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विमर्श

पत्रकार की अपील- इस बार चुप ही रहिएगा प्रधानमंत्री जी….

70वें स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले की प्राचीर से बोलने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सुझाव मांगे हैं। इसमें उन्होंने देशवासियों से पूछा है कि वे इस बार किस मुद्दे पर बोलें। ऐसे में पत्रकार प्रशांत तिवारी ने प्रधानमंत्री को अपनी इच्छा जताते हुए पत्र लिखा है। पढ़िए….

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आदरणीय प्रधानमंत्री जी
मुझे गर्व है आप पर और आपके बोलने की शैली और उससे भी ज़्यादा आपकी कार्यशैली पर मैं आपसे बहुत कुछ सीखा हूँ और लगातार सीख रहा हूँ. .. पर आज जब मैंने देखा की आपने जनता से पूछा की किस विषय पर बोलूं.. तो मैं भी अपनी बात रखना चाहता हूँ आपसे.. कि इस बार आप ना बोलकर एक इतिहास रचें क्यूंकि आपने हर विषय के बारे में इतनी बार बोल लिया कि मुझे नहीं लगता कि मैं कुछ और सुनना चाहता हूँ…

चाहे वो देश का सत्तरहवा स्वतंत्रता दिवस हो या विदेशों में आपकी यात्रा का भाषण…या नोटबंदी पर आपका दिया गया एतिहासिक भाषण…… वो देशहित में था या नहीं हमें पता नहीं… सुनते रहे और खड़े रहे….. हमने बड़े शांति से चुनाव के पहले वाले वक्तव्य भी सुने थे आपके.

ख़ुशी भी हुई और अब भी है… पर अब और नहीं सुनना चाहता आपको…

क्यूंकि आज भी गरीब उसी हालत में हैं जैसे चुनाव के पहले था… हां वो अलग बात हैं कि आपके आने कि वजह से उसका बैंकों में खाता खुल गया हैं… और शिक्षा कि बात करें तो आप स्किल इंडिया जैसे बड़े प्रोजेक्ट को लेकर आये.. मेक इन इंडिया बनाया… लेकिन गांवों के सरकारी स्कूल में पढ़ रहे गरीब बच्चों को बैठ कर पढ़ने के लिए एक टाट का इंतज़ाम तक नहीं करवा पाए तो कुर्सी मेज कि व्यवस्था कि बात ही करना बंद कर देता हूँ..


अब आप कहेंगे ये तो राज्य सरकार का काम है… तब भी मैं कहूंगा मुझे नहीं पता पर बच्चे टूटे फर्श पे बैठ कर पढ़ते हैं और पानी वाली खिचड़ी खा कर घर चले जाते हैं… अब आप सोचिये कौन ज़िम्मेदार है..

मैं कहना चाहता हूँ कि जबसे आपकी सरकार आई है पूरे देश के अंदर देशभक्ति कि लहर भी दौड़ रही हैं… और जवान लगातार शहीद हो रहे हैं…. किसान मर रहे हैं… और जो बचते जा रहे हैं उन्हें धर्म-मज़हबी ठेकेदार मारते जा रहे हैं… थक गया हूँ आपकी स्पीच को सुनकर.. थक गया हूँ शहीदों की खबरे करके … थक गया हूँ… देश के हालात को देख कर.. इतना ना कहता मैं, पर आपके दिए गए भाषण और ज़मीनी हकीकत में ज़मीन-आसमान का फ़र्क़ हैं सर…

आप कभी चाय वाले थे ज़मीन से जुड़े थे पर अब राजनीति बेचने लगे हैं सर… उसमें चासनी लगाकर सरकारें गिराने लगे हैं… जिस तरह आपने या कहूं आपकी पार्टी ने 14 घंटे में बिहार में सरकार बना ली ना अगर उसी सिद्दत से भाषण के बजाय अपना 1 घंटा दिया होता तो आज भारत कि तस्वीर कुछ न कुछ ज़रूर बदली हुई दिखती.. इन शहरों में नहीं… उन गाँवों कि बात कर रहा हूँ और उन् लोगों की बात कर रहा हूँ जिनके पास आपका भाषण सुनने का साधन तक उपलब्ध नहीं हैं…..

मेरी आपसे दरख्वाश्त हैं कि मत बोलियेगा इस बार.
पर अगर बोलना ही हैं तो मैं क्या एक पूरा देश का हिस्सा चाहता हैं कि आप उस भारत कि तस्वीर को दुनिया के सामने ले आओ जो आज भी कही अँधेरे में कही खो गया हैं… आपके पास 2 साल और हैं कुछ ऐसा करिये कि मैं आपको अपना वोट दे सकूं…. बस अब चुप हो कर देश को सम्भाल लीजिये.. और बचा लीजिये इसे संस्कृति के युद्ध से और मज़हबी आतततियों से ..सिर्फ इतना ही कहना है..
धन्यवाद

आपके अपने ही देश का नागरिक

(लेखक इंडिया न्यूज में पत्रकार हैं।)

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