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'इस्लाम फोबिया' के शिकार लोगों की नजरों में दाढ़ी नहीं, दाढ़ी रखने वाले खटक रहे...

Created By : अशरफ हुसैन Date : 2017-01-11 Time : 17:20:50 PM


'इस्लाम फोबिया' के शिकार लोगों की नजरों में दाढ़ी नहीं, दाढ़ी रखने वाले खटक रहे...
imran

"इस्लाम फोबिया"
ध्यान दीजिये, ये हैं मुम्बई के जीआर पाटिल कॉलेज के बीकॉम के छात्र सय्यद इमरान अली, इमरान नेशनल स्तर के मुक्केबाज़ हैं, लेकिन इमरान के लिए उनका मुसलमान होकर दाढ़ी रखना मुंबई यूनिवर्सिटी के खेल विभाग को खटक रहा है, इसलिए युनिवर्सिटी के खेल विभाग ने दाढ़ी रखने की वजह से इमरान को बाहर कर दिया है, और साथ ही साफ़ साफ़ कह दिया गया है कि जब तक दाढ़ी नहीं कटवाओगे, शामिल नहीं किया जाएगा।


याद है न इससे पहले एयर फोर्स में दाढ़ी पर रोक लगाया जा चुका है और युपी के असद खान को कालेज से निष्कासित भी इसी लिए किया गया था। 

 


दरअसल इनको दाढ़ी रखने से दिक्कत नहीं है , इनको तो दिक्कत है दाढ़ी रखने वालों से, देश के शैक्षणिक संस्थानों से लेकर अब यह मामला खेल के मैदान तक पहुंच चुका है।

 


धर्मनिरपेक्ष संविधान के इस देश में व्यवस्थाएँ कैसे संप्रदायिक होती जा रही हैं इसे समझना ज्यादा कठीन नहीं है, यहाँ एक नग्न संत देश के एक राज्य की विधानसभा में पीठासीन अधिकारी से भी उच्च स्थान ग्रहण करके प्रवचन दे सकता है, बाबाओं का नग्न समूह पुलिस की सुरक्षा में उत्पात मचा सकते हैं तो सिख या अन्य धर्म के लोगों पर कोई ड्रेस कोड नहीं लगते और लगना भी नहीं चाहिए क्युँकि यह व्यक्ति विशेष की धार्मिक परम्परा का प्रतीक है।


इससे परे इस देश में प्रधानमंत्री अपनी मर्ज़ी से दाढ़ी रख सकते हैं, एक पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष भी दाढ़ी रख सकता है, तमाम सांसद और मंत्री भी दाढ़ी रख सकते हैं और सेना हो या अन्य संस्थान जहाँ चोटी रखे तमाम लोग भी आपको दिख जाएँगे परन्तु मुसलमान की दाढ़ी से सबको आपत्ती है, माफ कीजिएगा, अदालतों को भी। ये हमारे बदलते भारत की तस्वीर है, वाह गज़ब का बदलता जा रहा है यह देश।


अपने धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस देश में सबको दाढ़ी रखने बाल रखने इत्यादि की आज़ादी है और यदि कोई संस्थान इसे अपने ड्रेसकोड के विरुद्ध मानता है तो वह ऐसा ही नियम सबके लिए लागू करे और सबको इस ड्रेसकोड से इन्कार करने पर दंड दे। लेकिन यह सोचना भी मूर्खता ही होगा क्योंकि इस्लाम फोबिया के शिकार लोगों की नजरों में दाढ़ी नहीं खटकती है बल्कि दाढ़ी रखने वाले खटक रहे हैं।


ऐसे लोगों से मुखातिब होकर केवल एक ही बात कहनी चाहिए,

हमारे सदियों की मोहब्बत का ये अंजाम दिया है,
तुम्हारी घटिया सोच ने दाढ़ी को बदनाम किया है,

 

(ये लेखक के निजी विचार हैं।)

 


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