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जानिए… BJP और RSS ने क्यों रचा जेएनयू को बर्बाद करने का षड्यंत्र

भाजपा और राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ पूरे देश के नौजवानों को आंखें मूंद कर संघ की बताई बातों पर विश्वास करने वाला बनाना चाहते हैं। इसका मकसद यह है कि भारत की राजनीति और अर्थव्यवस्था पर सवर्णों और अमीरों का वर्चस्व बना रहे। किसानों और आदिवासियों की ज़मीनों पर पूंजीपतियों का कब्ज़ा होता रहे। लेकिन जेएनयु का माहौल इसमें बाधा है।

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जेएनयु के छात्र आदिवासियों के गांव में जाते हैं, दलितों की बस्तियों में जाते हैं, जन्तर मन्तर पर आवाज़ उठाते हैं। जेएनयु के छात्र आदिवासियों की ज़मीनें छीनने का विरोध करते हैं। इसलिए भाजपा और राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ ने जेएनयु को बर्बाद करने का षड्यंत्र बनाया। नकली वीडियो बनाये गए और जालसाज चैनल ज़ी टीवी पर झूठ बोल कर चलाये गए। जी टीवी पर दिखाए गए फर्ज़ी वीडियो की पोल तो अदालत में पहले ही खुल चुकी थी।

पुलिस ने डर कर जी टीवी वाला वो फर्जी विडियो अदालत में पेश ही नहीं किया बल्कि पुलिस ने अदालत में बोल दिया था कि हमारे पास कोई सबूत नहीं है। अब भारत सरकार की ख़ुफ़िया एजेंसी ने भी अपनी जांच रिपोर्ट में कह दिया है कि कन्हैया के खिलाफ कोई सबूत नहीं था और पुलिस ने जल्दबाजी में केस बनाया।

https://youtu.be/ZJfs-kHrEJs

अब पुलिस से यह पूछा जाए कि उसने किसके कहने से कन्हैया पर फर्ज़ी केस बनाया था? कन्हैया को जालसाजी कर के फंसाने वाले पुलिस आयुक्त बस्सी को मोदी सरकार ने इनाम में यूपीएससी का सदस्य बना दिया है। अब मोदी सरकार को अपनी जालसाजी के लिए कन्हैया और इस देश से मांफी मांगनी चाहिए।

भारत के लोग भविष्य में शायद ही किसी ऐसे देशद्रोही प्रधानमंत्री को फिर से चुनेंगे जो अपने ही देश की इतनी पुरानी विश्वप्रसिद्ध यूनिवर्सिटी को नष्ट करने की कोशिश करे और पकड़ा भी जाय। इनकी बजाय अब हमें शर्म आ रही है कि दुनिया हमारे बारे में क्या सोच रही होगी?


 

(हिमांशु कुमार समाजिक कार्यकर्ता हैं ये उनके निजी विचार हैं।)

 

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