ट्रेंडिंग  
ट्रेंडिंग  
राजनीति

…तब रामनाथ कोविंद ने किया था ओबीसी महिलाओं के आरक्षण का विरोध

then ramnath kovind oppose obc women resarvation

नई दिल्ली। बीजेपी ने एनडीए की तरफ से बिहार के वर्तमान राज्यपाल रामनाथ कोविंद को राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार घोषित किया है। इसके बाद रामनाथ कोविंद को राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाया गया है। रामनाथ कोविंद भाजपा का दलित चेहरा हैं। वह कोली जाति से आते हैं। यूपी में कोली जाति जाटव और पासी के बाद सबसे ज्यादा संख्या वाली तीसरी दलित जाति है। कोविंद संघ के कद्दावर नेता रहे हैं। वे स्वयंसेवक रह चुके हैं। भाजपा के पुराने नेता हैं और संघ तथा भाजपा में कई प्रमुख पदों पर रहे हैं। वह भाजपा की तरफ से 1994 से 2006 के बीच दो बार राज्यसभा सदस्य रह चुके हैं।


दलित वोटबैंक साधने की कोशिश
दलित समुदाय से आने वाले रामनाथ कोविंद के राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाकर एनडीए ने विपक्षी पार्टियों को चौंका दिया है। दरअसल भाजपा ने कोविंद के सहारे लगभग खिसक चुके दलित वोटबैंक को साधने की कोशिश की है। 2019 में लोकसभा चुनाव होने हैं, ऐसे में भाजपा शासित राज्यों से दलित उत्पीड़न की लगातार घटनाओं ने भाजपा के दलित वोटबैंक को दूर कर दिया है।

आरएसएस से जुड़ाव होना भी अहम वजह
ऐसे में भाजपा ने रामनाथ कोविंद का नाम यूं ही नहीं बढ़ाया बल्कि उनका आरएसएस से जुड़ाव होना भी एक अहम बात है। उन्हें सिर्फ दलित होने की वजह से राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार नहीं बनाया गया है बल्कि वह आरएसएस के एजेंडे पर भी फिट साबित होते हैं। यह तो जगजाहिर है कि आरएसएस का मुख्य एजेंडा देश से आरक्षण खत्म करना है और रामनाथ कोविंद भी इस एजेंडे पर काम कर चुके हैं।


https://www.youtube.com/watch?v=ni7X5AWLeyU

कोविंद ने किया था ओबीसी महिलाओं के आरक्षण का विरोध
मामला साल 2010 का है। भाजपा के ओबीसी नेता गोपीनाथ मुंडे ने महिला आरक्षण में ओबीसी महिलाओं को अलग आरक्षण देने की मांग उठाने की बात कही थी। कोविंद उस समय भाजपा के प्रवक्ता थे। तभी न्यूज एजेंसी आईएएनएस ने कोविंद से ओबीसी महिला आरक्षण पर उनकी प्रतिक्रिया ली। तब उन्होंने साफ कहा था कि “हम आरक्षण में आरक्षण को स्वीकार नहीं करेंगे। 33 फीसदी महिला आरक्षण के भीतर अलग से आरक्षण को स्वीकार नहीं किया जाएगा।”

kovind


ओबीसी महिलाओं के आरक्षण का विरोध की खबर यहां क्लिक कर पढ़ें…

कोविंद ने कहा था, “हमारी पार्टी का रूख स्पष्ट है। हम महिला आरक्षण विधेयक को मौजूदा रूप में ही पारित करवाना चाहते हैं।” दरअसल मुंडे ने अन्य पिछड़ा वर्ग के नेताओं की बैठक के बाद कहा था कि वह महिला आरक्षण में अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षण मांग को पार्टी में उठाएंगे।

महिला आरक्षण बिल 9 मार्च 2010 को पारित किया गया। संसदीय इतिहास में वह दिन ऐतिहासिक दिन माना गया था। दूसरे दिन सभी अख़बारों की लीड स्टोरी वही थी। लोगों ने पहली बार सुषमा स्वराज, वृंदा करात और नज़मा हेपतुल्ला को एक मंच से लोगों का अभिवादन करते देखा था।

पढ़ें- रामनाथ कोविंद RSS के नेता हैं इसीलिए BJP ने बनाया राष्ट्रपति उम्मीदवार- मायावती


महिला आरक्षण पर शरद यादव सहित कई पार्टियों ने आपत्ति जताई थी। उनका तर्क था कि महिला आरक्षण में भी जातिवार आरक्षण होना चाहिए। अगर ऐसा नहीं हुआ तो सिर्फ शहरी महिलाओं का दबदबा हो जाएगा।

Latest अपडेट के लिए National Dastak पेज को Like और Follow करे

To Top

© copyright reserved National Dastak. All right reserved