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विमर्श

1967 से समाजवाद की अलख जगा रहे गणेश यादव का यूपी विधानसभा चुनाव 2017 में क्या था रोल?

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हमारा विधानसभा क्षेत्र रामपुर कारखाना 339 है। यह 2012 में नए विधानसभा क्षेत्र के रूप में सृजित हुवा। हमारे वहां से इस नवसृजित विधानसभा क्षेत्र से विधायक श्रीमती गजाला लारी जी थीं तथा 2017 में उन्हें ही पुनः टिकट मिला था। 2012 के चुनाव में मैं भी टिकट का अभ्यर्थी था लेकिन गजाला जी टिकट पा गयीं और हमलोग साथ लग करके पूरी ईमानदारी से चुनाव में प्रचार किये। मैं लगातार तीन महीने तक अपनी गाड़ी में अपना तेल डाल करके गजाला जी के साथ प्रचार में गली-गली घूमा। गजाला जी ने भी खूब मेहनत किया। पैदल चलने में उनके पैरों में फफोले तक उग आए।गजाला जी जब 2012 में मेरे वहां से चुनाव लड़ने आईं तो उन्होंने मुझसे अपने घर भोजन करवाने को कहा।मैंने डेट दे दिया लेकिन तय तारीख पर मैं जिले से बाहर चला गया जिस नाते दावत का प्रोग्राम कैंसिल हो गया। गजाला जी ने मुझसे पुनः तगादा किया कि भोजन नही कराए,मैंने फिर डेट दिया लेकिन उस दिन भी मैं घर से बाहर रहा जिस नाते प्रोग्राम कैंसिल हो गया। तीसरी बार फिर गजाला जी ने भोजन हेतु मुझे टोका, मैं काफी लज्जित महसूस किया कि दो-दो बार भोजन का डेट देकर मैं भोजन नही करा सका। तीसरी बार तय तारीख पर भोजन बना लेकिन उस दिन खूब मूसलाधार बारिश हुई, बावजूद इसके जिले के वरिष्ठ सपाई नेतागण व क्षेत्र के लगभग 150 कार्यकर्ता भोजन किये।

https://www.youtube.com/watch?v=s_5_qXMdGbQ

तकरीबन 150 लोगो को नानवेज भोजन करवाने से अचंभित गजाला जी ने मुझसे जब यह पूछ दिया कि कोई और कार्यक्रम था क्या इतने लोगो को खिलाने हेतु तो मैंने कहा कि नही आपके आदेश पर आपको दावत खिलाना था इसलिये आपके साथ पार्टी के अन्य साथियो को भी बुला लिया जिससे आपका प्रचार भी हो जाय।

2012 में रामपुर कारखाना से कांग्रेस पार्टी मुझे अपना टिकट दे रही थी पर मैंने उसे सिरे से खारिज कर दिया था और कह दिया था कि मैं कुछ बनूँ या न बनूँ लेकिन कांग्रेस-भाजपा से नही लड़ सकता। मेरे रिफ्यूज करने के बाद आनन्द यादव जी टिकट पाए थे। आनन्द यादव जी मेरी पत्नी के मामा के भतीजा लगते हैं। चुनाव के दौरान आनन्द जी की पत्नी मेरे घर आई थीं और मेरी पत्नी से खुद को उनकी भौजाई बताते हुए दरवाजा खोलने को कही थीं पर मेरी पत्नी ने दरवाजा खोलने की बजाय उन्हें वोट न देने की बात कह उन्हें दरवाजे से ही लौटा दिया था। हम और हमारा परिवार इस रूप में पार्टी के लिए समर्पित रहा है।

https://www.youtube.com/watch?v=5X0TWAxl_UE&t=82s

गजाला जी के साथ मैं 2012 के चुनाव में पूरे मन से लगा रहा। चुनाव के पूर्व मैं उनके साथ अपनी गाड़ी से घूमता रहा जबकि चुनाव प्रचार शुरू होने पर में 2 दिन गजाला जी द्वारा दी गयी गाड़ी से घूमा। दूसरे दिन मैं भैंसाडाबर गांव घूम कर 3 बजे से दीनानाथ कुशवाहा जी के प्रचार में खोराराम सभा करने चला गया जो गजाला जी को बुरा लग गया और उन्होंने इसकी शिकायत श्री मुक्तिनाथ यादव जी से रेलवे स्टेशन देवरिया पर लखनऊ प्रत्याशियों की बैठक में जाते वक्त कर दी जिसके बाद मैं पूरे चुनाव भर अपनी भाड़े की गाड़ी या मोटरसाइकिल से पथरदेवा, रामपुर कारखाना,देवरिया व रुद्रपुर विधानसभाओं में सक्रिय रहा।

