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दलित आन्दोलन से घबराई बिहार सरकार- प्रो. रतन लाल

Created By : प्रो. रतन लाल Date : 2016-12-21 Time : 18:00:04 PM


दलित आन्दोलन से घबराई बिहार सरकार- प्रो. रतन लाल

नवम्बर 2015 में बिहार में तथाकथित ‘सामाजिक न्याय’ और ‘धर्मनिरपेक्षता’ की सरकार में दलित उत्पीड़न की असंख्य घटनाएँ घटी हैं। छात्रों की छात्रवृत्ति में अप्रत्याशित कटौती और अपने अधिकार की मांग कर रहे छात्रों की पीठ पर सरकारी लाठियां, प्रमोशन में आरक्षण की समाप्ति, भागलपुर में भूमिहीन दलितों (खासकर बुज़ुर्ग महिलाओं) पर कातिलाना पुलिसिया और प्रशासनिक हमला, कई और दिल दहलाने वाली घटनाएँ। त्रासदी देखिए इन्हीं दलितों ने महागठबंधन को अप्रत्याशित सफलता दिलाई थी। 

 


विदित हो कि इन मुद्दों को लेकर भारतीय छात्र कल्याण संघ, आरक्षण बचाओ-संविधान बचाओ मोर्चा और विशेष रूप से अनुसूचित जाति/जनजाति कर्मचारी संघ लगातार आन्दोलनरत रहा है। नवम्बर 27 को कर्मचारी संघ ने पटना के कृष्ण मेमोरियल हॉल में एक बड़ा कार्यक्रम का भी आयोजन किया था, जिसमें भारत में पूर्ण मुख्य न्यायाधीश श्री बालकृष्णन, गुजरात के जिग्नेश मेवनी और मैं भी मौजूद था। इस कार्यक्रम में वक्ताओं ने खुलकर सरकार की दलित एवं गरीब विरोधी नीतियों का विरोध किया था और यह आह्वान भी किया था कि यदि सरकार अपनी दलित और गरीब विरोधी नीतियों से बाज नहीं आई तो आने वाले दिनों में बिहार में राजनीतिक विकल्प भी पेश किया जायेगा।

 


अभी अभी पता चला है कि कर्मचारी कर्मचारी संघ में जितने पदाधिकारी सक्रिय हैं, एक-एक करके उनके घर पर छापा मारा जा रहा है। पोस्ट लिखने तक ओम प्रकाश मांझी के घर पर छापेमारी का कार्यक्रम चल रहा है। विदित है कि श्री मांझी ने 27 नवम्बर वाले कार्यक्रम में सरकार की नीतियों की कटु आलोचना की थी। ज्ञात हुआ है कि हाल ही में, एक और दलित अधिकारी के घर पर छापेमारी हुई थी।

 


हम किसी तरह के भ्रष्टाचार का समर्थन नहीं करते। लेकिन यह प्रश्न उठता ही है सिर्फ दलित अधिकारीयों के घर पर ही छापेमारी क्यों? क्या बाकी समुदाय के अधिकारी ‘हरिश्चंद्र’ हैं? यह सर्वविदित है कि देश के संसाधनों को किसने लूटा है। 

 


इस तरह से एक्टिव दलित अधिकारीयों पर दमनात्मक कार्यवाई का अर्थ यही है कि सरकार दलितों के विरोध से घबरा गई है और आन्दोलन को दबाने के लिए पूरे दलित ज़मात को आतंकित करने की कोशिश कर रही है। इसलिए इन सरकारी हथकंडों से घबराने की जरुरत नहीं है और न ही अब दलित/वंचित ज़मात डरने वाला है। सभी साथियों से अपील और आग्रह है कि बिहार सरकार की दलित विरोधी नीति और दमन का विरोध करने के लिए तैयार रहें। उचित समय पर बिहार में शासन कर रहे लोगों को उनके असली स्थान पर पहुंचा दिया जायेगा।
 

(लेखक हिंदू कॉलेज में इतिहास के प्रोफेसर हैं।)

 


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