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गुजरात के पूर्व सीएम मोदी के तत्कालीन मंत्री ने कहा-गोधरा में काम कर रहा था ‘आपराधिक दिमाग’!

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इतिहास की गलियों से भला कौन रोज-रोज गुजरना चाहता है। और खासकर उन गलियों से जो मानवता के लिए बेहद क्रूर और अंधकारमय साबित हुई हैं। लेकिन उन गलियों की दीवारों पर अगर लहू के धब्बे हों और इंसानी जिंदगियों के लुटने और उनके तबाह होने की इबारतें लिखीं हों। तो उन्हें पढ़े बगैर नहीं रहा जा सकता है। वैसे भी किसी राष्ट्र के जीवन में कुछ ऐसी घटनाएं हो जाती हैं जिनसे उसे न चाहते हुए भी बार-बार दो-चार होना पड़ता है। और अगर वो गुत्थियां सुलझी न हों तो उन पर बरबस ध्यान जाना स्वाभाविक है। वैसे भी सवालों के जवाब ढूंढना इंसानी फितरत होती है। और सवाल अनसुलझे हों तो उनके जवाब को मिलकर ढूंढना राष्ट्र और समाज की जिम्मेदारी बन जाती है। इसी तरह की एक गांठ गोधरा कांड की है। राष्ट्र के जीवन में वैसे भी 100-200 साल कुछ नहीं होते हैं। ये तो अभी 15 साल पहले की घटना है। हालांकि गुजरात दंगे और उस पूरी घटना पर बहुत बात हो चुकी है। उस पर जाने का मतलब है उस घाव को फिर से कुरेदना। लेकिन न्याय की कसौटी कहती है कि पीड़ितों और उनके परिजनों को न्याय मिलने तक उसे चाहकर भी छोड़ा नहीं जा सकता है।

अभी तक देश में ज्यादा बातें 2002 के गुजरात दंगों या फिर उससे जुड़े दूसरे अन्य पहलुओं को लेकर होती रही हैं। इसमें गोधरा कांड या फिर उससे जुड़े सवालों का जिक्र आता भी है तो दंगों को जस्टीफाई करने के लिहाज से। नहीं तो पूरी घटना को नजरंदाज कर दिया जाता है। उस पर कभी स्वतंत्रत तौर पर बात हुई ही नहीं। या फिर ये कहना अतिश्योक्ति नहीं होगा कि उसे पूरी तरह से छोड़ दिया गया। हालांकि कोर्ट में ये मामला चल रहा है। और अभी हाल में गुजरात हाईकोर्ट ने निचली अदालत से मिली 11 लोगों की मौत की सजा को आजीवन कारावास में बदल दिया है। लेकिन तमाम अदालती कार्रवाइयों के बावजूद बहुत कुछ ऐसा है जो न तो न्याय की चौखट तक पहुंच सका। और न ही उसकी तरफ कोई ध्यान दिया गया। और अगर कुछ लोगों ने कुछ सामने लाने का प्रयास किया भी तो उसे वहीं दबा दिया गया। बहुत सारे किरदार ऐसे हैं जो समय आने का इंतजार कर रहे हैं। लेकिन उनमें में से कुछ अब खुलने भी लगे हैं।

उन्हीं में से एक हैं सुरेश मेहता। गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री और केशुभाई पटेल से लेकर नरेंद्र मोदी तक की कैबिनेट में कई विभागों के मंत्री। इस घटना के दौरान भी वो नरेंद्र मोदी की कैबिनेट में संसदीय कार्यमंत्री थे। जनचौक संवाददाता महेंद्र मिश्र और कलीम सिद्दीकी ने उनसे गांधीनगर स्थित उनके आवास पर मुलाकात की थी। इस मुलाकात में उन्होंने गोधरा कांड से जुड़े एक ऐसे पक्ष की तरफ इशारा किया है जिस पर जांच एजेंसियों ने अभी तक कोई निगाह नहीं डाली है। या फिर वो पहलू बिल्कुल अनछुआ रह गया है। लिहाजा इस नये तथ्य की रोशनी में ये घटना फिर से एक स्वतंत्र जांच की मांग करती है।

नोट-इसमें शामिल दूसरे किरदारों से बातचीत हुई है। पूरी बातचीत कुल चार भागों में दी जाएगी। पेश है उसका पहला पार्ट-

