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राजनीति

मौजूदा बीजेपी सरकार में बैठे है सबसे ज्यादा (30 प्रतिशत ) दागी नेता

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नेताओं और अपराध का साथ हमेशा देखा जा सकता है। देश में कोई भी ऐसी राजनीतिक पार्टी नहीं है जो अपराध मुक्त छवि की हो। यही वजह की राजनीति में अपराधीकरण बढ़ता जा रहा है। भले ही सुप्रीम कोर्ट ने दागी विधायकों को चुनाव लड़ने में अयोग्य ठहराने से इंकार कर दिया है पर सुप्रीम कोर्ट ने साफ़ तौर पर कहा है कि इससे निपटने के लिए संसद के भीतर कोई कानून बनाने के आवश्यकता है।

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दरअसल मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में पांच जजों के सविंधान पीठ ने दागी सांसदों को अयोग्य ठहराने से इंकार कर दिया था और कहा था की अब संसद ये कानून लाये जिससे दागी उम्मीद्वार को राजनीति से दूर रखा जा सके। कोर्ट ने कहा सिर्फ आरोप तय होने से किसी को अयोग्य शाबित नहीं किया जा सकता है और बिना सजा शाबित हुए चुनाव लड़ने से नहीं रोका जा सकता है  इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने सभी राजनीतिक पार्टी से कहा की है जो भी उम्मीद्वार चुनाव लड़ रहे है और जिन पर आपराधिक मामलें दर्ज है उसकी जानकारी  को प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया दोनों पर सार्वजानिक करने का निर्देश दिया है।

दरअसल ADR रिपोर्ट अनुसार लोकसभा और राजयसभा के सांसद की संख्या को मिलाकर देखें तो लगभग 30 फ़ीसदी सांसद दागी है इनमें से 17 फीसदी सांसदों पर गंभीर आपराधिक मामले दर्ज है। देश के चुनाव और उससे सम्बंधित आकड़ो को इकठ्ठा करने वाली संस्था एडीआर की रिपोर्ट में सांसदों और पार्टीवार नेताओं के आपराधिक रिकॉर्ड का ब्योरा दिया गया है।

लोकसभा में 542 सांसदों में से 179 सांसदों पर आपराधिक मामले दर्ज है जो की कुल संख्या का 33 फीसदी है और 114 के खिलाफ संगीन मामले दर्ज हैं। ठीक इसी तरह राज्यसभा में 228 सांसदों में से 51 फीसदी पर यह मामलें दर्ज है उनमें से 20 के खिलाफ संगीन आपराधिक मामले दर्ज है। इसी तरह से दोनों  सदनों के सांसदों को मिलाकर 770 सासंदों में से 230 दागी हैं, जो पूरी संख्या का 30 फीसदी है।

ADR की रिपोर्ट के अनुसार सांसदों के खिलाफ आपराधिक मामले:

बीजेपी के 339 सांसदों में से 107 के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज है जिसमें से 64 सांसदों के खिलाफ संगीन आपराधिक मामले दर्ज है वहीँ अगर कांग्रेस की बात कर्रे तो उनके 97 सांसदों में 15 के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज है और 8  सांसदों के खिलाफ संगीन आपराधिक मामले दर्ज है।


कांग्रेस और बीजेपी दोनों पार्टियों के दागी सांसदों के तुलना करे तो, जहां बीजेपी के 32 फीसदी सांसद दागी है वहीं कांग्रेस के 15 फीसदी दागी सांसद है।

अगर सिर्फ फीसदी के हिसाब से देखें तो  शिवसेना में 86 फीसदी सांसदों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं।  शिवसेना के 21  सासंदों में से 18 के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं जिसमें 10 के खिलाफ हत्या, बलात्कार जैसे संगीन मामले में दर्ज है।

एडीआर की रिपोर्ट के अनुसार बात करे तो, एआईएडीएमके के 50 सांसदों में से 10 सांसदों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज है और 3 सांसदों  के खिलाफ तो संगीन आपराधिक मामले दर्ज हैं। वही राजद के 9 सांसदों में से 7 के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं और इन 7 सांसदों में से 6  के खिलाफ तो संगीन आपराधिक मामले दर्ज है। वहीं दूसरी ओर टीडीपी की बात करे तो उनके 22 सासंदों में से 7 के खिलाफ आपराधिक और 1 के खिलाफ संगीन आपराधिक मामले दर्ज हैं।

