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लव मैरिज सशक्तिकरण का ISO सर्टिफिकेट नहीं...

Created By : अपूर्वा Date : 2016-12-25 Time : 12:20:43 PM

लव मैरिज सशक्तिकरण का ISO सर्टिफिकेट नहीं...

यह मानसिकता क्यों बनती जा रही है कि अरैंज मैरिज बेकार चीज़ है ? जरूरी तो नहीं कि हर किसी को प्यार हो ही जाए और अगर हुआ भी हो तो सही इंसान से हुआ हो। मेरे पास ऐसी दो दोस्त हैं जो घर छोड़ के चली गयी थी, फिर वापस लाई गयी, खूब हंगामा हुआ, फिर उनकी शादी हुई और अब वो एहतराम करती हैं कि उनका दिमाग खराब था और उनका प्रेमी सच मे उनके काबिल नहीं था।

 

एक को मैं जानती हूँ जिसने एक ऐसे व्यक्ति से शादी की थी जो उनसे उच्च वर्ग से था, एक साल बाद उसने फोन किया उसको बचाने के लिए। मैं यह नहीं कह रही हूँ कि प्रेम विवाह खराब है लेकिन प्रश्न यह भी है कि साथी चुनने की हमारी समझ कितनी विकसित है ? 

 

मेरे बुआ के यहाँ जो किरायेदार थे, वो एक ऐसा मुस्लिम परिवार था जिसमें बच्चों की दादी से प्यार हुआ एक हिन्दू 37-38 साल के आदमी को, उन्होने धर्म वरम बदल लिया और आज आलम यह है कि ... पूछिये ही मत ! 

जब मेरी एक दोस्त लड़ रही थी अपनी शादी के लिए, उसका नारा था "मुझे मेरे मन का कोर्स भी नहीं करने दिया था लेकिन अब मैं कोई बात नहीं मानूँगी" .... मतलब मुझे समझ नहीं आया था कि कोर्स ज्यादा जरूरी था या ये काहिल लौंडा !! (आगे की लाइंस को शशि कपूर की तरह पढे) कोर्स के लिए क्यो नहीं लड़ी, आप को जब डांस जॉइन नहीं करने दिया गया, तब क्यो नहीं लड़ी खुद के टैलंट के लिए, बहुत छोटी छोटी लड़ाइयाँ होती हैं जो हमें किसी बड़ी लड़ाई के लिए तैयार करती हैं। जिंदगी कोई फिल्म नहीं हैं जिसमें आप एक चनिया चोली पहन के अनपढ़ का किरदार निभा रही हैं और अचानक से कोई डॉक्टर बाबू आएगा और ब्याह लेगा, न ही यह कि आप मॉड हो, आप पर दिल मवाली का आएगा फिर वो बदल जाएगा। 


सच यह है कि हम जो स्तर मेंटेन करते हैं, हमें उसी स्तर के लोग मिलते हैं। स्तर बढ़ता है खुद के लिए स्टैंड लेने से, हर उस जगह पर जहां आप के व्यक्तित्व को दबाया जा रहा हो। आत्म निर्भरता-परिपक्वता-खुद को निखारना ज्यादा जरूरी है, भविष्य मे अगर आप गलती भी करें तो डाइमेज कम से कम हो। 


अगर आप को आपके माँ पापा ने सारे मौके दिये आगे बढ्ने के तब भी एक बार खुद पर और पसंद पर शक करने में कुछ नहीं जा रहा ! कल ही किसी पोस्ट मे पढ़ा था प्यार बड़ी चीज़ है पर जिंदगी उस से भी बड़ी चीज़ है। जब वी मेट की करीना की तरह आप के लकी होने के चांसेज उतने ही कम है जितने जितना आटे में नामक ! तो एक बार निष्पक्ष हो कर पैरेंट्स की बात सुनने मे कोई बुराई नहीं। 


शादी के लिए स्टैंड लेने से पहले एक रिचेक जरूरी है कि क्या जो मेरा चुनाव है वो जिंदगी के लिए ठीक है ? कहीं यह मेरी ज़िद तो नहीं ? प्रेम और ज़िद में छोटा ही फर्क होता है।  
लव मैरिज कोई सशक्तिकरण का आईएसओ सेर्टिफिकेट नहीं है !! मेरी दादी की शक्ति, मेरी दीदियों से ज्यादा है।

 

(लेखिका आगरा विश्वविद्यालय की छात्रा हैं।)

 


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