https://www.youtube.com/watch?v=Hk2NPQMMuxQ

सुरेश मेहता, पूर्व मुख्यमंत्री-

छह महीने के भीतर जितने आरोप नरेंद्र मोदी ने केशुभाई पर लगाए अब उन्हीं आरोपों का उन्हें सामना करना पड़ रहा था। क्योंकि 6 महीने के भीतर ही उन्हें उपचुनावों के जरिये चुनाव लड़कर जीतना था। और होने वाले तीन विधानसभा के उपचुनावों में अगर गड़बड़ी हुई तो फिर प्रजा में बीजेपी की साख को बड़ा धक्का पहुंचेगा। ये सभी सीटें बहुत कमजोर थीं। अगर नरेंद्र मोदी के मुख्यमंत्री काल में ये सीटें चली गयीं तो क्या होगा? क्योंकि यही आरोप उन्होंने केशुभाई के ऊपर लगाए थे। साहब अब देखिए अपराधिक दिमाग कैसे-कैसे आगे चलता है। अब सही चैप्टर की शुरुआत होती है। तीन सीटों में से दो में बीजेपी हार गयी और तीसरी में नरेंद्र मोदी खुद गुजरात की सबसे मजबूत सीट जो राजकोट में थी उस पर बहुत कम वोट से मोदी जीते। जीत भी इसलिए हो पायी क्योंकि वो मुख्यमंत्री थे। 2001 आ गया था और 2002 में चुनाव होने वाले थे। और उस वक्त नरेंद्र मोदी का एक कमजोर रिकार्ड मुख्यमंत्री के तौर पर बना हुआ था। अब क्या किया जाए। क्योंकि चुनाव तो लड़ने हैं। तब एक घटना का मैं उदाहरण दे सकता हूं।…आप जांच कर सकते हैं वो सांसद भूपेंद्र सिंह सोलंकी थे वो अभी भी मौजूद है। उसने मुझे बताया।

सुरेश भाई नरेंद्र मोदी बहुत पतली बहुमत से जीते थे फिर भी मुझे धन्यवाद देने उनके घर जाना चाहिए। उसके मुताबिक संसद का सत्र खत्म होता है। मैं 27 फरवरी को नरेंद्र मोदी के घर सुबह फ्लाइट से उतरने के बाद गया। वो साबरमती-गोधरा से सांसद थे। कौन भूपेंद्र सिंह सोलंकी? एस-6 जिस लोकसभा क्षेत्र में हुआ उसका एमपी था भूपेंद्र सिंह सोलंकी। उसी दिन सुबह 27 फरवरी की सुबह वो फ्लाइट से उतर कर सीधा जाता है नरेंद्र मोदी को चुनाव जीतने का धन्यवाद देने उनके आवास पर। उस वक्त नरेंद्र मोदी ने बताया कि आज मैं तुम्हें चाय नहीं पिलाऊंगा तुम सीधे अपने लोकसभा क्षेत्र में जाओ। और अशोक भट्ट तुमको फालो करते हैं। अशोक भट्ट बीजेपी के पुराने नेता और मंत्री समेत कई पदों पर रह चुके हैं। घटना कितने बजे होती है वहां आप वो टाइमिंग देख लीजिए। प्लेन लैंड होता है और कैसे होता है सब……भूपेंद्र सिंह आए दिल्ली से नरेंद्र मोदी के घर। भूपेंद्र सिंह ने मुझे बताया कि जैसे ही मैं घर से बाहर निकल रहा था। उसी समय अशोक भट्ट वहां प्रवेश कर रहे थे। तो मैं फिर उनके साथ लौट गया। मोदी ने मुझसे पूछा कि तुम क्यों लौट आए?आपने कहा कि अशोक भट्ट आ रहा है तो मैंने सोचा कि उन्हीं के साथ निकल जाऊंगा। वो नहीं तुम जाओ। फिर अशोक भट्ट प्रवेश करता है। और ये निकलते हैं।

उसने बताया कि गोधरा पहुंचने तक, उसका लोकसभा क्षेत्र गोधरा…ये नहीं बताया था कि क्या होना है। फिर टाइमिंग आप चेक करिए।…..वो टाइमिंग आप चेक करिए। जब हमारे पास कोई प्रमाण नहीं है। और जब ये रिकार्ड किया जा रहा है।….भूपेंद्र सिंह ने बताया कि मैं जब रास्ते में जा रहा था। कई फोन मुझे आ गए। मेरे लोकसभा क्षेत्र से। ट्रेन चली गयी….सुलग गया…ये हुआ…वो हुआ…ये हुआ..रास्ते में मुझे कलेक्टर जयंती रवि उस वक्त कलेक्टर थीं…जयंती रवि का फोन आया कि हमने सुना है कि आप आ रहे हैं तो ऐसा करिए सीधे पहले कलेक्टर आफिस आइये। रेलवे स्टेशन पर मत जाइये। सीधे कलेक्टर आफिस आइये। क्योंकि ये हंगामा बड़ा हो चुका था। वो सांसद थे। उसने कहा कि सब कार्यकर्ताओं की और मेरा वास्ता भी वहीं से है। तो मैं पहले स्टेशन गया। फिर वहां तो मैंने जो देखा क्योंकि मैं डेरी का चेयरमैन था और कई मुसाफिरों के बच्चों को पानी और दूसरी चीजों के लिए डेरी मैनेजर को बताया कि ये सब भेजो।…जब मैं कलेक्टर आफिस पहुंचा। तो वहां अशोक भट्ट पहले से मौजूद थे। आप देखिए परिस्थितियां कैसे आगे बढ़ती हैं। कृष्ण अय्यर कमेटी बनी हुई थी। जो इस गोधरा घटना के बारे में इस नतीजे पर पहुंचीं। उसमें हरेन पांड्या चैप्टर हुआ। हरेन पांड्या वाला समय भी वही था। जो मैं कहना चाहता हूं कि ये एक आपराधिक दिमाग था जो काम कर रहा था। फिर आगे देखिए सत्ता पर कब्जे के लिए और फिर उसे बनाए रखने के लिए। कैसे उसे बनाए रखा जाए।

जारी….

साभार- जनचौक डॉट कॉम

 

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