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विमर्श

श्रेष्ठा ठाकुर ने पंडावादी मर्दों के गिरोह को दिखाया आईना

एक तो मातहत, उस पर औरत, मुंह खोलने और जुबान लड़ाने की हिम्मत कैसे हुई..!!!

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पुलिस अफसर श्रेष्ठा ठाकुर का तबादला एक प्रतिनिधि मामला है कि पंडावादी मर्दवाद अपनी सत्ता को लेकर किस कदर हर वक्त चौकन्ना रहता है, और अपने शासितों को कैसे हर वक्त अपनी ‘हैसियत’ में रहने का संदेश देता रहता है!

श्रेष्ठा ठाकुर ने पंडावादी मर्दों के गिरोह को आईना दिखाया था, सत्ता के संरक्षण के सामने झुकने से इनकार कर दिया था, और अपराध करते भाजपाइयों को बंद भी कर दिया था!

तो इसी से पहले ही पंडावाद के पहरेदार रहे भाजपाइयों के मर्दाना दिल को इतनी जोर की चोट लगी कि करीब दर्जन भर विधायक महोदय ने ‘असली मर्द की पहचान’ वाली जात राजपूत जाति के मुख्यमंत्री योगी से शिकायत की और मर्द जोगी जी की सरकार ने एक औरत को उसकी ‘हैसियत’ बता दी..!

मर्द सत्ता सिर उठा कर जीने वाली औरत से ऐसे ही डरती है और उसे काबू में रखने के लिए इसी तरह की निर्लज्ज हरकतें करती हैं..!


लेकिन शाबास श्रेष्ठा, कि उन्होंने अपने तबादले को चैलेंज के तौर पर लिया है और कहा कि दीया जहां भी रहेगा, रोशनी ही करेगा..!

तो मर्दानगी की कुंठा में मरते मर्दों… औरतें तैयार हैं तुम्हें सिखाने के लिए कि कैसे इंसान बना जाता है..! वक्त रहते इंसान बनना सीख लो यार..! इंसान बन जाओगे तो तुमको ही अच्छा लगेगा..!

( यों पुलिस महकमे से मुझे कोई मोह नहीं है। मेरे लिए यहां सत्ता और शासित के संबंधों पर नजर डालना जरूरी था! और, श्रेष्ठा को श्रेष्ठा कहने में क्या दिक्कत है कि कुछ लोग उन्हें ‘लेडी सिंघम’ जैसे मर्द रूपक में समेट रहे हैं..!)

(ये लेखक के निजी विचार हैं। अरविंद शेष वरिष्ठ पत्रकार हैं।)

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