fbpx
ट्रेंडिंग  
ट्रेंडिंग  
विमर्श

बीजेपी को राजनीतिशास्त्र नहीं, अपराधशास्त्र के नजरिए से समझिए

आप में से कितने लोगों को आठ महीने पुरानी यह खबर याद है. 27 दिसंबर, 2016 की यह लगभग हर अखबार में पहले पन्ने पर छपी थी. और चैनलों में प्रमुखता से चली थी.

Advertisement

नोटबंदी के बाद हर दल ने अपना कैश बैंक में जमा कराया. बीएसपी ने भी कराया. बीएसपी के पैसे पर इनकम टैक्स की निगरानी लगा दी गई. पैसा बैंक में फंस गया.
अखबारों ने यह सब कुछ इस अंदाज में छापा मानो काला धन पकड़ा गया हो.

No automatic alt text available.
यह सब यूपी चुनाव के दौरान हो रहा था.

बीजेपी ने यूपी चुनाव अपने अथाह पैसे से लड़ा. यह हजारों करोड़ का चुनाव था.

चुनाव बाद इनकम टैक्स विभाग ने कहा कि बीएसपी के पैसा जमा कराने में कोई गड़बड़ी नहीं पाई गई.


चुनाव आयोग ने 4 मई, 2017 को कहा कि बीएसपी ने पैसा जमा करके कुछ भी गलत नहीं किया है. अब वह रकम निकाली जा सकती थी.

लेकिन तब तक तो खेल खत्म हो चुका था.

बीजेपी की राजनीति को राजनीति विज्ञान नहीं, अपराधशास्त्र के नजरिए से समझिए.

बीजेपी के शिखर पर इस समय नेता नहीं, छंटे हुए अपराधी है. उनका दिमाग अपराधियों की तरह ही काम करता है.

(ये लेखक के निजी विचार हैं। दिलीप मंडल वरिष्ठ पत्रकार, बहुजन चिंतक और लेखक हैं।)

Latest अपडेट के लिए National Dastak पेज को Like और Follow करे

0
To Top

© copyright reserved National Dastak. All right reserved