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भारतीय सैनिकों को याद रहे की वो अंग्रेजों के गुलाम हैं- तेज बहादुर यादव

जब कोई सैनिक वर्दी पहन कर सामने से गुजरता है तो देश का हर नागरिक उसे बड़े सम्मान की नजरो से देखता है लेकिन वो किस व्यवस्था मे रहता है। वो अंग्रेजों की बनाई हुई व्यवस्था है जिसमे उन्होंने अपनी सम्प्रभुता कायम करने के लिए भारतीयों को भर्ती किया पर व्यवहार ऐसा किया की उस सैनिक का मनोबल हरदम टूटता रहे।

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उन्हे जानवरों कि तरह अलग रखा जाता है व शराब का आदि किया जाता है फिर बटमैन बना कर हीनभावना पैदा की जाती है, ताकि भारतीय सैनिक को याद रहे की वो अंग्रेजों के गुलाम हैं। ऑफिसर (अग्रेजों) के लिए अलग मेस, अलग रहन सहन, अलग ऑफिस, अलग टांयलेट ताकि सैनिकों को लगे की हम निम्न श्रेणी के व गुलाम हैं।

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सभी प्रकार की प्रशासनिक शक्तियाँ सिर्फ ऑफिसर (अंग्रेजों) तक ही सिमित रखी और सैनिकों को सिर्फ मूलभूत सुविधाएं दान स्वरुप दी गयी, जिससे सैनिक देश के प्रति नहीं बल्कि ऑफिसर (अंग्रेजों) के प्रति वफादार रहे। उन्होंने भारतीय जवानों को दीन हीन बनाने की पूरी कोशिश की लेकिन अफसोस सिस्टम अब भी वही चल रहा है अब सिर्फ गोरे अंग्रेजों कि जगह काले अग्रेज बैठ हुए है।

वो उन अंग्रेजों के भी बाप बने हुए है बदला है तो वो सिर्फ चमड़ी का रंग जो गोरे से अब काला हो गया है व्यवस्था नहीं। लेकिन अफसोस देश आजाद है फिर व्यवस्था परिवर्तन क्यों नही हुआ?? अब तो कर सकते हैं। अंग्रेजी सिस्टम के खिलाफ आवाज उठाये और सैनिकों का अपना सम्मान दिलाए। सैनिकों को स्वाभिमानी बनाएं।


जय हिन्द। जय भारत।

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