आपराधिक मामले में छोटी पार्टियों का भी योगदान है, लोक जनशक्ति पार्टी के 6 सांसदों  में से 2 पर  आपराधिक मामले दर्ज हैं, वहीं 1 के खिलाफ संगीन आपराधिक मामला दर्ज है।

विधायकों के खिलाफ आपराधिक मामले:

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बीजेपी और कांग्रेस के विधायकों के खिलाफ  आपराधिक मामलों  की तुलना करे तो बीजेपी कांग्रेस से आगे है। बीजेपी के 1451 विधायकों में  से 31 फीसदी विधायकों  पर आपराधिक मामले दर्ज हैं. वहीं, 20 फीसदी विधायकों के ऊपर तो संगीन आपराधिक मामले दर्ज हैं। वहीं, अगर कांग्रेस की तरफ देखतें है तो उनके 773 विधायकों में से 26 फीसदी विधायकों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं, वहीं 17 फीसदी कांग्रेस विधायकों के खिलाफ पर  संगीन आपराधिक मामले दर्ज हैं।

 महिलाओं के खिलाफ अपराध:

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महिलाओं के खिलाफ अपराध को देखें तो सांसदों में राज्यवार और अगर विधायकों की बात करे तो महाराष्ट्र इसमें सबसे ऊपर है। महाराष्ट्र के 12  सांसदों/ विधायकों पर महिला सम्बंधित आरोप के मामले दर्ज है और अगर बिहार की बात करे तो सिर्फ 2 सांसद / विधायकों के ऊपर ये मामले दर्ज हैं।

अगर महिलाओं के खिलाफ मामलों में पार्टिओं के बीच तुलना करे तो इसमें भी बीजेपी सबसे आगे है। बीजेपी में लगभग 12 सासंदों/ विधायकों के खिलाफ महिलाओं से संबंधित मामले में आपराधिक मामले दर्ज हैं, वहीं कांग्रेस की तरफ देखें तो उनके 4 सासंदों/ विधायकों के खिलाफ महिलाओं से संबंधित मामले में आपराधिक मामले दर्ज हैं।

हेट स्पीच को लेकर मामले:

hate speech

भड़काऊ भाषण की बात करे तो इसमें भी बीजेपी अव्वल है बीजेपी के 27  सांसदों / विधायकों के खिलाफ हेट स्पीच यानि भड़काऊ भाषण देने के मामले दर्ज है और अगर कांग्रेस की बात करे तो उनके 2 सासंदों/ विधायकों के ऊपर ये मामले दर्ज है।  हेट स्पीच के ज्यादातर मामले उत्तर प्रदेश से ही आते है।  यूपी के 15 सांसद/विधायकों के खिलाफ भड़काऊ भाषण देने के कारण उनके ऊपर केस चल रहा है। हेट स्पीच के मामले में दूसरे स्थान पर तेलंगाना है जहाँ 13 नेताओं के खिलाफ इस मामले में केस दर्ज है।

अपहरण के मामले:

kidnapping

 

इसमें भी हर बार की तरह बीजेपी सबसे आगे है बीजेपी सांसदों के खिलाफ अपहरण के सबसे ज्यादा मामले दर्ज है। और कांग्रेस इस मामले में दूसरे स्थान पर है  उनके 6 सासंदों/ विधायकों के खिलाफ यह मामले दर्ज है। अगर राज्य के हिसाब से देखे तो बिहार सबसे आगे है। बिहार के 12 सांसदों व विधायकों पर अपहरण के मामले दर्ज हैं। उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र इस मामले में दूसरे नंबर पर आते है।

मर्डर के मामले:

मर्डर के मामले में बीजेपी के 19 सासंदों/विधायकों के खिलाफ केस दर्ज हैं. वहीं, कांग्रेस के 6 सांसदों/ विधायकों के खिलाफ मर्डर के मामले दर्ज हैं. मर्डर के मामलों में उत्तर प्रदेश पहले स्थान पर है। उत्तर प्रदेश में मर्डर के 15 मामले दर्ज हैं।

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