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स्विस बैंक के आंकड़ों ने खोली मोदी सरकार की पोल, एक साल में भारतीयों ने जमा कराए 7000 करोड़

स्विस नेशनल बैंक ने सालाना आंकड़े जारी कर मोदी सरकार की नोटबंदी की पोल खोल कर रख दी है। 8 नवंबर 2016 को जब प्रधानमंत्री मोदी ने देशभर में नोटबंदी की घोषणा की थी तो इसके पीछे काला धन समाप्त करने का तर्क दिया गया था। लेकिन स्विस बैंकों में भारतीयों का जमा धन पिछले चार साल में पहली बार बढ़कर पिछले साल एक अरब स्विस फ्रैंक (यानि तकरीबन सात हजार करोड़ रुपये ) के दायरे में पहुंच गया जो एक साल पहले की तुलना में पचास फीसदी ज्यादा है।

इससे पहले तीन साल यहां के बैंकों में भारतीयों के जमा धन में लगातार गिरावट आई थी। अपनी बैंकिंग गोपनीयता के लिए पहचान बनाने वाले इस देश में भारतीयों के जमाधन में ऐसे समय दिखी बढ़ोतरी हैरान करने वाली है। जबकि मोदी सरकार विदेशों में कालाधन रखने वालों के खिलाफ अभियान चलाने का दावा करती आ रही है।

स्विस नेशनल बैंक ने जो सालाना आंकडे जारी किए हैं उनके मुताबिक स्विस बैंक खातों में जमा भारतीय धन 2016 में 45 प्रतिशत घटकर 67।6 करोड़ फ्रैंक (लगभग 4500 करोड़ रुपए) रह गया। एक तरफ भारतीयों के पैसे में बढ़ोतरी हुई है तो वहीं पाकिस्तानियों की जमापूंजी में करीब 21 फीसदी की गिरावट आई है।

यह राशि 1987 से इस आंकड़े के प्रकाशन की शुरुआत के बाद से सबसे कम थी। एसएनबी के आंकड़ों के अनुसार भारतीयों द्वारा स्विस बैंक खातों में सीधे तौर पर रखा गया धन 2017 में लगभग 6891 करोड़ रुपये (99।9 करोड़ फ्रैंक) हो गया। वहीं, प्रतिनिधियों या धन प्रबंधकों के जरिए रखा गया धन इस दौरान 112 करोड़ रुपये (1।62 करोड़ फ्रैंक) रहा।

ताजा आंकड़ों के अनुसार स्विस बैंक खातों में जमा भारतीयों के धन में ग्राहक जमाओं के रूप में 3200 करोड़ रुपये, अन्य बैंकों के जरिए 1050 करोड़ रुपये शामिल है। इन सभी मदों में भारतीयों के धन में आलोच्य साल में बढ़ोतरी हुई।

स्विस बैंक खातों में रखे भारतीयों के धन में 2011 में इसमें 12%, 2013 में 43%, 2017 में इसमें 50।2% की वृद्धि हुई। इससे पहले 2004 में यह धन 56% बढ़ा था।

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