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जब तक लखनऊ मेट्रो रहेगी, अखिलेश यादव लोगों के जेहन में दौड़ते रहेंगे

यह सर्वविदित है कि यूपी के लखनऊ में “मेट्रो” की थीम,मेट्रो बनाने हेतु कंस्ट्रक्शन विभाग का गठन तथा बजट का प्राविधान पूर्व की सरकार के मुखिया अखिलेश यादव ने किया था लेकिन इसे लेकर वर्तमान में जिस तरीके से सोशल मीडिया पर एक्शन-रिएक्शन आ रहा है, उसे मैं उचित नही मान सकता। सरकारे बदलती हैं तो उनकी प्राथमिकताएं बदल जाती हैं। किसी विषय पर सोचने का हर सरकार, पार्टी या व्यक्ति का नजरिया अलग-अलग होता है। प्रत्येक सरकार और उसको चलाने वाली पार्टी सरकार के कामो को खुद का बताती हैं, यह राजनैतिक चलन है।

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यदि सरकार बदलने के बाद “लखनऊ मेट्रो” को भारतीय जनता पार्टी के मुख्यमंत्री आदित्यनाथ फीता काट करके उद्घाटित करते हैं तो बुरा क्या है? वे वर्तमान मुख्यमंत्री हैं, सरकार के बजट से बने किसी कार्य के उद्घाटन का हक उसके मुख्य चेहरे अर्थात मुख्यमंत्री को प्राप्त है। यह सवाल उठाना कि यह अखिलेश यादव  का प्रोजेक्ट था, इसे अखिलेश यादव जी ने बजट दिया, यह केंद्र सरकार द्वारा अनापत्ति प्रमाण पत्र न मिलने से अखिलेश यादव जी के कार्यकाल में दौड़ न सकी इसलिए इसके उद्घाटन का हक अखिलेश यादव जी को है, बेमानी और सर्वथा अनुचित है।

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यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर की लिस्ट में शामिल कुतुबमीनार का निर्माण सन 1193 ई में कुतुबुद्दीन ऐबक द्वारा शुरू कराया गया जिसे वह पूर्ण नही करा सका। इसे बाद में इल्तुतमिश और फिर 1368 में फिरोज शाह तुगलक ने इसे पूर्ण कराया लेकिन आज भी यह कुतुबमीनार के नाम से ही प्रसिद्ध है तथा इसकी शुरुआत कुतुबद्दीन ऐबक द्वारा करवाने के कारण उसे ही इसके निर्माण का श्रेय जाता है ठीक ऐसे ही लखनऊ मेट्रो के साथ है।

लखनऊ मेट्रो की परियोजना को शुरू करवाने एवं अभी जिस रुट पर मेट्रो का उद्घाटन वर्तमान मुख्यमंत्री योगी ने किया है उसका श्रेय अखिलेश यादव को ही जायेगा तथा जब भी लखनऊ का आधुनिक इतिहास लिखा जाएगा तो लखनऊ के आधुनिकीकरण के कार्य मे महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली मेट्रो को अखिलेश यादव की ही देन माना जायेगा।


यह सही है कि लखनऊ मेट्रो अखिलेश यादव के खुद के साहस और यूपी सरकार के संसाधन से निर्मित है लेकिन यह भी सही है कि जो सरकार में रहेगा वही किसी परियोजना का पुनर्निर्माण, उन्नतिकरण और उद्घाटन करेगा। किसी पूर्व मुख्यमंत्री द्वारा किसी परियोजना के उद्घाटन का न प्राविधान है और न औचित्य इसलिए इस पर बहस चलाना बेमानी है कि अखिलेश यादव जी द्वारा निर्मित मेट्रो का उद्घाटन योगी जी ने क्यो कर दिया? हां इस बात को कभी झुठलाया न जा सकेगा कि लखनऊ मेट्रो अखिलेश यादव जी की देन है।

जब तक लखनऊ मेट्रो रहेगी तब तक इसके साथ अदृश्य रूप में अखिलेश यादव मेट्रो के साथ लोगो के जेहन में दौड़ते रहेंगे जो उद्घाटन के पत्थर पर नाम खुदवाने से बहुत बड़ी चीज है। लखनऊ मेट्रो और अखिलेश यादव एक दूसरे के पर्यायवाची और पूरक हो गए हैं जिसे न खत्म किया जा सकता है और न मिटाया ही जा सकता है।

(ये लेखक के निजी विचार हैं। चंद्रभूषण सिंह यादव त्रैमासिक पत्रिका यादव शक्ति के प्रधान संपादक हैं।)

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