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क्या ‘सामाजिक न्याय’ के रास्ते पर आएगी समाजवादी पार्टी?

akhilesh-yadav

हमारे मित्र और देश के मूर्धन्य लेखक, विचारक,सोशलिस्ट फैक्टर के सम्पादक, कवि, नाटककार एवं स्तम्भकार फ्रैंक हुजूर जी की जागृति के चलते एवं देश के लब्ध प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटीज (JNU, DU, IIT, BBAU, LU, AU) के पिछड़े/दलित रिसर्च छात्रों की सामाजिक न्याय के प्रति अटूट आस्था ने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अखिलेश यादव जी से घण्टो मिलकर वार्ता करने का जो सराहनीय कार्य किया है वह प्रशंसनीय है।

जेएनयू के दिलीप यादव, राहुल राव (रेवाड़ी), रमेश, राजेश यादव, भीम राव अम्बेडकर विश्वविद्यालय के रामकरन निर्मल, जयवीर सिंह , राघवेन्द्र सिंह, देवेन्द्र माथुर, राजबर्द्धन, आजम खान, आईआईटी के रविप्रकाश यादव, अमित कुमार, इलाहाबाद विश्वविद्यालय के रविंद्र कुमार, लखनऊ विश्वविद्यालय के रविंद्र सिंह, दिल्ली विश्वविद्यालय के अमन यादव एवं धर्मबीर यादव गगन  आदि रिसर्च स्कालर्स ने अखिलेश यादव से अपने मुलाकात में बड़ी शिद्दत से अपने वर्गीय हित की बातें उठायी। इन नौजवानों ने सपा मुखिया अखिलेश यादव से कहा कि हमलोग किसी पोर्ट फोलियो के लिए आपसे मिलने नही आये हैं, हम लोग अपने वर्ग की तरक्की के लिए अपनी चिंता जाहिर करने आप के पास आये हैं। इन मेधावी शोध छात्रों ने कहा कि हमलोगों को अपने भविष्य की चिंता नही है क्योंकि हमलोग या तो शोध कर रहे हैं या तकनीकी शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं, हमे तो जॉब मिलना ही मिलना है पर हमें चिंता अपने उन करोड़ो पिछड़े/दलितों की है जो गांवों में शिक्षा, सम्पत्ति, सम्मान और रोजगार से विरत नारकीय जिंदगी जी रहे हैं।

इन सामाजिक एवं शैक्षणिक तौर पर वंचित लोगो को सामाजिक न्याय दिलाने का कार्य राजनीति करने वाले समझदार व वर्गीय सोच के लोग ही कर सकते हैं। उक्त छात्रों ने अपने घण्टो की चर्चा में कहा कि अखिलेश यादव सम्पूर्ण देश आप मे एक होनहार, चिंतनशील और गम्भीर राजनेता की छबि देख रहा है। देश के वंचित तबकों को उम्मीद है कि आप सामाजिक न्याय की लड़ाई को मजबूती से लड़ सकते हैं इसलिए आपसे देश का दलित/पिछड़ा बहुत कुछ उम्मीद पाले हुए है। इन शोध व तकनीकी शिक्षा क्षेत्र के छात्रों की बातों को पूरी गम्भीरता से सुनते हुए अखिलेश यादव जी ने कहा कि नौजवान दिशा बदलने में सक्षम होते हैं। हम आप सबके साथ हैं, आपलोग सँघर्ष करें। मैं पूरी तौर पर आपलोगो की बातों से सहमत हूँ। अखिलेश यादव जी की बातों को सुनने के बाद उक्त छात्र काफी उत्साहित हुए और उन्हें लगा कि भविष्य में समाजवादी पार्टी सामाजिक न्याय के रास्ते को अख्तियार करेगी।

ज्ञातव्य हो कि जेएनयू के दिलीप यादव सामाजिक न्याय के ऐसे फायर ब्रांड छात्र नेता हैं जिन्होंने सामाजिक न्याय जिन्दावाद, फुले-अम्बेडकर जिंदाबाद बोलने के कारण जेएनयू में निष्कासन का दंश झेला है। देश के इतिहास में वे पहले ऐसे छात्र नेता हैं जिन्होंने जेएनयू को लगभग 3 हफ्ते तक बंद करा दिया और अपनी मांगे पूरी करा लिया। बाबा साहब डॉ.भीम राव अम्बेडकर विश्वविद्यालय के रामकरण निर्मल वह छात्रनेता हैं जिन्होंने देश के प्रधानमंत्री मोदी को यूनिवर्सिटी में अपनी गूंज से हिला दिया। डीयू के धर्मबीर यादव गगन वह छात्रनेता हैं जिन्होंने पेरियार ललई सिंह यादव, प्रोफेसर तुलसी राम आदि पर शोधपरक लेखन किया है तथा सामाजिक न्याय को अपना आदर्श बनाकर सँघर्षरत है।

जेएनयू, डीयू, भीम राव अम्बेडकर विश्वविद्यालय, लखनऊ विश्वविद्यालय, इलाहाबाद विश्वविद्यालय एवं आईआईटी के सजग छात्रों ने अखिलेश यादव से इस मुलाकात में कहा कि वे युवा हैं तथा सामाजिक परिस्थितियों से वाकिफ हैं इसलिए उन्हें भागीदारी व विशेष अवसर के सिद्धान्त को आत्मसात करना चाहिए। अखिलेश यादव जी से मुलाकात में इन छात्रों ने देश की गम्भीर स्थिति पर चिंता जताया। शिक्षा और शिक्षण संस्थानों के भगवाकरण को घातक बताते हुए इन छात्र नेताओं ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी शिक्षा का बेड़ा गर्क करने पर तुली है जिसे देश भर का उच्च शिक्षण संस्थानों का नौजवान नकार रहा है। हैदराबाद यूनिवर्सिटी से लेकर दिल्ली, जेएनयू, राजस्थान आदि यूनिवर्सिटीज में भारतीय जनता पार्टी शिकस्त खा रही है लेकिन सतर्कता जरूरी है। इन छात्रों ने समाजवादियों से खुलकर आगे आने की अपील किया।

दलित समाज के रिसर्च छात्रों ने कहा कि उन्हें सर्वजन के सिद्धांत में तनिक भी रुचि नही है। मायावती बहुजन के कांसेप्ट को त्याग करके भारी भूल कर रही है। मायावती का रास्ता दलितों के हित का नही रह गया है इसलिए अखिलेश यादव आपको बीती बातों को भूलकर इन दलित व वंचित लोगो की लड़ाई को लड़ना होगा। दलित रिसर्च छात्रों ने कहा कि यदि समाजवादी पार्टी संख्या के अनुपात में भागीदारी के सवाल को महत्व देती है और दलितों के मसायल पर आवाज उठाती है तो चौराहे पर खड़ा दलित समाज अखिलेश यादव आपमें बहुजन नायक की छवि देखने लगेगा।

देश के नामी-गिरामी विश्वविद्यालयो के रिसर्च व तकनीकी शिक्षा के होनहार छात्रों के इस मुलाकात की सार्थकता इसी में है कि समाजवादी पार्टी सामाजिक न्याय के लिए खुल करके सँघर्ष करे। देखना है कि इन शोध छात्रों की कितनी बातों को समाजवादी पार्टी अमल में लाती है?

(ये लेखक के निजी विचार हैं। चंद्रभूषण सिंह यादव त्रैमासिक पत्रिका यादव शक्ति के प्रधान संपादक हैं।)

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