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ऐ सुशासन बाबू की अंतरात्मा… क्या तेरा कदम 71 विधानसभा के लोगों के साथ धोखाधड़ी नहीं

#नीतीश_की_अंतरात्मा
नेताओं के लिये अंतरात्मा उनके सिस्टम में इंसटाल्ड एक ऐसी अवसरवादी एप्लीकेशन है, जो बाकी वक्त तो सोयी पड़ी रहती है लेकिन टेढ़े हो गये उल्लू को सीधा करने के लिये फौरन एक्टीवेट हो जाती है… जैसी कल एकाएक सुशासन बाबू के सिस्टम में एक्टिवेट हो गयी।

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बहरहाल, किसका साथ पकड़ना है किसका छोड़ना… यह उनका अपना अधिकार है, लेकिन हम इस अंतरात्मा नाम की एप्लीकेशन पर तो बात कर ही सकते हैं। तो उनकी अंतरात्मा को जैसे ही समझ में आया कि लालू परिवार भ्रष्ट हैं और उनके साथ जुड़े रह कर उनकी ईमानदार छवि पर असर पड़ रहा है (हालाँकि गठबंधन के वक्त अंतरात्मा को कोकीन के गहरे प्रभाव में माना जाये), तो अंतरात्मा तत्काल एक्टिवेट हो गयी और देश के तमाम गणमान्य उनकी महानता के गुणगान में लग गये।

मुझे उनकी इस प्योर गोल्ड अंतरात्मा से यह पूछना है कि जो उनके 71 विधायक हैं, उन्हें वोट किसने दिया था? जाहिर है कि भाजपाइयों ने तो नहीं दिया था, क्योंकि मुकाबला तो उन्हीं से था… उन्होंने तो अपने ही पसंद के भाजपा कैंडीडेट को जिताने की कोशिश की थी।

https://www.youtube.com/watch?v=Q8HNhld6e74

फिर वोट किसने दिया था… एक उन लोगों ने जो जदयू समर्थक थे, दूसरे उन लोगों ने जो कांग्रेस और राजद समर्थक थे लेकिन महागठबंधन की मजबूरी के चलते, विकल्पहीनता की स्थिति में जदयू के साथ आ खड़े हुए थे… लेकिन यह तय है कि उन तीनों श्रेणी के मतदाताओं ने अपना वोट भाजपा के खिलाफ ही दिया था।

तो ऐ नीतीश की अंतरात्मा… तू इस बात पे एक्टीवेट क्यों न हुई कि सत्ता के लिये भाजपा से गलबहियां उन 71 विधानसभाओं के मतदाताओं के साथ खुली धोखाधड़ी है, जिन्होंने दो साल पहले इसी भाजपा के खिलाफ वोट दिया था।


तेरी असल ईमानदारी तब सामने आती जब लालू से किनारा करने के साथ ही उस भाजपा से भी दूरी बना के रखती, जिसके खिलाफ ही तुझे जनादेश मिला था… जब तू उसी के साथ मिल गयी तो काहे की महान। तू इतनी महान थी तो विधानसभा भंग करा के, इसी भाजपा के साथ मिल के फिर जनता के बीच जाती और उससे जनादेश लेती।

https://www.youtube.com/watch?v=i5kbx6uM_8s

ऐ सुशासन बाबू की अंतरात्मा… तू सोचना जरूर, कि तेरा यह कदम क्या उन 71 विधानसभाओं के मतदाताओं के साथ खुली धोखाधड़ी नहीं, जहां कांग्रेस को वोट देने वालों ने, राजद को वोट देने वालों ने… तुझे इसलिये समर्थन दिया था क्योंकि उनके पास यही अकेला विकल्प था। क्या यह उस भरोसे का खून नहीं?

(लेखक सोशल मीडिया एक्टिविस्ट हैं।)

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