा चौराहा नहीं था जिसपर आम्रपाली की कोई होर्डिंग ना हो। एक बार जब मै किसी मित्र (वह भी बिल्डर हैं ) के साथ उसकी चार गोलो वाली गाड़ी में आ रहा था तो उसने आम्रपाली के होर्डिंग को देखते हुए कहा कि यह रियल एस्टेट का किंग है। मैंने ऐसे ही कह दिया कि दूसरो के पैसो से किंग नहीं बना जाता है तो उसने चिढ़ते हुए कहा कि 10000 करोड़ का आदमी हैं।

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आप को ऊपर की स्टोरी इसलिये बताया ताकि बिल्डर की सोच का पता चल सके। सच्चाई यही है कि उन्होंने दूसरो के पैसो से खुद किंग बनने की कोशिश की दूसरे शब्दों में कहे तो उन्होंने कस्टमर के पैसे से हर विलासिता को भोगने की कोशिश की। जिसका खामियाज़ा आज कस्टमरों को उठाना पड़ रहा है।

आज सर्वोच्च न्यायालय ने ऐसे केसो पर सीधा हस्तक्षेप करना शुरू कर दिया है परन्तु यह केवल आम्रपाली की ही नहीं है दो चार को छोड़ कर सभी बिल्डर ऐसे ही है। अभी नाम लेना मुनासिब नहीं है अन्यथा मानहानि का मुकदमा कर देंगे ,जो आज कल डराने का फैशन सा बन गया है। परन्तु इतना अवश्य है कि आम्रपाली तो अभी शुरुआत है अभी बहुत नाम आएंगे। उनसब के आने से रियल एस्टेट सेक्टर का क्या होगा ,सबसे बड़ा तो उन कस्टमरों का क्या होगा जिन्होंने अपने जिंदगी भर की कमाई को इसमें लगा दिया।

क्या सुप्रीम कोर्ट आम्रपाली के बहाने इस सेक्टर का सुधार कर पायेगा। इस सवाल का जवाब देना अभी कठिन है क्योकि सभी बिल्डरो अलग अलग समस्या लेकर आएंगे तो सभी का इलाज अलग अलग होगा ,परन्तु इतना अवश्य है कि इलाज पीड़ादायक होगा और होना भी चाहिए क्योकि बिल्डरो ने अब इस कैंसर जितना जटिल बना दिया है। पर इस पीड़ा को सहने की जिम्मेदारी कस्टमरों पर नहीं बिल्डरो पर होगी क्योकि कस्टमर अपने हिस्से की पीड़ा सह चुके है अब बिल्डरो की बारी है। अब बिल्डरो को तैयार रहना होगा।


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