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बचपन में स्टेशन पर चाय बेचने वाले नरेंद्र मोदी ने बेच डाले 20 रेलवे स्टेशन

नई दिल्ली। साल 2014 के आम चुनाव से पहले पीएम मोदी के बारे में कई चैनलों में दिखाया गया था कि मोदी बचपन में रेलवे स्टेशनों पर चाय बेचा करते थे। खुद पीएम मोदी भी रैलियों में बताया करते थे कि वे जब बच्चे थे तो गुजारा करने के लिए गुजरात के वडनगर स्टेशन पर अपने पिताजी के साथ चाय बेचा करते थे। लेकिन आज वही बच्चा बड़ा हो गया है और देश का पीएम बन गया है तो लगता है अपनी उसी खुन्नस को निकालने के लिए देश के स्टेशनों को बेचने जा रहा है।

जी हां आपने सही पढ़ा, पीएम मोदी देश के बीस स्टेशनों की नीलामी करने जा रहे हैं। रेल मंत्रालय ने देश भर के 20 स्टेशनों को निजी कंपनियों को नीलाम करने का फैसला किया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस लिस्ट में मुंबई का लोकमान्य तिलक टर्मिनल, मुंबई सेंट्रल (मुख्य), बोरिवली, पुणे, ठाणे, विशाखापत्तनम, हावड़ा, इलाहाबाद, कानुपर सेंट्रल, कामाख्या, फरीदाबाद, जम्मू तवी, उदयपुर शहर, सिकंदराबाद, विजयवाड़ा, रांची, कोझिकोड, यसवंतपुर, बैंगलोर कैंट, भोपाल और इंदौर जैसे स्टेशनों को पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप के तहत विकसित करने का फैसला किया है।

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सरकार ने इन स्टेशनों की ऑनलाइन नीलामी का निर्णय किया है, जिसमें 28 जून तक इच्छुक कंपनियां बोली लगा सकती है। इसके नतीजे 30 जून को घोषित किए जाएंगे, जहां सबसे ज्यादा बोली लगाने वाले का नाम सार्वजनिक किया जाएगा।

रिपोर्ट के मुताबिक, कानपुर सेंट्रल स्टेशन के लिए न्यूनतम बोली की सीमा 200 करोड़ रुपये, जबकि इलाहाबाद स्टेशन के लिए 150 करोड़ रुपये रखा गया है। स्टेशनों को निजी कंपनी को सौंपने के बाद रेलवे सिर्फ ट्रेनों का परिचालन , सुरक्षा व्यवस्था, टिकट बिक्री और पार्सल की जिम्मेदारी संभालेगा। वहीं निजी कंपनी स्टेशनों पर 5 स्टार होटल, शॉपिंग मॉल और मल्टी प्लेक्स बनाएगी। इसके साथ ही वे प्लेटफार्म पर फूड स्टॉल, रिटायरिंग रूम, फ्रेश एरिया और प्ले एरिया भी विकसित करेंगे, जहां ट्रेनों के लेट होने की हालत में मुसाफिर अब वक्त बिता सकेंगे।

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रेल मंत्रालय ने तय किया है कि पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप की इस व्यवस्था में स्टेशनों को 45 साल के लिए प्राइवेट कंपनियों को लीज पर दिया जाएगा। इस दौरान कंपनियों को अपने रेलवे स्टेशनों पर विश्वस्तरीय सुविधाएं देना होगा। इस योजना के तहत हालांकि रेलवे और कंपनियों के बीच आमदनी के बंटवारे का फार्मूला तय नहीं हो पाया है। रेलवे जहां आमदनी में 50-50 का हिस्सा चाहता है, वहीं निजी कंपनियां 70-30 की हिस्सेदारी की बात कर रही हैं।

इसका सबसे बड़ा नुकसान यह होगा कि अब निजी कंपनियां नौकरी देंगी नहीं तो आरक्षण का कोई मतलब नहीं रह जाता। यानि कि आरक्षण खत्म करने की ओर मोदी सरकार का एक बड़ा कदम है। चूंकी आरक्षण एक संवैधानिक अधिकार है जिसकी वजह से मोदी सरकार इसे आसानी से खत्म नहीं कर सकती इसलिए आरक्षण को निष्क्रिय कर देने वाली नई-नई योजनाओं को लाया जा रहा है। सरकारी विभागों का तेजी से निजीकरण किया जा रहा है, जिससे कि आरक्षण का असर ही खत्म हो जाए।

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आरक्षण तो सरकारी विभागों में ही है जब उसे ही प्राईवेट कंपनियों के हाथों बेच दिया जाएगा तो आरक्षण सिर्फ संविधान की शोभा बढ़ाने मात्र के लिए रह जाएगा। शायद सरकार अपनी इसी मंशा के तहत रेलवे स्टेशनों को प्राईवेट कंपनियों के हाथों बेचने वाली है। मतलब इन स्टेशनों से आरक्षण की सुविधा खत्म। अब इन स्टेशनों पर किसी भी sc, st और obc को आरक्षण के तहत नौकरी नहीं मिलेगी।

 

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