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‘माई का दूध पिया है तो आरक्षण खत्म करके दिखाओ!’

बिहार चुनाव के पहले मोहन भागवत के बयान के बाद लालू प्रसाद ने आरएसएस-भाजपा को चैलेंज दिया था और चुनाव में अच्छी जीत हासिल की! लालू जी, मोहन भागवत के आरएसएस-भाजपा की सरकार ने आपके उस चैलेंज को स्वीकार कर लिया है, अब आप साबित कीजिए कि जीत हासिल करने के अलावा आप क्या कर सकते हैं..!

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अब बरास्ते अदालत आरएसएस-भाजपा ने लालू प्रसाद के उस चैलेंज पर लगभग अमल करके दिखा दिया है! अदालत के फैसले के खिलाफ उसे कुछ भी करना जरूरी नहीं लगा! फिलहाल नीट के नतीजे में सवर्णों से ज्यादा नंबर लाने वाले ओबीसी या एससी एसटी को ‘जेनरल’ या सामान्य कैटेगरी में नहीं मान कर उन्हें आरक्षित वर्ग में समेट दिया गया। एक बार में 9000 ओबीसी प्रतिभागी बाहर, इतने ही सवर्ण काबिज!

तकनीकी तौर पर ‘जेनरल’ या ‘सामान्य’ का अर्थ क्या सवर्ण कर दिया गया है? अब अंदाजा लगाइए कि समूचे तंत्र में आरक्षण के जरिए कितना बड़ा बदलाव आ रहा था और तंत्र पर सवर्ण वर्चस्व को बनाए रखने के मकसद से एक झटके में उस रास्ते को कैसे बंद कर दिया गया!

तो अब लालू प्रसाद या आरक्षण को सोशल जस्टिस का एक उपाय मानने वाले लोगों को क्या करना चाहिए? लंबी लड़ाई के बाद हासिल दलित-पिछड़ी जातियों की भागीदारी की आधी-अधूरी व्यवस्था को जिस तरह खत्म किया गया है, उसके बाद राजनीतिक लड़ाई की शक्ल क्या होगी? क्या आरक्षण खत्म करने का चैलेंज देने वाले लालू प्रसाद और समाज में बराबरी की बात करने वाली दूसरी पार्टियां या नेता इस मसले पर सरकार के रवैये के खिलाफ सड़क पर उतर रहे हैं, संसद-विधानसभाओं में कोई राजनीतिक पहल ले रहे हैं?

एक तरह से 15% सवर्णों के लिए सीधे 50.5% आरक्षण लागू कर दिया गया है! यह बराबरी के अधिकार की बात करने वाली तमाम राजनीतिक पार्टियों की परीक्षा का मौका है, एक बार वे फिर पहचाने जाएंगे कि ‘जेनरल’ की जो परिभाषा अदालत ने तय की और जिस पर बिना किसी देरी के तुरंत अमल शुरू हो गया, उस पर वे बयानों से आगे सक्रिय रूप क्या करते हैं! यह एक आगे बढ़ रहे समाज को पीछे की ओर मोड़ देने की कवायद है, सारे फिर पहचाने जाएंगे..!


आपको बता दें कि मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट के आरक्षण नियमों में इस साल से बड़ा बदलाव किया गया है। यहां आरक्षण की परिभाषा ही बदल दी गई है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद बने नये नियम के अनुसार ऑल इंडिया कोटे में सामान्य वर्ग के लिए नयी अनारक्षित कैटेगरी बनायी गयी है। इस श्रेणी में सामान्य वर्ग के साथ ओबीसी, क्रीमीलेयर वाले अभ्यर्थी शामिल नहीं होंगे।

सीबीएसई नीट इंफॉर्मेशन बुलेटिन में काउंसलिंग के दौरान ऐसे अभ्यर्थियों को अपनी श्रेणी यूआर दर्शाने के निर्देश दिये हैं। इसके अनुसार अच्छे अंक पाने वाले आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थी सामान्य मेरिट में जगह नहीं बना पायेंगे। इससे कम अंक वाले सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों को अप्रत्यक्ष रूप से लाभ मिलेगा। इस बार इसी आधार पर रिजर्व्ड कैटेगरी व अनरिजर्व्ड कैटेगरी की अलग-अलग काउंसलिंग होगी।

(अरविंद शेष पत्रकार हैं)

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