मेरी शुरू से आदत रही है कि पार्टी प्रत्याशियों को नोट,वोट,सपोर्ट आदि ईमानदारी से देता रहा हूँ।2012 के ही चुनाव में मैंने जहां अपने खुद के साधन से प्रचार किया था वहीं रुद्रपुर मुक्तिनाथ यादव जी को 21000 रु, शाकिर अली जी को 5000 रु,दीनानाथ कुशवाहा जी को 5000 रु चंदा भी दिया था। गजाला जी ने मुझे उस बार अपने घर सलेमपुर में 10000 रूपये की गड्डी लाकर देने का प्रयास किया था जिस पर मैने उनसे कहा था कि विधायक जी मैं किसी से पैसे लेकर प्रचार नही करता। मैं पैसे देकर प्रचार करता हूँ। मैने गजाला जी से कहा था कि विधायक जी या तो आप मुझसे 10000 रुपये चंदा ले ले या मुझे अपना लगा करके प्रचार करने दें। मैंने गजाला जी की डुमरी में तब दो सभाएं कराई थी क्योकि तब गुड्डू शाही जी की 4-4 गाड़िया एम्बुलेंस के रूप में मेरे वहां से ही चलती थी। मैंने दोनों सभाओं का माइक,मंच,टेंट आदि खुद वहन किया था। पूरे चुनाव भर प्रचार मैंने अपने खर्चे से किया।

https://www.youtube.com/watch?v=RHp6Cko8PDs

अपने जीवन मे मैं पहली बार गजाला जी के लिए 2012 में मतदान के दिन अपने बूथ पर मिलिट्री की दर्जन भर गाड़ियों से घूम रहे पर्यवेक्षक द्वारा जी भर के गालियां सुनीं क्योकि मैं मेज-कुर्सी लगा करके बूथ पर बैठा था। मुझे पर्यवेक्षक व साथ आई फोर्स ने इसलिये खूब गालियां दी कि मैं क्यो पोलिंग के दिन कुर्सी-मेज लगा करके बैठा हूँ।

गजाला जी 2012 मे मेरे गांव में पूरे क्षेत्र में सर्वाधिक वोट पायीं और चुनाव जीत गयी। चुनाव जीतने के कुछ दिन बाद गजाला जी का बर्ताव हमारे और हमारे साथियो के साथ बदल गया और 2014 लोकसभा चुनाव के समय तो गजब हो गया जब जनता इंटर कालेज रामपुर कारखाना में श्री विजय यादव एमएलसी, श्री रामेंद्र त्रिपाठी जी आदि सहित हजारो लोगो के बीच कार्यकर्ता सम्मेलन में उन्हें उन्ही द्वारा कहलवाये जा रहे सम्बोधन बिजली रानी से सम्बोधित करते हुए यह उलाहना दे दिया कि मेरे गांव में विधायक जी पूरे विधानसभा में सबसे अधिक वोट पायीं,सरकार हमारी, विधायक हमारा जिन्हें बिजली रानी कहा जाता है और मेरे गांव का ट्रांसफार्मर 3 महीने से जला पड़ा है तो विधायक जी के लड़के ने मुझे भद्दी-भद्दी गालियां देते हुए जो कुछ कहा उसकी सीडी आज भी मेरे पास मौजूद है।विधायक जी मेरे साथ अब दुश्मन की तरह पेश आने लगी थीं।उन्होंने मेरा जम करके सपा सरकार में उत्पीड़न करवाया।

सभी थानाध्यक्षों व सिपाहियों को उन्होंने निर्देश दे दिया कि मैं जो कोई पैरवी करूँ उसके उल्टा काम किया जाय। विधायक जी ने प्रधानी व प्रमुखी के चुनाव में मेरा भरपूर विरोध किया। उन्होंने उन लोगो को अपने घर से भगा दिया जो लोग मेरा नाम उनके सामने ले लिए। मेरे साथ दिखे लोगो को विधायक जी ने मुख्यमंत्री कोष से इलाज हेतु धनराशि मुहैया कराने हेतु पत्र तक लिखने से मना कर दिया,यह अलग बात है कि मैंने दर्जन भर लोगो को अपने पैड पर लिख कर 6-6 लाख तक इलाज हेतु धन दिला दिया। 2014 लोकसभा चुनाव के समय गजाला जी ने विशुनपुरा बाजार में (अब मरहूम) शाहिद अंसारी जी से मेरे हाथ से माइक छिनवा लिया।

2014 के लोकसभा चुनाव में गजाला जी की खुद की भूमिका सपा प्रत्याशी श्री बालेश्वर यादव जी के प्रति नकारात्मक थी जिसे सपा के लोकसभा प्रत्याशी रहे श्री बालेश्वर यादव जी अपने दो-दो पत्रों में लिखकर राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री मुलायम सिंह यादव जी को दे चुके हैं।ये दोनों पत्र मेरे पास मौजूद हैं जिनमे श्री बालेश्वर यादव जी ने लिखा है कि गजाला जी व गजाला जी के समर्थक मेरे बिरुद्ध यह प्रचार कर रहे थे कि “पहले भाई, तब सपाई।” बालेश्वर यादव जी लोकसभा चुनाव में रामपुर कारखाना विधानसभा के लगभग 360 बूथों में यादव डॉमिनेटेड 32 बूथ ही जीत सके थे।

2017 विधानसभा चुनाव में मैंने टिकट ही नही मांगा क्योकि गजाला जी आपसी कलह में शिवपाल जी के खेमे से अखिलेश जी के खेमे में आ गयी थीं इसलिये उनका टिकट कटना था नही।गजाला जी जब 2017 में चुनाव लड़ने आयी तो वे पूरे चुनाव के दौरान कभी भी मुझसे न मिली, न समर्थन मांगी, न प्रचार करने को कहीं। कितना अंतर था 2012 और 2017 के गजाला जी के व्यवहार में, 2012 में वे मुझसे दौड़ा करके दावत लीं, मुझे प्रचार हेतु अपने साथ रखीं।मैंने पचासों हजार खर्च कर उनका साथ टिकट मांगने के बावजूद दिया लेकिन 2017 में मुझे गलियाने, अपमानित करने, नुकसान पंहुचाने, मेरे बिरुद्ध प्रधानी आदि में चुनाव लड़ाने के बावजूद एक बार भी यह नही कही कि मुझे उनका प्रचार करना चाहिए।

मैं प्रश्न छोड़ता हूँ कि ऐसी परिस्थिति में मेरे द्वारा गजाला जी का प्रचार न करने में दोष किसका है? यह सही है कि मैं 2017 के चुनाव में गजाला लारी जी का प्रचार नही किया लेकिन इसमें दोष किसका है यह तय करने का अधिकार आप सभी को देता हूँ? मैंने देवरिया जेपी जायसवाल जी को 5000 रुपया चंदा दिया और उनका प्रचार किया, एलायंस के रुद्रपुर से कांग्रेस प्रत्याशी अखिलेश सिंह जी को 5000 रुपया दिया और उनका प्रचार किया तथा सलेमपुर से विजय लक्ष्मी गौतम जी को 5000 रुपया दिया तथा उनका प्रचार किया। क्या यह सही नही है कि मेरे द्वारा गजाला जी का प्रचार न करने के बावजूद गजाला जी मेरे गांव में पुनः सर्वाधिक 755 वोट पायीं?मैं यह निःसंकोच स्वीकारता हूँ कि मैं गजाला जी के प्रचार में नही था जिसे जो कोई जिस रूप में भाष्य करे, मुझे दिक्कत नही है।

https://www.youtube.com/watch?v=5wi5oT0_QaM&t=25s

यह तो मैंने अपनी बात 2012 और 2017 विधानसभा चुनाव के मुतल्लिक रखी लेकिन जो असल बात रामपुर कारखाना में 1967 से समाजवादी झंडा गाड़ रहे गणेश यादव जी का है, वह मुझसे इतर है। गणेश यादव जी 2012 मे भी गजाला जी के साथ रहे तथा 2017 में भी गजाला जी के साथ सारा अपमान पीकर रहे। यह सबको पता है कि गजाला जी रामपुर कारखाना में गणेश यादव जी को हाशिये पर डालने का हर सम्भव प्रयास कीं।हिन्दू वाहिनी के चेयरमैन से मिलकर पूरे 5 साल ठेका-पट्टा का काम कीं।गणेश यादव जी द्वारा बनवाये गए गेट को तोड़वा दीं लेकिन जब विधान सभा चुनाव आया तो गणेश यादव जी गजाला जी के मंच पर बैठे रहे।उनके पक्ष में दो-दो बार भाषण किये।गजाला जी ने गणेश यादव जी का भाषण खुद करवाया।गणेश यादव जी ने गजाला जी द्वारा नए-नए ठेकेदार/कार्यकर्ता बनाये जाने के बावजूद मतदान के दिन 7 बजे से 5 बजे तक बैठ कर वोट डलवाया।मैंने गणेश यादव जी द्वारा गजाला जी को विधायक व मंत्री बनाने वाले उनके भाषण पर कभी-कभी मजाक में टांट भी कसा लेकिन गणेश यादव जी यही कह करके चुप हो गए कि पार्टी के लिए मैं अपमान भी सह लूंगा,जो शायद मुझसे नही हो सकेगा।

गणेश यादव जी की पुत्र बधू श्रीमती देवंती यादव जी को समाजवादी पार्टी ने रामपुर कारखाना से चेयरमैन पद हेतु टिकट दिया है। कुछ साथी गणेश यादव जी जैसे ईमानदार कार्यकर्ता को निजी स्वार्थ में लांछित कर रहे हैं जो मैं उचित नही समझता हूं। हां कुछ क्षण के लिए कोई मुझ पर यह आरोप लगाए तो मैं उसे स्वीकार लूंगा पर गणेश यादव जी पर यह आरोप मैं नही स्वीकार कर सकता।

ख़ैर आकलन और निर्णय जनता को करना है,इसलिये 2017 विधानसभा चुनाव के आखिरी सभा की वीडियो डालते हुए जिसमे गणेश यादव जी गजाला जी द्वारा माइक देने पर बैठे-बैठे दुबारा भाषण दिए हैं, निर्णय जन अदालत पर छोड़ता हूँ।

(ये लेखक के निजी विचार हैं। चंद्रभूषण सिंह यादव त्रैमासिक पत्रिका ‘यादव शक्ति’ के प्रधान संपादक हैं।)

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